अहमदाबाद में व्हाट्सऐप-टेलीग्राम के जरिए पार्ट-टाइम जॉब और फर्जी निवेश टास्क के नाम पर ₹30.5 लाख की साइबर ठगी का खुलासा

अहमदाबाद में ₹30.5 लाख की ‘पार्ट-टाइम जॉब’ साइबर ठगी का खुलासा, व्हाट्सऐप-टेलीग्राम से चल रहा था बड़ा फ्रॉड नेटवर्क

Team The420
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अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां वस्ट्राल निवासी 38 वर्षीय व्यक्ति से ₹30.5 लाख की धोखाधड़ी की गई। यह पूरा फ्रॉड एक कथित “पार्ट-टाइम जॉब” ऑफर के जरिए शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे एक संगठित डिजिटल निवेश जाल में बदल गया। पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित जो वटवा GIDC स्थित एक निजी कंपनी में काम करता है, उसे 11 मार्च को एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज मिला था। इसमें उसे Google Maps पर होटल और रेस्टोरेंट के रिव्यू लिखकर पैसे कमाने का ऑफर दिया गया था। शुरुआत में उसे छोटे-छोटे टास्क दिए गए और कुछ भुगतान भी किए गए, जिससे उसका भरोसा बन गया।

जांच में सामने आया है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठगों ने उसे धीरे-धीरे एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ दिया, जहां “एडवांस टास्क” और “हाई रिटर्न इन्वेस्टमेंट” जैसी योजनाएं बताई जाने लगीं। इसके बाद उसे क्रिप्टो ट्रेडिंग और “कैपिटल वेरिफिकेशन” के नाम पर लगातार पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया।

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शुरुआती चरण में आरोपी ने ₹2,000 जमा करवाकर ₹2,630 वापस भेजे, जिससे पीड़ित को यह सिस्टम वैध लगा। इसके बाद अलग-अलग बहानों से पैसे वसूले जाने लगे—कहीं “लो क्रेडिट स्कोर”, कहीं “टास्क अधूरा”, तो कहीं “VIP मेंबरशिप” के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई।

13 मार्च से 1 अप्रैल के बीच पीड़ित ने अलग-अलग UPI और IMPS ट्रांजेक्शन के जरिए कुल ₹30.5 लाख ट्रांसफर कर दिए। जब उसने अपने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उसे बताया गया कि उसका अकाउंट फ्रीज हो गया है और उसे अनफ्रीज करने के लिए और पैसे जमा करने होंगे। इसी पर उसे शक हुआ और उसने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।

साइबर क्राइम यूनिट ने शिकायत के आधार पर डिजिटल सबूतों की जांच शुरू कर दी है। इसमें बैंक ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और मोबाइल नंबरों की फॉरेंसिक जांच शामिल है। पुलिस उन म्यूल बैंक खातों की भी पहचान कर रही है जिनके जरिए पैसे ट्रांसफर किए गए।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क है, जो अलग-अलग राज्यों से संचालित हो सकता है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय लिंक भी हैं।

इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करते हुए प्रतिष्ठित साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “यह साइबर ठगी का बेहद सुनियोजित तरीका है, जिसमें पहले छोटे लाभ देकर भरोसा बनाया जाता है और फिर धीरे-धीरे बड़े निवेश के लिए दबाव बनाया जाता है। ऐसे मामलों में सोशल इंजीनियरिंग सबसे बड़ा हथियार होता है, जिससे पीड़ित मानसिक रूप से फंस जाता है और नुकसान बढ़ता जाता है।”

विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म साइबर ठगों के लिए आसान माध्यम बनते जा रहे हैं, क्योंकि यहां ग्रुप आधारित नेटवर्क और एन्क्रिप्टेड चैट का फायदा उठाकर फर्जी निवेश योजनाएं चलाई जाती हैं।

पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए “आसान कमाई” या “पार्ट-टाइम जॉब” ऑफर पर भरोसा न करें, खासकर जब उसमें अग्रिम भुगतान या क्रिप्टो निवेश की मांग की जाए।

फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की डिजिटल और वित्तीय कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और जांच के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

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