अंबेडकरनगर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में फर्जी मान्यता प्रमाण पत्र और दस्तावेजों के जरिए नर्सिंग कॉलेज से ₹31.28 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इब्राहिमपुर क्षेत्र स्थित लॉर्डबुद्धा नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज, मीरानपुर इल्तिफतगंज के प्रबंधक नवीन प्रकाश वर्मा की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि गोरखपुर निवासी विनोद यादव ने खुद को स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी लखनऊ का रजिस्ट्रार बताकर कॉलेज प्रबंधन को मान्यता दिलाने का भरोसा दिया और फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर लाखों रुपये ऐंठ लिए।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2018 में विनोद यादव कॉलेज प्रबंधन के संपर्क में आया था। उसने खुद को एक सरकारी संस्था से जुड़ा अधिकारी बताते हुए कॉलेज में एएनएम, जीएनएम और डी-फार्मा जैसे पाठ्यक्रमों की मान्यता दिलाने का दावा किया। आरोप है कि विनोद अपनी टीम के साथ कॉलेज पहुंचा और निरीक्षण की औपचारिकता पूरी करने के बाद मान्यता दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद उसने कॉलेज प्रबंधन से करीब डेढ़ लाख रुपये लिए और कथित रूप से मान्यता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया।
कॉलेज प्रबंधन का आरोप है कि बाद में जांच करने पर पता चला कि विनोद यादव द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र और उससे संबंधित वेबसाइट दोनों फर्जी थे। इसके बावजूद आरोपी के भरोसे पर कॉलेज में वर्ष 2018 से 2022 तक छात्रों के प्रवेश लिए जाते रहे और पाठ्यक्रम संचालित किए गए। आरोप है कि परीक्षा, प्रमाण पत्र और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर भी कॉलेज से अतिरिक्त धनराशि ली गई।
जांच में सामने आया कि 20 सितंबर 2018 से 9 फरवरी 2022 के बीच कॉलेज के पंजाब नेशनल बैंक खाते से विनोद यादव के एक्सिस बैंक खाते में अलग-अलग समय पर कुल ₹29.78 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इसमें शुरुआती भुगतान समेत कुल कथित धोखाधड़ी की राशि ₹31.28 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस अब बैंक लेनदेन, दस्तावेजों और आरोपी के संपर्कों की जांच कर रही है।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
शिकायतकर्ता नवीन प्रकाश वर्मा के अनुसार, जब कॉलेज प्रबंधन को फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो उन्होंने विनोद यादव से संपर्क कर रकम वापस करने की मांग की। आरोप है कि आरोपी ने पैसे लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन करीब तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने पुलिस से शिकायत की।
कॉलेज प्रबंधन ने पहले इब्राहिमपुर थाने में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया और 24 सितंबर 2025 को पुलिस अधीक्षक से भी कार्रवाई की मांग की। आरोप है कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद अब इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
इस पूरे मामले का असर कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों पर भी पड़ा है। वर्ष 2018-19 से 2022 तक कॉलेज में अध्ययन करने वाले सैकड़ों छात्रों को जारी किए गए अंकपत्रों की जांच में कथित विसंगतियां सामने आई हैं। आरोप है कि ये अंकपत्र स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी लखनऊ के बजाय पैसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर और जयपुर कॉलेज ऑफ फार्मेसी से जारी किए गए थे। इससे छात्रों की मान्यता और भविष्य को लेकर संकट पैदा हो गया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने में कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या आरोपी ने अन्य संस्थानों को भी इसी तरह निशाना बनाया। साथ ही छात्रों से जुड़े दस्तावेजों, वेबसाइट रिकॉर्ड, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों या किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने छात्रों और शिक्षण संस्थानों को सलाह दी है कि किसी भी मान्यता, प्रमाण पत्र या शैक्षणिक अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की आधिकारिक स्तर पर पुष्टि जरूर करें। फर्जी संस्थाओं और बिचौलियों के दावों पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग से सत्यापन करना आवश्यक है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
