बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें एक होम्योपैथिक डॉक्टर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह नेपाल स्थित ऑपरेटरों और चीन से जुड़े संदिग्ध हैंडलर्स के साथ मिलकर काम कर रहा था। इस खुलासे ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि साइबर अपराध अब स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुका है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी डिजिटल बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाते थे। ठगी की रकम को फर्जी बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर घुमाया जाता था, जिससे ट्रांजेक्शन का ट्रेल जटिल हो जाता था और जांच एजेंसियों के लिए उसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।
संगठित तरीके से चल रहा था पूरा नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पूरी तरह संगठित ढांचे में काम कर रहा था। इसमें ऑपरेटर, एजेंट और बैंक अकाउंट उपलब्ध कराने वाले लोग शामिल थे। हर सदस्य की एक तय भूमिका थी—कोई फर्जी खाते जुटाता था, कोई ट्रांजेक्शन को अंजाम देता था, तो कोई नकदी निकालने का काम करता था।
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गिरफ्तार होम्योपैथिक डॉक्टर, जो अंबेडकर नगर का निवासी बताया जा रहा है, ने कथित तौर पर अपना बैंक खाता इस फ्रॉड के लिए उपलब्ध कराया। इसी वजह से वह इस नेटवर्क की वित्तीय चेन में एक अहम कड़ी बन गया।
अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क का सरगना अभी फरार है, जो बरेली से ही ऑपरेशन को नियंत्रित कर रहा था। उसकी तलाश के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है और जांच का दायरा अन्य राज्यों तक बढ़ाया गया है।
फर्जी ट्रस्ट और मल्टी-लेयर ट्रांजेक्शन से बचते थे पकड़ से
पूछताछ के दौरान यह खुलासा हुआ कि गिरोह फर्जी ट्रस्ट और शेल बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहा था। रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता था, ताकि बैंकिंग सिस्टम में अलर्ट ट्रिगर न हो।
इसके अलावा, आरोपियों ने ऐसे डिजिटल टूल्स का भी इस्तेमाल किया, जिनकी मदद से बैंकिंग मैसेजेस तक पहुंच बनाकर अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए जाते थे। यह तरीका साइबर अपराध के उस नए ट्रेंड को दर्शाता है, जहां तकनीकी हेरफेर और सोशल इंजीनियरिंग का मिश्रण देखने को मिल रहा है।
524 शिकायतें, 22 खाते—बड़े पैमाने पर ठगी का संकेत
जांच के दौरान यह पता चला कि इस नेटवर्क से जुड़े 22 बैंक खातों के जरिए कुल 524 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इससे साफ है कि यह कोई छोटा-मोटा फ्रॉड नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर फैला हुआ संगठित अपराध है।
जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों से करीब ₹1.5 करोड़ के ट्रांजेक्शन का ट्रेल सामने आया है। अधिकारियों का मानना है कि यह रकम और भी अधिक हो सकती है, क्योंकि अभी कई डिजिटल रिकॉर्ड्स की जांच जारी है और नए पीड़ित सामने आ सकते हैं।
बरामदगी ने खोले नेटवर्क के बड़े राज
छापेमारी के दौरान एक लैपटॉप, सात मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, 11 एटीएम कार्ड, एक एसयूवी और अवैध हथियार बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, बड़ी मात्रा में साइबर फ्रॉड से जुड़ा डिजिटल डेटा भी मिला है, जिसकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
इतनी बड़ी मात्रा में उपकरण और डेटा यह संकेत देते हैं कि यह नेटवर्क पेशेवर तरीके से संचालित हो रहा था और इसके पीछे एक संगठित गिरोह की भूमिका हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन ने बढ़ाई जांच की चुनौती
पूछताछ में सामने आया कि कुछ ऑपरेटर नेपाल में सक्रिय हो सकते हैं, जबकि चीन से जुड़े हैंडलर्स की भूमिका की भी जांच की जा रही है। विदेशी हैंडलर्स अक्सर कोड नेम का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी असली पहचान तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
जांच एजेंसियां अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बढ़ाकर इस नेटवर्क के विदेशी लिंक तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
साइबर अपराध के नए ट्रेंड पर विशेषज्ञ की चेतावनी
इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “आज साइबर अपराध एक संगठित इकोसिस्टम बन चुका है, जहां स्थानीय लोग अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के लिए काम करते हैं। म्यूल अकाउंट, फर्जी संस्थाएं और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल यह दिखाता है कि आर्थिक अपराध अब अधिक जटिल और सुनियोजित हो चुके हैं।”
जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव
अधिकारियों ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के हर लिंक को खंगाल रही हैं।
डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
यह मामला आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या बैंकिंग ट्रांजेक्शन से सावधान रहें और अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें।
तेजी से बदलती तकनीक के साथ साइबर अपराध भी लगातार विकसित हो रहा है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के फ्रॉड से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
