बरेली। तीन दिन में मधुमेह ठीक करने का दावा कर ऑनलाइन फर्जी आयुर्वेदिक दवाएं बेचने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। बारादरी थाना पुलिस ने सैलानी क्षेत्र के एक घर में दबिश देकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 14 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, दो चार्जर, एक प्रिंटर और 75 तरह की संदिग्ध दवाएं बरामद की गई हैं। आरोपियों पर फर्जी वेबसाइट और भ्रामक विज्ञापनों के जरिए लोगों को दवाओं के नाम पर ठगने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार रात सैलानी क्षेत्र स्थित एक घर में कार्रवाई की गई। मौके से भोजीपुरा के जादौपुर निवासी साजिद मलिक, बारादरी के एजाजनगर गौटिया निवासी इस्लाम और पशुपति विहार निवासी जफर को गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान कथित रूप से तैयार कर पैक की गईं कई तरह की दवाएं और ऑनलाइन कारोबार से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले।
फर्जी एफएसएसएआई नंबर और निर्माण तिथि का इस्तेमाल
बरामद उत्पादों में ‘डायबोट डायबिटिक पाउडर’ और ‘ब्रह्म शुगर केयर पाउडर’ के डिब्बे भी शामिल हैं। इन पर फर्जी एफएसएसएआई नंबर और जून 2026 की निर्माण तिथि अंकित होने की बात सामने आई है। पुलिस अब इन उत्पादों की वास्तविक संरचना, निर्माण प्रक्रिया और पैकेजिंग से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर रविवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह ने कितने समय से यह कारोबार संचालित किया और अब तक कितने लोगों तक कथित नकली दवाएं पहुंचाई गईं।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
सोशल मीडिया पर तीन दिन में इलाज का दावा
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी इस्लाम कथित तौर पर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ऐसे विज्ञापन चलाता था, जिनमें मधुमेह को केवल तीन दिन में ठीक करने का दावा किया जाता था। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए दवाओं को प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से तैयार बताया जाता था। विज्ञापनों में यह भी दावा किया जाता था कि उत्पाद शुगर को जड़ से खत्म करने के साथ पूरी तरह सुरक्षित हैं।
आरोपियों ने ‘शॉपिफाई’ के माध्यम से एक ई-कॉमर्स वेबसाइट भी तैयार की थी। इस वेबसाइट पर ग्राहक दवा का ऑर्डर कर सकते थे और उन्हें कैश ऑन डिलीवरी के जरिए पार्सल भेजे जाते थे। ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने के लिए कंपनी का पता अल्मोड़ा, उत्तराखंड का बताया जाता था, जिससे उत्पादों को पहाड़ी क्षेत्र की प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से जुड़ा होने का भ्रम पैदा किया जा सके।
373 शिपमेंट का रिकॉर्ड मिला
पुलिस ने जब जब्त किए गए लैपटॉप की जांच की तो उसमें ‘सेलोशिप’ का डैशबोर्ड मिला। इसमें कुल 373 शिपमेंट दर्ज थे। इनमें 91 डिलीवरी पूरी होने और 90 पार्सल के आरटीओ यानी वापस भेजे जाने का रिकॉर्ड मिला। इससे पुलिस को ऑनलाइन ऑर्डर, पार्सल भेजने और वापस आने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है।
गिरोह कथित तौर पर आरके एंटरप्राइजेज, डायबोटा केयर, आयुर लाइफ और हमदम फॉरएवर इंडिया जैसे अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करता था। ग्राहकों को दिल्लीवरी, शैडोफैक्स, एक्सप्रेसबीज और ब्लू डार्ट जैसी कूरियर सेवाओं के जरिए कैश ऑन डिलीवरी पार्सल भेजे जाते थे। वेबसाइट पर ‘डायबोट डायबिटिक पाउडर’ की कीमत 1,199 रुपये प्रदर्शित की गई थी, जबकि अन्य उत्पादों के पार्सल भी करीब 1,000 से 1,450 रुपये तक की कीमत पर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप, वेबसाइट और शिपमेंट रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि गिरोह ने किन राज्यों और शहरों में दवाओं की आपूर्ति की तथा ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल रिकॉर्ड और लेनदेन की पड़ताल के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
