आगरा- ऑनलाइन ट्रेडिंग और नेटवर्क मार्केटिंग में भारी मुनाफे का झांसा देकर देशभर के निवेशकों से करीब 50 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले साइबर गिरोह के एक सदस्य को आगरा साइबर क्राइम पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अजय के रूप में हुई है, जिसे तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग साक्ष्यों के आधार पर पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह कोरोना काल के बाद से सक्रिय था और फर्जी वेबसाइट, ईमेल आईडी तथा ऑनलाइन ट्रेनिंग मॉड्यूल के जरिए निवेशकों को अपने जाल में फंसाता था।
साइबर क्राइम पुलिस को बीते एक वर्ष से ऑनलाइन निवेश और नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़ी कई शिकायतें मिल रही थीं। अलग-अलग राज्यों से सामने आई इन शिकायतों में एक समान पैटर्न दिखा—निवेश से पहले आकर्षक वादे, प्रोफेशनल वेबसाइट, विदेशी कंपनी का दावा और शुरुआती चरण में दिखाया गया फर्जी मुनाफा। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसके बाद आरोपी अजय की भूमिका सामने आई।
फर्जी वेबसाइट और विदेशी कंपनी का झांसा
जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह ने एक फर्जी वेबसाइट और ईमेल नेटवर्क तैयार कर निवेशकों से संपर्क किया। लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि वे एक कथित विदेशी ट्रेडिंग और नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी से जुड़ रहे हैं, जहां ऑनलाइन ट्रेनिंग के बाद निवेश करने पर असाधारण और सुनिश्चित रिटर्न मिलेगा। वेबसाइट पर लॉगिन आईडी, पर्सनल डैशबोर्ड, ग्रोथ चार्ट और प्रॉफिट रिपोर्ट दिखाई जाती थी, जिससे निवेशकों को यह भ्रम होता था कि उनका पैसा लगातार बढ़ रहा है।
पुलिस के अनुसार, इसी डिजिटल प्रस्तुति के जरिए करीब 1500 से अधिक लोगों को अलग-अलग किश्तों में निवेश के लिए राजी किया गया। वास्तविकता में यह पूरा सिस्टम ठगी के उद्देश्य से डिजाइन किया गया डिजिटल ढांचा था, जिसमें किसी प्रकार का वास्तविक ट्रेडिंग या निवेश नहीं किया जा रहा था।
15 अप्रैल 2024 को दर्ज हुआ था मुकदमा
निवेशकों की शिकायत पर 15 अप्रैल 2024 को थाना साइबर क्राइम में इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने वेबसाइट से जुड़े आईपी एड्रेस, सर्वर डाटा, बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन और डिजिटल लॉग्स का विश्लेषण किया। जांच में यह सामने आया कि ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर मनी ट्रेल छिपाने की रणनीति अपनाई गई थी।
तकनीकी साक्ष्यों और लेनदेन के विश्लेषण में आरोपी अजय की भूमिका प्रमाणित होने पर पुलिस ने उसे 11 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ धारा 406, 419, 420, 467, 468, 471, 120B सहित आईटी एक्ट की धारा 66(D) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की पहचान में जुटी है।
Centre for Police Technology: A Unified Platform for OEMs, Vendors, and Police Forces
CPT का विश्लेषण: ‘डिजिटल ठगी का संगठित मॉडल’
इस मामले पर Center for Police Technology (CPT) के साइबर अपराध विशेषज्ञ Rajesh Kumar ने कहा कि यह केस दर्शाता है कि साइबर ठगी अब व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुकी है।
राजेश कुमार के अनुसार, “नेटवर्क मार्केटिंग और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर बनाई गई फर्जी वेबसाइटें आज साइबर अपराधियों का सबसे प्रभावी हथियार बन गई हैं। प्रोफेशनल डिजाइन, विदेशी कंपनी का दावा और फर्जी मुनाफा रिपोर्ट—ये सभी तत्व निवेशकों के मनोविज्ञान को प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।”
उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में निवेशकों को किसी तरह का संदेह नहीं होता, क्योंकि उन्हें डैशबोर्ड पर लगातार मुनाफा दिखाया जाता है। “असल ठगी तब सामने आती है, जब निवेशक पैसा निकालने की कोशिश करता है और वेबसाइट या कॉल सेंटर से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है,” उन्होंने कहा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
CPT के अनुसार, बिना सेबी पंजीकरण, अस्पष्ट कंपनी पते और केवल ऑनलाइन ट्रेनिंग या रेफरल मॉडल के नाम पर निवेश कराने वाली योजनाएं उच्च जोखिम वाली होती हैं। निवेश से पहले कंपनी की वैधानिक स्थिति, रजिस्ट्रेशन, और स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापन बेहद जरूरी है।
फिलहाल आगरा साइबर क्राइम पुलिस इस मामले से जुड़े अन्य खातों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस संगठित साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं। यह कार्रवाई एक बार फिर रेखांकित करती है कि डिजिटल लालच के खिलाफ सतर्कता और समय पर शिकायत ही सबसे बड़ा सुरक्षा उपाय है।
