आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का खुलासा करते हुए पुलिस ने 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पीएम किसान योजना ऐप के माध्यम से लोगों को फंसा कर करोड़ों रुपये की ठगी करता था। आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
8 दिसंबर को हुई प्रारंभिक कार्रवाई में 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 23 मोबाइल फोन, 14 एटीएम कार्ड, 15 सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद हुए थे। इसके अलावा, इस गिरोह द्वारा इस्तेमाल की गई दो कारें भी पुलिस ने जब्त कीं। अगले दिन दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जिले के डीएम की संस्तुति पर इन सभी पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई है।
पुलिस की जांच में पता चला कि इस गिरोह के हैंडलर चीन और दुबई में बैठे थे। इन विदेशी कनेक्शनों के आधार पर ही कार्रवाई की गई। जिले में अपराधियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। साइबर सेल टीम को इस खुलासे के लिए ₹25,000 का पुरस्कार भी दिया गया।
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इंस्टाग्राम आईडी के नाम पर झांसा दिया जाता था
इस पूरे नेटवर्क में सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने इंस्टाग्राम आईडी नंबर 9334 के जरिए लोगों को खातों, एटीएम और सिम कार्ड उपलब्ध कराने के नाम पर मोटा कमीशन देने का लालच दिया। इसके जरिए खाताधारकों से एटीएम कार्ड, रजिस्टर्ड सिम और बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल की जाती थी।
गिरोह के सदस्य विशेष रूप से तैयार की गई APK फाइलें व्हाट्सएप के माध्यम से भेजते थे, जिन्हें पीएम किसान योजना से जुड़ा बताकर लोगों को डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था। जैसे ही पीड़ित इसे इंस्टॉल करते, उनका मोबाइल हैक हो जाता और बैंक खातों से पैसे निकाल लिए जाते। निकाली गई रकम को विभिन्न करंट अकाउंट्स में ट्रांसफर कर दिया जाता था और फिर एटीएम के जरिए अलग-अलग राज्यों से निकासी की जाती थी।
प्रारंभिक जांच में 121 बैंक खातों से जुड़ी जानकारी सामने आई है। इनमें 31 खातों पर नैनीताल, रुद्रपुर और आंध्र प्रदेश में कुल 186 मुकदमे दर्ज पाए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे दूसरों के खातों का इस्तेमाल कर लेन-देन करते थे, ताकि अपनी पहचान छिपा सकें।
गिरफ्तार आरोपियों की सूची
इस मामले में गिरफ्तार किए गए 17 आरोपियों में सुल्तान अंसारी, परवेज अंसारी, मोहम्मद कलीम, इमरान अली, अंकित कुमार, सरफराज, आदेश सिंह, अमन प्रताप निषाद, अमित सिंह, अतुल सिंह, विनायक मालवीय, अर्जुन सिंह, अतुल आनंद, पंकज पांडे, अभिनव उर्फ मोनू चौरसिया, चंद्रभूषण सिंह और बृजेश कुमार शामिल हैं।
आगे की कार्रवाई
पुलिस और साइबर टीम अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की पहचान में जुटी है। बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंकिंग डेटा की विस्तृत जांच की जा रही है, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “ऐसे मामलों में साइबर अपराधी सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी ऐप के जरिए लोगों का भरोसा जीतते हैं। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भेजी जाने वाली APK फाइलें सबसे बड़ा खतरा बन चुकी हैं, जिनसे मोबाइल और बैंकिंग डेटा पर सीधा नियंत्रण हासिल किया जाता है।”
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी अनजान लिंक या ऐप को डाउनलोड करने से बचें और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें
