एक्स यूजर ने बताया- आवाज बिल्कुल पत्नी जैसी थी, लेकिन बोलने का अंदाज थोड़ा असामान्य; साइबर अपराध विशेषज्ञ प्रो. त्रिवेणी सिंह ने भी आवाज की पहचान के बजाय स्वतंत्र सत्यापन को बताया अहम सुरक्षा उपाय

एआई वॉयस स्कैम ने बढ़ाई चिंता, पत्नी की हूबहू आवाज में आया कॉल; गैस भराने के लिए मांग रहा था क्रेडिट कार्ड

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By Roopa
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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए आवाज की नकल कर किए जाने वाले साइबर धोखाधड़ी के मामलों ने नया खतरा पैदा कर दिया है। हाल ही में एक एक्स यूजर ने ऐसे ही एक संदिग्ध एआई वॉयस स्कैम का अनुभव साझा किया, जिसमें कॉल करने वाले की आवाज उसकी पत्नी से लगभग हूबहू मिल रही थी। कॉल करने वाले ने खुद को उसकी पत्नी बताया और कहा कि वह अपना बटुआ घर पर भूल गई है। इसके बाद गैस भराने के लिए क्रेडिट कार्ड देने को कहा गया। हालांकि, कॉल के दौरान ही उसे शक हो गया, क्योंकि उसकी पत्नी उस समय उसके साथ घर पर मौजूद थी।

यूजर ने बताया कि कॉल करने वाले की आवाज सुनने में करीब 100 प्रतिशत उसकी पत्नी जैसी थी, लेकिन बोलने की लय और आवाज के उतार-चढ़ाव में कुछ असामान्य महसूस हुआ। इसी वजह से उसे संदेह हुआ कि कॉल में वॉयस डीपफेक या वॉयस फिल्टर का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

मामला तब और संदिग्ध लगा, जब कॉल करने वाले ने गैस के भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड मांगा। यूजर के मुताबिक, उसकी पत्नी टेस्ला चलाती है, इसलिए फोन पर बताई गई स्थिति और भुगतान की मांग उसे असामान्य लगी। उसने तुरंत कॉल काटने के बजाय बातचीत जारी रखी, ताकि यह समझ सके कि सामने वाला किस तरह की ठगी करने की कोशिश कर रहा है।

यूजर ने बताया कि बातचीत के दौरान जवाब बहुत तेजी से मिल रहे थे। उसके अनुसार, इससे उसे लगा कि संभव है कि कॉल में वॉयस फिल्टर का इस्तेमाल किया जा रहा हो। हालांकि, वह इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका। उसने यह भी कहा कि उसे अफसोस है कि उसने बातचीत रिकॉर्ड नहीं की।

इस अनुभव के बाद उसने लोगों से अपने परिवार और करीबी लोगों को ऐसे संभावित घोटालों के बारे में सचेत करने की अपील की। उसका सुझाव था कि परिवार के सदस्यों और बच्चों के बीच पहले से ऐसे मौखिक पासवर्ड तय किए जा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध कॉल की स्थिति में पहचान की पुष्टि के लिए किया जा सके।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए करीबी दोस्तों और परिवार के लिए ‘वर्बल पासवर्ड’ तय करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे बेहद विश्वसनीय डीपफेक कॉल के झांसे में आने से बचने में मदद मिल सकती है। उन्होंने चिंता जताई कि एआई तकनीक इतनी उन्नत हो गई है कि वास्तविक और नकली आवाज में अंतर करना आसान नहीं रह गया है।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, आवाज की समानता को पहचान की पुष्टि का पर्याप्त आधार नहीं माना जाना चाहिए। एआई आधारित आवाज की नकल के दौर में साइबर ठग भावनात्मक दबाव और तत्काल भुगतान की मांग को जोड़कर पीड़ित को निर्णय लेने का समय नहीं देते। ऐसे मामलों में किसी परिचित की आवाज सुनकर भी अलग माध्यम से संपर्क कर उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है।

एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर ठगी के तौर-तरीकों को बदल दिया है। अब उपलब्ध तकनीकों के जरिए किसी व्यक्ति जैसी आवाज तैयार कर परिवार के सदस्य, दोस्त, अधिकारी या परिचित होने का भ्रम पैदा किया जा सकता है। इसके बाद ठग पैसे भेजने, बैंक या कार्ड की जानकारी साझा करने अथवा तत्काल भुगतान करने के लिए दबाव बना सकते हैं।

ऐसे मामलों में सबसे बड़ा खतरा यह है कि पीड़ित केवल आवाज पहचानकर भरोसा कर सकता है। आवाज बिल्कुल परिचित लगने के बावजूद यह जरूरी नहीं कि कॉल वास्तव में उसी व्यक्ति की हो। खासकर तब सावधानी जरूरी है, जब कॉल करने वाला अचानक पैसों, बैंक विवरण, ओटीपी या क्रेडिट कार्ड की जानकारी मांग रहा हो।

साइबर सुरक्षा के लिहाज से परिवार के सदस्यों के बीच पहले से तय किसी निजी सवाल या मौखिक पासवर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। अचानक आई ऐसी कॉल में पैसे या संवेदनशील जानकारी साझा करने के बजाय व्यक्ति से किसी दूसरे नंबर या माध्यम से संपर्क कर पहचान की पुष्टि करनी चाहिए। यदि कॉल में तत्काल भुगतान का दबाव बनाया जा रहा हो तो बातचीत रोककर स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना अधिक सुरक्षित है।

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