बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में साइबर अपराध से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक IT कर्मचारी पर ₹27 लाख की कथित ऑनलाइन ठगी की शिकायत के बाद पीड़िता को अश्लील तस्वीरें और आपत्तिजनक संदेश भेजकर मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगा है। इस घटना ने शहर में डिजिटल सुरक्षा और साइबर उत्पीड़न को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
पुलिस के अनुसार मामला तब शुरू हुआ जब पीड़िता ने एक ऑनलाइन निवेश और लेनदेन से जुड़े फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसे करीब ₹27 लाख का नुकसान हुआ था। शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपी IT कर्मचारी की ओर से कथित तौर पर पीड़िता को लगातार धमकी भरे संदेश भेजे जाने लगे और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया।
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सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर पीड़िता को डराने की कोशिश की। इसके बाद कथित रूप से अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री भेजकर उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया, जिससे मामला केवल आर्थिक धोखाधड़ी से आगे बढ़कर गंभीर साइबर उत्पीड़न में बदल गया।
घटना के बाद पीड़िता ने दोबारा साइबर क्राइम पोर्टल और स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मामला गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में लेते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में चैट रिकॉर्ड्स, डिजिटल संवाद और मोबाइल डेटा को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। आरोपी के सभी संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स और डिजिटल गतिविधियों को ट्रेस किया जा रहा है ताकि पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन स्पष्ट हो सके।
इस मामले पर टिप्पणी करते हुए प्रतिष्ठित साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “साइबर अपराध अब केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। कई मामलों में आरोपी शिकायतकर्ताओं पर दबाव बनाने के लिए धमकी, ब्लैकमेलिंग और आपत्तिजनक सामग्री का सहारा लेते हैं। ऐसे मामलों में त्वरित डिजिटल फॉरेंसिक जांच और सोशल मीडिया ट्रेल का विश्लेषण बेहद जरूरी है, ताकि अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।”
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर शिकायत दर्ज होने के बाद पीड़ित को चुप कराने के लिए मानसिक दबाव की रणनीति अपनाते हैं। इसमें निजी जानकारी का दुरुपयोग, फर्जी अकाउंट्स के जरिए धमकी और अश्लील सामग्री भेजना शामिल होता है, जिससे पीड़ित पर समझौता करने का दबाव बनाया जाता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी के डिजिटल फुटप्रिंट की गहन जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस घटना के पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह शामिल है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि ठगी की शुरुआत किस प्लेटफॉर्म और पेमेंट माध्यम से हुई थी।
साइबर क्राइम यूनिट ने पीड़िता को सुरक्षा का आश्वासन दिया है और मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी जांच तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि डिजिटल सबूतों के आधार पर जल्द ही आरोपी की भूमिका स्पष्ट कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि ऑनलाइन ठगी के बाद अपराधी किस तरह पीड़ितों को डराने और चुप कराने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्षरता, मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा और त्वरित शिकायत निवारण व्यवस्था के बिना ऐसे मामलों पर नियंत्रण पाना कठिन है।
फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क और आरोपी की भूमिका को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आ जाएगी।
