Jeffrey Epstein के पीड़ितों से समझौता कोर्ट की मंजूरी पर निर्भर; बैंक ने आरोपों से किया इनकार, लेकिन निपटारे को चुना रास्ता

एपस्टीन केस में ₹600 करोड़ का समझौता: Bank of America ने बंद करने की ओर बढ़ाया कानूनी अध्याय

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By Roopa
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न्यूयॉर्क: लंबे समय से चल रहे चर्चित एपस्टीन विवाद में बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी बैंकिंग दिग्गज Bank of America ने महिलाओं द्वारा दायर उस सिविल मुकदमे को निपटाने के लिए ₹600 करोड़ देने पर सहमति जताई है, जिसमें बैंक पर आरोप था कि उसने Jeffrey Epstein के कथित दुरुपयोग नेटवर्क को वित्तीय सेवाओं के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से सक्षम बनाया। यह प्रस्तावित समझौता अब एक संघीय न्यायाधीश की मंजूरी के अधीन है।

यह मामला मैनहट्टन की संघीय अदालत में Jed Rakoff की अदालत में चल रहा है। न्यायाधीश आगामी सुनवाई में इस समझौते की निष्पक्षता और पर्याप्तता का आकलन करेंगे। अदालत में दायर दस्तावेजों के अनुसार, यह समझौता कई हफ्तों की बातचीत के बाद सामने आया, जब दोनों पक्षों ने पहले ही “समझौते के सिद्धांत” पर सहमति बनने की जानकारी दी थी।

यह क्लास एक्शन मुकदमा ‘जेन डो’ नाम से पहचानी जाने वाली एक महिला द्वारा दायर किया गया था। आरोप लगाया गया कि Bank of America ने एपस्टीन से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को नजरअंदाज किया, जबकि उसके आपराधिक कृत्यों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी। वादियों का कहना था कि बैंक ने उचित सतर्कता बरतने के बजाय मुनाफे को प्राथमिकता दी, जिससे एपस्टीन का कथित शोषण तंत्र लंबे समय तक चलता रहा।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बैंक ने अपने पहले के रुख को दोहराया है कि उसने किसी भी प्रकार की सेक्स ट्रैफिकिंग गतिविधि को बढ़ावा नहीं दिया। बैंक के प्रवक्ता ने कहा कि संस्था अपने कानूनी बयानों पर कायम है, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई से बचने और मामले को समाप्त करने के लिए समझौता करना बेहतर विकल्प माना गया। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई-प्रोफाइल मामलों में प्रतिष्ठा और जोखिम को देखते हुए वित्तीय संस्थान अक्सर ऐसे रास्ते अपनाते हैं।

पीड़ितों की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों—David Boies और Bradley Edwards—ने कहा कि यह समझौता उनके मुवक्किलों के हित में है। उनका कहना था कि कई पीड़ित वर्षों पहले हुए नुकसान से जूझ रहे हैं और उन्हें लंबी अदालती प्रक्रिया के बजाय तत्काल आर्थिक राहत की जरूरत है। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, वकीलों की टीम इस राशि का करीब 30% यानी लगभग ₹180 करोड़ फीस के रूप में मांग सकती है।

मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि बैंक ने एपस्टीन और उसके सहयोगियों से जुड़े लेनदेन में कई “रेड फ्लैग” संकेतों को नजरअंदाज किया। इनमें अरबपति निवेशक Leon Black द्वारा किए गए भुगतान भी शामिल बताए गए हैं, जिन्होंने एपस्टीन को वित्तीय सलाह के लिए भारी रकम दी थी। हालांकि, ब्लैक ने किसी भी तरह की गलत भूमिका से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें एपस्टीन के अपराधों की जानकारी नहीं थी।

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इसी साल की शुरुआत में न्यायाधीश Jed Rakoff ने बैंक की उस दलील को खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि आरोप पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने माना कि वादी ने यह पर्याप्त रूप से दर्शाया है कि बैंक को एपस्टीन की गतिविधियों से लाभ हो सकता था, जिससे मामला आगे बढ़ने योग्य बनता है।

एपस्टीन विवाद पहले भी कई बड़े बैंकों को कानूनी समझौतों तक ले जा चुका है। वर्ष 2023 में पीड़ितों ने JPMorgan Chase के साथ करीब ₹2,400 करोड़ और Deutsche Bank के साथ लगभग ₹620 करोड़ के समझौते किए थे। इन मामलों में भी बैंकों पर आरोप था कि उन्होंने संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों को समय रहते नहीं रोका।

हालांकि, इस नए समझौते के बावजूद एपस्टीन नेटवर्क से जुड़े कई कानूनी मामले अभी भी विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। पीड़ितों के वकील अन्य संस्थानों, जैसे Bank of New York Mellon के खिलाफ मामलों में भी अपील कर रहे हैं, जिन्हें पहले खारिज कर दिया गया था।

Jeffrey Epstein को 2019 में सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन ट्रायल से पहले ही मैनहट्टन की जेल में उसकी मौत हो गई। मेडिकल जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस घटना को लेकर अब भी कई सवाल उठते रहे हैं।

यह समझौता वित्तीय संस्थानों पर बढ़ते जवाबदेही दबाव को दर्शाता है, खासकर उन मामलों में जहां उन पर आपराधिक नेटवर्क को अप्रत्यक्ष रूप से सक्षम बनाने के आरोप लगते हैं। साथ ही, यह भी साफ करता है कि पीड़ितों के लिए सिविल मुकदमे अब न्याय और मुआवजे का एक प्रभावी माध्यम बनते जा रहे हैं।

अगर अदालत इस समझौते को मंजूरी दे देती है, तो यह एपस्टीन विवाद के कानूनी परिणामों में एक और अहम पड़ाव साबित होगा और बैंकों के लिए यह संदेश भी देगा कि ग्राहक गतिविधियों की निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही अब भारी पड़ सकती है।

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