आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में पुलिस ने निवेश पर 50 से 90 प्रतिशत तक मुनाफा दिलाने का झांसा देकर ₹3.14 करोड़ की कथित ठगी करने वाले संगठित गिरोह के दो वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी स्वयं को कस्टम विभाग का अधिकारी बताकर फर्जी पहचान पत्र और कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतते थे और बाद में उनसे करोड़ों रुपये का निवेश कराकर रकम हड़प लेते थे।
पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत अनंतपुरा कटरा निवासी शेखर श्रीवास्तव की शिकायत से हुई। शिकायत के आधार पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि मातनबरगंज स्थित नगर पालिका मार्केट के एक फ्लैट में रहने वाले विकास राय शर्मा, विशाल राय, अनिल कुमार शर्मा, अद्भुत राय शर्मा, अंशु सिंह और ममता शर्मा ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया था, जो निवेश के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाता था।
जांच के दौरान पुलिस ने शनिवार को कंधरापुर बाजार क्षेत्र से विकास राय (30) और विशाल राय (34) को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी कंधरापुर थाना क्षेत्र के जोल्हापुर गांव के मूल निवासी हैं और वर्तमान में गौतमबुद्ध नगर में रह रहे थे। पुलिस लंबे समय से दोनों की तलाश कर रही थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि विकास राय शर्मा कथित तौर पर स्वयं को कस्टम विभाग का कर्मचारी बताता था। वह पीड़ितों को फर्जी कस्टम पहचान पत्र और अन्य कूटरचित दस्तावेज दिखाकर विश्वास में लेता था। आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसका एक रिश्तेदार दिल्ली में कस्टम कमिश्नर है और उसके माध्यम से तांबा, सोना, कपड़ा तथा मोबाइल के कारोबार में निवेश करने पर 50 से 90 प्रतिशत तक का मुनाफा मिलेगा।
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आरोप है कि शुरुआत में आरोपियों ने निवेशकों को कुछ लाभांश लौटाकर उनका भरोसा मजबूत किया। इसके बाद पीड़ित, उनके भाई और पिता को अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। विभिन्न चरणों में उनसे कुल ₹3.14 करोड़ का निवेश कराया गया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कुल ₹51 लाख वापस किए, लेकिन शेष ₹2.63 करोड़ कथित रूप से हड़प लिए।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब पीड़ितों ने अपनी शेष राशि वापस मांगी तो आरोपियों ने उनके साथ अभद्रता की, गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस की शरण ली, जिसके आधार पर मामले की जांच शुरू की गई।
एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक शोधकर्ता के अनुसार, निवेश से जुड़ी धोखाधड़ी में अपराधी अक्सर सरकारी अधिकारी, वित्तीय विशेषज्ञ या प्रभावशाली कारोबारी होने का झूठा दावा कर लोगों का विश्वास जीतते हैं। शुरुआत में मामूली लाभ देकर निवेशकों को अधिक धन लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। किसी भी निवेश योजना में असामान्य रूप से अधिक और सुनिश्चित रिटर्न का दावा गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है। निवेश से पहले संबंधित संस्था, व्यक्ति और दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन करना आवश्यक है।
पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश कर दिया है। मामले में नामजद अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके और ठगी की रकम की बरामदगी सुनिश्चित की जा सके।
