भदोही। गोपीगंज की नई बस्ती में कबाड़ की दुकान की आड़ में कथित साइबर ठगी का नेटवर्क चलाने के आरोप में गिरफ्तार अजीजुल से पूछताछ के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उसके ठिकाने से बरामद 889 मोबाइल फोन और 923 सिम कार्ड ने पुलिस के सामने इस नेटवर्क के बड़े पैमाने पर संचालित होने की आशंका खड़ी कर दी है। जांच में अजीजुल के पिता सागर की भी कथित भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। इसके अलावा उसके साथ रहने वाले कई अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के कांटी थाना क्षेत्र के सालापाड़ा निवासी अजीजुल करीब ढाई वर्ष से गोपीगंज की नई बस्ती में रह रहा था। आरोप है कि उसने कबाड़ की दुकान को अपनी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद होने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया जाता था और इनका संबंध किन साइबर अपराधों से है।
बरामद किए गए 889 मोबाइल फोन और 923 सिम कार्ड जांच के दौरान सक्रिय पाए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में सक्रिय उपकरण मिलने के बाद पुलिस को आशंका है कि मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं हो सकता। प्रारंभिक जांच में नेटवर्क के पूर्वांचल के अन्य हिस्सों और देश के दूसरे क्षेत्रों तक जुड़े होने की संभावना की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, प्रत्येक मोबाइल और सिम के वास्तविक इस्तेमाल की पुष्टि तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच में यह भी सामने आया कि अजीजुल अकेले नहीं रहता था। उसके साथ चार अन्य लोग भी नई बस्ती में रह रहे थे। पुलिस की कार्रवाई के दौरान इनमें से तीन कथित साथी मौके से फरार हो गए। उनकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं। पुलिस उनके संभावित ठिकानों और अजीजुल के साथ उनके संबंधों की जानकारी जुटा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क के संचालन और भूमिका को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बरामद 923 सिम कार्डों का रिकॉर्ड खंगालना है। पुलिस प्रत्येक नंबर से जुड़े विवरण, उसके इस्तेमाल और संबंधित गतिविधियों की जांच कर रही है। इन सिम कार्डों से जुड़े बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी जुटाई जा रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि यदि इन नंबरों का इस्तेमाल साइबर ठगी में हुआ तो ठगी की रकम किन खातों तक पहुंची और वहां से उसे किन खातों या माध्यमों के जरिए आगे भेजा गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
बरामद मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबरों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनमें से कितने मोबाइल चोरी, गुम या छीने गए थे और वे आरोपियों तक कैसे पहुंचे। वास्तविक मालिकों की पहचान होने पर मोबाइलों की पूरी श्रृंखला का पता लगाने में मदद मिल सकती है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि नेटवर्क में मोबाइलों की खरीद, बिक्री, मरम्मत और दोबारा इस्तेमाल की क्या व्यवस्था थी।
पुलिस के अनुसार, अजीजुल चोरी, गुम या छीने गए पुराने और नए मोबाइल फोन को अपने ठिकाने पर लाकर खोलता और दोबारा असेंबल करता था। जांच में ऐसे मोबाइलों को मुर्शिदाबाद भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसके अलावा मुर्शिदाबाद से असेंबल किए गए मोबाइल उसके पास आने की बात भी जांच में सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मोबाइलों की इस आवाजाही में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनका साइबर अपराध से क्या संबंध था।
जांच की एक कड़ी पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से भी जुड़ गई है। पुलिस अजीजुल से पूछताछ में सामने आए नामों और ठिकानों की पुष्टि के लिए वहां जाने की तैयारी कर रही है। उसके पिता सागर की कथित भूमिका के अलावा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है। जरूरत के अनुसार संदिग्ध ठिकानों पर कार्रवाई और गिरफ्तारी की जा सकती है।
पुलिस गोपीगंज की नई बस्ती और आसपास के इलाकों में अजीजुल के संपर्क में रहे लोगों की भी जानकारी जुटा रही है। औराई, भदोही और सुरियावां क्षेत्र में रहने वाले उन लोगों की गतिविधियों की जांच की जा सकती है, जिनका इस नेटवर्क से कोई प्रत्यक्ष संबंध सामने आता है। पुलिस का कहना है कि जांच का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े लोगों और गतिविधियों की पहचान करना है।
फिलहाल अजीजुल से पूछताछ, बरामद मोबाइल और सिम कार्डों की तकनीकी जांच तथा बैंक लेनदेन का विश्लेषण जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 923 सिम कार्ड और 889 मोबाइल फोन का इस्तेमाल किन साइबर अपराधों में हुआ, नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और ठगी से जुड़ी रकम का संचालन किस तरीके से किया जाता था। तीन फरार साथियों की गिरफ्तारी और मुर्शिदाबाद में आगे की जांच के बाद इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और उसके पीछे काम करने वाले लोगों के बारे में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।
