नई दिल्ली। करीब ₹11,000 करोड़ के कथित धनशोधन मामले में रिलायंस कैपिटल के पूर्व उपाध्यक्ष अमिताभ झुनझुनवाला को दिल्ली की एक विशेष अदालत से जमानत नहीं मिली। अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य संबंधी आधार पर राहत मांगी गई थी। अदालत ने कहा कि आरोपी अपनी चिकित्सा स्थिति के आधार पर यह साबित करने में विफल रहे कि जेल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के भीतर उनका इलाज संभव नहीं है।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश विशाल पाहुजा ने जमानत पर फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी के अपराध में कथित महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए उसके बाहर आने से जांच प्रभावित होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने झुनझुनवाला को कथित अपराध का “मुख्य सूत्रधार” बताते हुए कहा कि मामले में गवाहों को प्रभावित किए जाने की संभावना भी मौजूद है।
झुनझुनवाला को प्रवर्तन निदेशालय ने 15 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। उनके साथ रिलायंस कैपिटल के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी अमित बापना को भी गिरफ्तार किया गया था। यह कार्रवाई अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और धनशोधन की जांच के तहत की गई थी।
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जांच एजेंसी का आरोप है कि झुनझुनवाला, बापना और अन्य लोगों ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से धन को कथित तौर पर ऐसी कंपनियों में भेजा, जो रिलायंस अनिल अंबानी समूह से जुड़ी या उसके नियंत्रण में थीं। आरोप है कि इन रकमों को कॉरपोरेट ऋण के रूप में दिखाया गया, जबकि वास्तविक उपयोग और लाभार्थियों को लेकर गंभीर सवाल हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत कॉरपोरेट ऋण ऐसी कंपनियों को वितरित किए गए, जिन्हें कथित तौर पर बिना उचित वित्तीय जांच और निर्धारित ऋण मानकों का पालन किए धन दिया गया। झुनझुनवाला उस समय रिलायंस कैपिटल के निदेशक थे, जो रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस की होल्डिंग कंपनी थी। एजेंसी का कहना है कि कंपनी के कई महत्वपूर्ण संचालन संबंधी फैसलों में उनकी प्रमुख भूमिका थी।
स्वास्थ्य को बनाया जमानत का आधार
झुनझुनवाला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राघव गुप्ता ने अदालत में मुख्य रूप से चिकित्सा आधार पर जमानत की मांग की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि झुनझुनवाला को हृदय संबंधी समस्याओं, हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी गंभीर परेशानियों, उच्च रक्तचाप तथा रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के कारण कमर दर्द जैसी समस्याएं हैं।
बचाव पक्ष ने दावा किया कि जेल में रहने के दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही है और उनका वजन तेजी से कम हुआ है। इसके आधार पर दलील दी गई कि उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा उपचार की आवश्यकता है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनकी स्थिति धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 45 में निर्धारित जमानत की दोहरी शर्तों के अपवाद के दायरे में आती है।
जांच एजेंसी ने कहा- इलाज की पर्याप्त व्यवस्था
जांच एजेंसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने इन दलीलों का विरोध किया। उनका कहना था कि झुनझुनवाला को जेल अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधा दी जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें लोकनायक अस्पताल तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भी चिकित्सा परामर्श के लिए ले जाया गया है।
एजेंसी ने कहा कि उपलब्ध चिकित्सा अभिलेखों में ऐसी कोई बीमारी दर्ज नहीं है, जिसे जीवन के लिए गंभीर खतरा माना जाए या जिसके कारण न्यायिक हिरासत में रहना चिकित्सकीय रूप से असंभव हो। एजेंसी के अनुसार, आरोपी को नियमित रूप से आवश्यक चिकित्सा देखभाल मिल रही है।
अदालत ने भी इस दलील से सहमति जताई। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी को आवश्यकता के अनुसार जेल अस्पताल और संबंधित रेफरल अस्पतालों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। अदालत के मुताबिक, झुनझुनवाला यह साबित नहीं कर सके कि उनकी चिकित्सा स्थिति जेल में उपलब्ध चिकित्सा ढांचे के भीतर नियंत्रित नहीं की जा सकती।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी अहम
अदालत ने जमानत खारिज करने के पीछे केवल चिकित्सा आधार को ही नहीं देखा। आदेश में कहा गया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और आरोपी की कथित भूमिका को देखते हुए उसके बाहर आने से मामले से जुड़े कर्मचारियों और अन्य गवाहों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी की आशंकाओं को इस चरण पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आरोपी को कथित अपराध का मुख्य सूत्रधार बताए जाने और जांच जारी रहने के कारण अदालत ने हिरासत में रहने की आवश्यकता को स्वीकार किया। इस तरह स्वास्थ्य संबंधी दलीलों के बावजूद झुनझुनवाला को ₹11,000 करोड़ के कथित धनशोधन मामले में फिलहाल जेल से बाहर आने की अनुमति नहीं मिली।
