आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आज पढ़ाई, रिसर्च, प्रोग्रामिंग और कंटेंट क्रिएशन जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से इस्तेमाल हो रही है। लेकिन इसी तकनीक को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ लोकप्रिय एआई चैटबॉट्स यूजर्स को बिना लाइसेंस वाली ऑनलाइन गैंबलिंग वेबसाइट्स के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इतना ही नहीं, इन प्लेटफॉर्म्स के फीचर्स और उन तक पहुंचने के तरीके भी बताए जा रहे हैं, जिससे डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार एआई के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, रिसर्चर्स ने यह जांचने के लिए एक परीक्षण किया कि एआई चैटबॉट्स संभावित रूप से जोखिम भरे सवालों का किस तरह जवाब देते हैं। इसके लिए दुनिया के कई चर्चित एआई मॉडल्स से यूनाइटेड किंगडम में संचालित बिना लाइसेंस वाले ऑनलाइन कैसीनो प्लेटफॉर्म्स के बारे में सवाल पूछे गए। परीक्षण में सामने आया कि कई चैटबॉट्स ने इन वेबसाइट्स के नाम बताए और उनके फीचर्स का भी जिक्र किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना लाइसेंस वाले ऑनलाइन गैंबलिंग प्लेटफॉर्म अक्सर किसी नियामक संस्था के अधीन नहीं होते। ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर यूजर्स के पैसे और व्यक्तिगत डेटा दोनों के जोखिम में पड़ने की संभावना रहती है। कई मामलों में इन साइट्स के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान की चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों की भी आशंका जताई जाती रही है।
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लुभावने ऑफर और क्रिप्टो पेमेंट का जिक्र
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ एआई चैटबॉट्स ने इन वेबसाइट्स के ऐसे फीचर्स का उल्लेख किया जो यूजर्स को आकर्षित कर सकते हैं। इनमें भारी बोनस ऑफर, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान की सुविधा और तेज़ी से पैसे निकालने की व्यवस्था जैसे पहलू शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवरण अनजाने में इन प्लेटफॉर्म्स के प्रचार की तरह काम कर सकते हैं, जिससे यूजर्स का ध्यान इन जोखिम भरी साइट्स की ओर जा सकता है।
शिखा सिंह, सीनियर रिसर्च एसोसिएट, सेंटर फॉर पुलिस टेक्नोलॉजी का कहना है, “एआई चैटबॉट्स का मकसद यूजर्स को जानकारी देना होता है, लेकिन अगर वे अनजाने में बिना लाइसेंस वाले गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स की जानकारी देने लगें तो यह डिजिटल इकोसिस्टम के लिए चिंता का विषय है। ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर न तो मजबूत नियमन होता है और न ही उपभोक्ता सुरक्षा के पर्याप्त प्रावधान, जिससे यूजर्स आर्थिक और डेटा संबंधी जोखिमों में फंस सकते हैं।”
डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एआई मॉडल इंटरनेट पर उपलब्ध विशाल डेटा से प्रशिक्षित होते हैं। यदि इस डेटा में अनियंत्रित या भ्रामक जानकारी मौजूद हो, तो चैटबॉट्स कभी-कभी ऐसी जानकारी भी साझा कर सकते हैं जो उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित नहीं होती।
वेरिफिकेशन सिस्टम से बचने के तरीके भी बताए
मामला केवल वेबसाइट्स के नाम बताने तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मामलों में चैटबॉट्स ने उन प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी दी जिनके जरिए यूजर्स पहचान सत्यापन (वेरिफिकेशन) से बच सकते हैं। आम तौर पर ऑनलाइन गैंबलिंग साइट्स पर यूजर्स की पहचान की पुष्टि के लिए कई चरणों वाली प्रक्रिया होती है, ताकि धोखाधड़ी और अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।
शिखा सिंह, सीनियर रिसर्च एसोसिएट, सेंटर फॉर पुलिस टेक्नोलॉजी के अनुसार, “यदि एआई सिस्टम ऐसे तरीकों की जानकारी देने लगें जिनसे वेरिफिकेशन या जिम्मेदार गेमिंग सिस्टम को बायपास किया जा सके, तो यह केवल टेक्नोलॉजी की समस्या नहीं बल्कि पॉलिसी और रेगुलेशन की भी चुनौती बन जाती है। इससे नाबालिगों या जुए की लत से जूझ रहे लोगों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।”
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ चैटबॉट्स ने यूजर्स को उन वेबसाइट्स तक पहुंचने के तरीके बताए जो यूके के स्वैच्छिक ‘सेल्फ-एक्सक्लूजन’ सिस्टम से बाहर संचालित होती हैं। यह सिस्टम उन लोगों की मदद के लिए बनाया गया है जो खुद को जुए की लत से दूर रखना चाहते हैं।
टेक कंपनियों की सफाई
इस खुलासे के बाद कई टेक कंपनियों ने अपने एआई सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रतिक्रिया दी है। एक प्रमुख एआई कंपनी का कहना है कि उसके चैटबॉट को इस तरह के हानिकारक सवालों के जवाब देने से रोकने के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र तैयार किए गए हैं और उनका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और जिम्मेदार जानकारी उपलब्ध कराना है।
इसी तरह एक अन्य तकनीकी कंपनी ने भी दावा किया कि उसके एआई असिस्टेंट में सुरक्षा की कई परतें मौजूद हैं, जिनमें स्वचालित निगरानी और मानवीय समीक्षा जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं ताकि संभावित रूप से खतरनाक जवाबों को रोका जा सके।
एआई के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े जोखिमों की याद दिलाता है। जैसे-जैसे एआई टूल्स का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनके लिए स्पष्ट नियम, पारदर्शिता और निगरानी तंत्र भी उतने ही जरूरी होते जा रहे हैं।
इस संदर्भ में शिखा सिंह, सीनियर रिसर्च एसोसिएट, सेंटर फॉर पुलिस टेक्नोलॉजी कहती हैं, “एआई कंपनियों को अपने मॉडल्स में मजबूत सेफ्टी गार्डरेइल्स, कंटेंट फिल्टरिंग और लगातार मॉनिटरिंग जैसे उपायों को और सख्त करना होगा। साथ ही यूजर्स को भी यह समझना होगा कि एआई से मिली हर जानकारी पूरी तरह सत्य या सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है।”
तकनीकी जगत में तेजी से बदलते इस दौर में यह घटना एक महत्वपूर्ण चेतावनी की तरह देखी जा रही है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि एआई जितना उपयोगी हो सकता है, उतना ही सावधानी और जिम्मेदारी के साथ उसका इस्तेमाल भी जरूरी है।
