नई दिल्ली। अमेरिका की एक जूरी ने एपल को हाप्टिक फीडबैक तकनीक से जुड़े पेटेंट मामले में 5.7 अरब डॉलर से अधिक का हर्जाना देने का आदेश दिया है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब ₹50 हजार करोड़ से अधिक बैठती है। सैन डिएगो स्थित टैक्शन ने आरोप लगाया था कि एपल ने उसके पेटेंट वाली तकनीक का इस्तेमाल आईफोन और एपल वॉच में हाप्टिक फीडबैक देने के लिए किया। एपल ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा।
जूरी ने शुक्रवार को माना कि एपल का Taptic Engine टैक्शन के दो पेटेंट का उल्लंघन करता है। Taptic Engine वह तकनीक है, जो आईफोन और एपल वॉच जैसे उपकरणों में टैप, टच या अन्य इंटरैक्शन के दौरान उपयोगकर्ता को कंपन के रूप में प्रतिक्रिया देती है। हाप्टिक फीडबैक का उद्देश्य स्क्रीन पर दिखाई देने वाली गतिविधि के साथ स्पर्श आधारित प्रतिक्रिया उपलब्ध कराना है।
फैसले के बाद एपल ने कहा कि उसके उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक टैक्शन की तकनीक से मौलिक रूप से अलग है। कंपनी ने यह भी कहा कि मुकदमे के दौरान टैक्शन की अपनी परीक्षण प्रक्रिया में एपल के उत्पादों से जुड़े निष्कर्ष सामने आए थे। एपल के मुताबिक, वह टैक्शन की तकनीक का इस्तेमाल नहीं करता और वह अदालत के फैसले को चुनौती देगा।
एपल ने मामले में टैक्शन के पेटेंट की वैधता पर भी सवाल उठाए थे। कंपनी ने पहले आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि संबंधित पेटेंट वैध नहीं हैं। हालांकि, शुक्रवार को जूरी ने टैक्शन के पक्ष में फैसला सुनाया और पेटेंट उल्लंघन के लिए एपल को 5.7 अरब डॉलर से अधिक का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
टैक्शन के वकील लांस यांग ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि जूरी ने कंपनी के पक्ष में फैसला देकर उसके पेटेंट अधिकारों को मान्यता दी है। टैक्शन अपनी तकनीक का इस्तेमाल हेडफोन और गेमिंग हेडसेट जैसे उत्पादों में करता है।
यह विवाद 2021 में शुरू हुआ था, जब टैक्शन ने एपल के खिलाफ मुकदमा दायर किया। कंपनी का आरोप था कि एपल ने उसके पेटेंट में संरक्षित तकनीक का इस्तेमाल अपने उपकरणों के हाप्टिक फीडबैक सिस्टम में किया। एपल ने इन आरोपों का विरोध किया और पेटेंट उल्लंघन के साथ-साथ पेटेंट की वैधता पर भी आपत्ति जताई।
मामले में इससे पहले एपल को राहत मिली थी। सैन डिएगो की एक संघीय अदालत के न्यायाधीश ने 2023 में फैसला सुनाया था कि एपल ने टैक्शन के पेटेंट का उल्लंघन नहीं किया है। इसके बाद मामला अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट तक पहुंचा। अपीलीय अदालत ने पिछले वर्ष मामले को फिर से आगे बढ़ने की अनुमति दी, जिसके बाद विवाद दोबारा सुनवाई के स्तर पर पहुंचा।
अब जूरी के फैसले के बाद एपल के सामने आगे की कानूनी प्रक्रिया का विकल्प है। कंपनी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह फैसले के खिलाफ अपील करेगी। ऐसे में अंतिम देनदारी और 5.7 अरब डॉलर से अधिक के हर्जाने पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का असर पड़ सकता है।
यह फैसला पेटेंट अधिकारों और स्मार्टफोन तथा पहनने योग्य उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली हाप्टिक तकनीक को लेकर चल रहे कानूनी विवादों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जूरी का यह फैसला अमेरिका में इस तरह के पेटेंट मामलों में अब तक के सबसे बड़े हर्जाना आदेशों में शामिल है। हालांकि, एपल की प्रस्तावित अपील के बाद मामले में अंतिम कानूनी स्थिति अभी तय नहीं हुई है।
