अहमदाबाद नगर निगम की सख्त कार्रवाई; सरकारी आवासों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू, अवैध किरायेदारी पर सीधी कार्रवाई

EWS फ्लैट किराये पर देना पड़ेगा भारी: दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹1 लाख जुर्माना, तीसरी बार मालिकाना हक होगा रद्द

Roopa
By Roopa
5 Min Read

अहमदाबाद: अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए आवंटित सरकारी आवासों के अवैध किराये और व्यावसायिक इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई का फैसला किया है। नगर निगम की हाउसिंग कमेटी ने ऐसे लाभार्थियों के खिलाफ तीन-स्तरीय दंड व्यवस्था लागू करने को मंजूरी दी है, जिसके तहत पहली और दूसरी बार उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा, जबकि तीसरी बार पकड़े जाने पर फ्लैट का मालिकाना हक रद्द कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता से बनाए गए आवास वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक ही सीमित रहें और उनका व्यावसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग न हो।

नगर निगम के अनुसार, ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास योजनाओं के तहत आवंटित फ्लैटों को आवंटन के बाद कम से कम सात वर्ष तक किराये पर देना नियमों के विरुद्ध है। इसके बावजूद जांच में सामने आया कि कई लाभार्थी आवास आवंटित होते ही उन्हें किराये पर देकर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। इस बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए हाउसिंग कमेटी ने कठोर दंडात्मक कार्रवाई लागू करने का निर्णय लिया है।

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई लाभार्थी पहली बार अपना फ्लैट अवैध रूप से किराये पर देता हुआ पाया जाता है, तो उस पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित फ्लैट को तत्काल सील कर 90 दिनों तक बंद रखा जाएगा। इस अवधि के दौरान लाभार्थी को फ्लैट का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी।

यदि वही व्यक्ति दोबारा नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार भी फ्लैट को 90 दिनों के लिए सील किया जाएगा। नगर निगम का कहना है कि बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ अब पहले की तुलना में कहीं अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

तीसरी बार उल्लंघन सामने आने पर मामला और गंभीर माना जाएगा। ऐसी स्थिति में नगर निगम सिटी सिविल कोर्ट में कानूनी कार्यवाही शुरू करेगा और संबंधित लाभार्थी के फ्लैट का पंजीकरण निरस्त कराने तथा उसका मालिकाना हक समाप्त करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे सरकारी आवासों के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference

हाउसिंग कमेटी के अध्यक्ष दर्शन शाह ने कहा कि पहले कई मामलों में सील किए गए फ्लैट राजनीतिक सिफारिशों या प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप के बाद निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही खोल दिए जाते थे। अब इस प्रकार की किसी भी सिफारिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सील किए गए फ्लैटों को 90 दिन पूरे होने से पहले किसी भी परिस्थिति में नहीं खोला जाए।

दर्शन शाह ने कहा कि नगर निगम ने सरकारी आवासों के व्यावसायिक शोषण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दबाव, वीआईपी सिफारिश या व्यक्तिगत अनुरोध के आधार पर कार्रवाई में ढील नहीं दी जाएगी। सभी मामलों में नियमों का समान रूप से पालन कराया जाएगा।

नगर निगम का मानना है कि ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराना है, न कि उन्हें आय अर्जित करने का माध्यम बनाना। यदि लाभार्थी स्वयं इन फ्लैटों में नहीं रहते और उन्हें किराये पर देकर लाभ कमाते हैं, तो वास्तविक जरूरतमंद परिवार सरकारी सहायता से वंचित रह जाते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में विभिन्न आवास परियोजनाओं में नियमित निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा। संदिग्ध मामलों की जांच के लिए फील्ड अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बिना किसी पूर्व चेतावनी के कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने लाभार्थियों से अपील की है कि वे आवंटन की शर्तों का पालन करें और सरकारी आवासों का उपयोग केवल उसी उद्देश्य के लिए करें जिसके लिए उन्हें आवंटित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सख्त निगरानी और कठोर दंड व्यवस्था के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी कल्याणकारी आवास योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र परिवारों तक ही पहुंचे और सार्वजनिक संसाधनों का किसी भी प्रकार से दुरुपयोग न हो।

हमसे जुड़ें

Share This Article