अहमदाबाद। डिजिटल दौर में सोशल मीडिया जहां लोगों को जोड़ने का माध्यम बन चुका है, वहीं साइबर अपराधियों के लिए यह ठगी का बड़ा हथियार भी बन गया है। Ahmedabad के ओढव इलाके में सामने आए एक मामले ने इस खतरे को फिर उजागर कर दिया है, जहां एक 48 वर्षीय व्यक्ति से कथित तौर पर हनीट्रैप के जरिए करीब ₹15 लाख की ठगी की गई। आरोप है कि तीन लोगों ने मिलकर एक फर्जी महिला प्रोफाइल बनाई, दोस्ती की और फिर शादी के नाम पर पैसे ऐंठते रहे।
शिकायतकर्ता के अनुसार, यह पूरा मामला करीब तीन साल पुराना है, जब वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook पर ‘निर्जु नाकरमी’ नाम की एक प्रोफाइल के संपर्क में आया। प्रोफाइल खुद को मॉडलिंग से जुड़ी महिला बताती थी और बाद में खुद को तलाकशुदा भी बताया। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ी और भरोसा कायम किया गया।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों—सरबजीत सिंह ग्यासिंह भारती, रणवीर सिंह ग्यासिंह भारती और सुनील हरिशंकर पांडे—ने मिलकर यह फर्जी प्रोफाइल तैयार की थी। आरोप है कि तीनों ने सुनियोजित तरीके से पीड़ित को अपने जाल में फंसाया और शादी का प्रस्ताव देकर भावनात्मक रूप से प्रभावित किया।
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शुरुआत में छोटी रकम की मांग की गई, जिससे पीड़ित को शक न हो। शिकायत के मुताबिक, पहली बार ₹15,000 नकद दिए गए, यह सोचकर कि यह रकम उस महिला तक पहुंचाई जाएगी। इसके बाद अलग-अलग बहानों से पैसे मांगे जाने लगे—कभी यात्रा खर्च, कभी निजी जरूरतें, तो कभी शादी की तैयारी के नाम पर।
पीड़ित ने बताया कि समय के साथ वह आरोपियों के झांसे में आता गया और किश्तों में करीब ₹13.5 लाख तक की रकम दे दी। आरोप है कि जैसे-जैसे भरोसा बढ़ता गया, मांग की जाने वाली रकम भी बढ़ती गई। इस दौरान आरोपी लगातार शादी का भरोसा दिलाते रहे।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित ने आगे पैसे देने से इनकार किया। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर उसे झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने, यहां तक कि दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाने की धमकी दी। साथ ही, समाज में बदनाम करने की चेतावनी भी दी गई। डर और दबाव के चलते पीड़ित से करीब ₹1.5 लाख और वसूले गए, जिससे कुल रकम ₹15 लाख तक पहुंच गई।
बाद में जब पीड़ित को शक हुआ, तो उसने लेनदेन की जांच की। आरोप है कि उसे पता चला कि पैसे आरोपियों के बीच ही ट्रांसफर किए जा रहे थे। सामना करने पर भी उसे धमकियां दी गईं, यहां तक कि जान से मारने की बात भी कही गई।
आखिरकार पीड़ित ने अपने परिजन की मदद से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिकी में तीनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जबरन वसूली और धमकी देने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों—जैसे चैट रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डाटा—की जांच कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हनीट्रैप और ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। अपराधी फर्जी पहचान बनाकर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर भावनात्मक या सामाजिक दबाव बनाकर पैसे वसूलते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर देर से शिकायत करते हैं, जिससे जांच और भी जटिल हो जाती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सतर्क रहें, किसी भी तरह की वित्तीय मदद देने से पहले पूरी जांच करें और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं इस गिरोह ने अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना तो नहीं बनाया। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
