आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की साइबर सेल ने खुद को एलएंडटी (L&T) का कर्मचारी बताकर देश के विभिन्न राज्यों के कारोबारियों से कथित साइबर ठगी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर लगभग ₹15.50 लाख की साइबर धोखाधड़ी करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों से 13 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी अकेले काम करता था या उसके पीछे कोई संगठित साइबर ठगी नेटवर्क सक्रिय था।
साइबर सेल के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान आजमगढ़ के तरवा थाना क्षेत्र के सराय वृंदावन गांव निवासी पंकज सिंह के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह पिछले पांच से छह वर्षों से साइबर ठगी की गतिविधियों में शामिल था। पुलिस के अनुसार उसने लोगों का विश्वास जीतने के लिए एक प्रतिष्ठित निजी कंपनी का नाम और पहचान का दुरुपयोग किया तथा उसी के आधार पर विभिन्न व्यापारियों से संपर्क स्थापित करता था।
जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर ऑनलाइन बिजनेस डायरेक्टरी Justdial से निर्माण कार्य में उपयोग होने वाले उपकरणों और मशीनरी के कारोबारियों के मोबाइल नंबर एवं अन्य संपर्क विवरण जुटाता था। इसके बाद वह स्वयं को एलएंडटी, नवी मुंबई का अधिकारी या कर्मचारी बताकर व्यापारियों से संपर्क करता और उन्हें बड़े व्यावसायिक ऑर्डर, कॉन्ट्रैक्ट अथवा भुगतान प्रक्रिया से संबंधित प्रस्तावों का झांसा देता था। भरोसा बनने के बाद वह विभिन्न बहानों से अग्रिम राशि, प्रोसेसिंग शुल्क अथवा अन्य भुगतान अपने खातों में ट्रांसफर करा लेता था।
पुलिस के अनुसार आरोपी फर्जी कॉल, व्हाट्सएप संदेश और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर खुद को अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करता था। वह कथित कॉन्ट्रैक्ट, भुगतान स्वीकृति और मनी क्रेडिट से जुड़े भ्रामक संदेश भेजकर पीड़ितों को विश्वास में लेता था। कई मामलों में पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि भुगतान प्रक्रिया पूरी करने या बड़े ऑर्डर जारी करने के लिए तत्काल धनराशि जमा करानी आवश्यक है। इसी तरीके से कथित रूप से कई लोगों से धोखाधड़ी की गई।
साइबर सेल की जांच में अब तक आरोपी के खिलाफ विभिन्न राज्यों से 13 से अधिक साइबर शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस डिजिटल लेनदेन, मोबाइल फोन, बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुल कितने लोगों को निशाना बनाया गया और इस कथित साइबर धोखाधड़ी से वास्तविक वित्तीय नुकसान कितना हुआ। जांच एजेंसियां धन के प्रवाह और संभावित सहयोगियों की भी पड़ताल कर रही हैं।
पुलिस ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर आगे और कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अब प्रतिष्ठित कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट ब्रांडों की पहचान का दुरुपयोग कर व्यापारियों और आम नागरिकों का विश्वास जीतने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यावसायिक प्रस्ताव, भुगतान अनुरोध या कॉन्ट्रैक्ट को स्वीकार करने से पहले संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से उसकी स्वतंत्र पुष्टि अवश्य करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि केवल सत्यापित ईमेल डोमेन, अधिकृत संपर्क नंबर और आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही व्यावसायिक लेनदेन किया जाए तथा किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या अग्रिम भुगतान की मांग की स्थिति में तत्काल सतर्कता बरती जाए। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
