ऑपरेशन 'तूफान' के दौरान पुलिस को कॉल सेंटर से संचालित कथित ऑनलाइन लोन ऐप गिरोह का मिला सुराग; विदेशी नागरिकों समेत बड़ी संख्या में लोगों को बनाया गया निशाना, डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

27 साल बाद दो पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी भगोड़े की गिरफ्तारी, नए सुराग के बाद यूपी पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Roopa
By Roopa
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आगरा (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश पुलिस ने वर्ष 1999 में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में वांछित एक आरोपी को 27 वर्ष बाद गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, ₹50,000 के इनामी आरोपी का पता हाल ही में मिली एक महत्वपूर्ण सूचना के आधार पर लगाया गया। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी और विधि के अनुसार आरोपी तब तक निर्दोष माना जाएगा जब तक उसका अपराध सिद्ध नहीं हो जाता।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी भूरा कथित रूप से रमेश कुशवाह गिरोह का सक्रिय सदस्य था। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह गिरोह लूट, अपहरण और हत्या जैसी आपराधिक वारदातों में शामिल था। पुलिस का आरोप है कि गिरोह के हथियार बरामद होने के बाद उसके सदस्यों ने पुलिसकर्मियों से हथियार लूटने की योजना बनाई थी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, 31 दिसंबर 1999 की रात भूरा और उसके कथित साथियों ने खेरागढ़ क्षेत्र में गश्त के दौरान अलाव ताप रहे तीन पुलिसकर्मियों के पास पहुंचकर पहले उनका विश्वास जीता और फिर उन पर गोलीबारी कर दी। इस घटना में कांस्टेबल कमल सिंह और चरन सिंह की मृत्यु हो गई, जबकि एक अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गया।

पुलिस का कहना है कि घटना के बाद गिरोह के कई सदस्य अलग-अलग पुलिस अभियानों में मारे गए या गिरफ्तार होकर बाद में दोषी ठहराए गए। हालांकि, भूरा कथित रूप से मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भागकर वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता रहा।

जांच के अनुसार, आरोपी ने पहले मजदूरी की और बाद में ट्रक चालक के रूप में काम करना शुरू किया। पुलिस का आरोप है कि उसने बाद में अपनी पहचान बदलकर जमील नाम अपना लिया और कथित तौर पर आधिकारिक अभिलेखों में स्वयं को मृत भी घोषित करवा दिया, जिससे उसकी तलाश और कठिन हो गई।

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पुलिस के अनुसार, मामले में सफलता तब मिली जब हाल ही में जेल से रिहा हुए एक पुराने सहयोगी ने बकरीद के अवसर पर हुई एक मुलाकात के दौरान कथित रूप से बताया कि लगभग दो वर्ष पहले उसकी भूरा से बातचीत हुई थी। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और अंततः आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले अपनी पहचान छिपाने का प्रयास किया, लेकिन बाद में उसने अपनी वास्तविक पहचान स्वीकार कर ली। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को न्यायालय में पेश कर दिया गया है और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड लेने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी ने कथित रूप से नई पहचान और स्वयं को मृत दर्शाने वाले दस्तावेज कैसे प्राप्त किए। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी सहायता की थी।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरफ्तारी लंबे समय से लंबित मामले में महत्वपूर्ण प्रगति है, लेकिन केवल गिरफ्तारी या पुलिस के आरोपों से किसी व्यक्ति का अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। अभियोजन पक्ष को न्यायालय में दस्तावेजी, फोरेंसिक और गवाहों के साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करने होंगे, जबकि आरोपी को निष्पक्ष सुनवाई और अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी अधिकार प्राप्त है।

पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है। यदि जांच के दौरान नए साक्ष्य या अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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