Amazon ने संगठित ई-कॉमर्स फ्रॉड और नकली उत्पादों से निपटने के लिए उद्योग स्तर पर साझा डेटा तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई है।

संगठित ई-कॉमर्स फ्रॉड पर अमेज़न की बड़ी पहल, फर्जी विक्रेताओं और साइबर ठगों पर कार्रवाई के लिए साझा डेटा तंत्र की मांग

Team The420
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नई दिल्ली: संगठित साइबर धोखाधड़ी और नकली उत्पादों के बढ़ते नेटवर्क के बीच ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न ने उद्योग स्तर पर साझा डेटा तंत्र (डेटा-शेयरिंग मैकेनिज्म) विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। कंपनी का कहना है कि संगठित धोखाधड़ी करने वाले गिरोह अब केवल एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस तक सीमित नहीं रहते, बल्कि कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं और ब्रांड्स को निशाना बनाते हैं। ऐसे में केवल किसी एक प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और पूरे उद्योग को मिलकर इन नेटवर्क के खिलाफ समन्वित रणनीति अपनानी होगी।

अमेज़न के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसके माध्यम से संगठित धोखाधड़ी करने वाले तत्वों की जानकारी सुरक्षित तरीके से साझा की जा सके। उनका कहना है कि यदि किसी प्लेटफॉर्म से किसी फर्जी विक्रेता या साइबर अपराधी को हटा भी दिया जाता है, तो वह अक्सर दूसरे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो जाता है। इसलिए केवल अलग-अलग कार्रवाई करने के बजाय पूरे उद्योग के स्तर पर समन्वित प्रयास अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।

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उन्होंने बताया कि अमेज़न ने पहले भी सरकारी एजेंसियों और उद्योग मंचों के साथ डेटा साझा करने से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की थी, लेकिन व्यापक स्तर पर भागीदारी सीमित रही। उनका मानना है कि भविष्य में ऐसा ढांचा विकसित किया जा सकता है, जिसमें कंपनियां व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी साझा किए बिना केवल संदिग्ध गतिविधियों और बार-बार अपराध करने वाले नेटवर्क से जुड़ी सूचनाओं का आदान-प्रदान कर सकें।

इसी दिशा में अमेज़न ने हाल ही में अपनी Counterfeit Crimes Unit (CCU) का विस्तार भारत तक कर दिया है। यह विशेष जांच इकाई ब्रांड्स, विक्रेताओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर उन संगठित गिरोहों की पहचान करती है, जो नकली उत्पादों की बिक्री और ई-कॉमर्स धोखाधड़ी में शामिल होते हैं। कंपनी के अनुसार, यह इकाई केवल संदिग्ध लिस्टिंग हटाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आवश्यक साक्ष्य जुटाकर संगठित अपराधियों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई भी शुरू कराती है।

कंपनी का कहना है कि किसी फर्जी विक्रेता को केवल एक प्लेटफॉर्म से हटाना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि वह तुरंत किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो सकता है। इसलिए जांच का उद्देश्य पूरे नेटवर्क का पता लगाना, उसके संचालन के तरीके को समझना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

कंपनी के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, उसकी Counterfeit Crimes Unit अब तक दुनिया भर में 32,000 से अधिक संदिग्ध फर्जी विक्रेताओं और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग कर चुकी है। इसके अलावा 1.5 करोड़ से अधिक नकली उत्पादों को बाजार में पहुंचने से पहले हटाया गया है तथा विभिन्न मामलों में लगभग 300 लोगों को जेल की सजा दिलाने में भी सहायता मिली है।

भारत में यह विशेष इकाई लगभग दो महीने पहले शुरू की गई थी और कंपनी के अनुसार उसने पहले ही कई मामलों में शिकायत दर्ज कराने तथा जांच एजेंसियों को सूचनाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अमेज़न का कहना है कि कई प्रमुख ब्रांड लंबे समय से भारत में ऐसी विशेष जांच इकाई की मांग कर रहे थे और शुरुआती परिणाम कंपनी की अपेक्षाओं से बेहतर रहे हैं।

अमेज़न ने यह भी कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी का बड़ा हिस्सा अब सीधे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बजाय फिशिंग लिंक, फर्जी वेबसाइट, नकली मोबाइल एप्लिकेशन और कंपनी का प्रतिरूप धारण करने वाले संदेशों के माध्यम से किया जा रहा है। ऐसे मामलों में साइबर अपराधी उपभोक्ताओं को नकली वेबसाइटों पर ले जाकर उनकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चुराने का प्रयास करते हैं। कंपनी के अनुसार, इन खतरों से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणालियों का उपयोग कर संदिग्ध वेबसाइटों की पहचान की जा रही है। साथ ही ग्राहकों को यह सत्यापित करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है कि उन्हें प्राप्त ईमेल, संदेश या कॉल वास्तव में कंपनी की ओर से हैं या नहीं।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि संगठित ई-कॉमर्स फ्रॉड अब केवल नकली उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें फिशिंग वेबसाइट, फर्जी मोबाइल ऐप, पहचान की चोरी और बहु-प्लेटफॉर्म धोखाधड़ी जैसे तरीके तेजी से अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी एक प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई होने के बाद तुरंत दूसरे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो जाते हैं, इसलिए उद्योग स्तर पर सुरक्षित सूचना साझा करना, रियल-टाइम इंटेलिजेंस एक्सचेंज और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वित कार्रवाई ऐसे नेटवर्क को तोड़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने उपभोक्ताओं से केवल आधिकारिक वेबसाइटों और सत्यापित मोबाइल ऐप का उपयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध लिंक, संदेश या ऑफर से सावधान रहने की अपील की।

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