आगरा में कथित फर्जी मेडिकल रिपोर्ट मामले में अस्पताल संचालक और दो डॉक्टरों समेत पांच लोगों के खिलाफ अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।

आईसीयू में भर्ती की रिपोर्ट पर उठे सवाल, दोबारा मेडिकल में फ्रैक्चर गायब; अस्पताल संचालक समेत पांच पर केस

Team The420
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आगरा। एत्माद्दौला थाने में ट्रांस यमुना ए ब्लॉक स्थित जेडी हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी के अस्पताल संचालक और दो डॉक्टरों समेत पांच लोगों के खिलाफ कथित रूप से फर्जी मेडिकल तैयार करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला अछनेरा के कुकथला गांव निवासी अधिवक्ता संतोष बाबू की शिकायत से जुड़ा है। अधिवक्ता का आरोप है कि उन्हें मारपीट के एक मामले में गंभीर धाराओं में फंसाने के उद्देश्य से चोट और इलाज से संबंधित मेडिकल दस्तावेज तैयार किए गए।

अदालत के आदेश के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी में अस्पताल से जुड़े दस्तावेज, मरीज के उपचार और अलग-अलग समय पर कराई गई चिकित्सकीय जांच को जांच का आधार बनाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मेडिकल रिकॉर्ड में घायल को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती और कई दिनों तक आईसीयू में रखा जाना दिखाया गया, जबकि बाद में कराई गई चिकित्सकीय जांच में गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई।

शिकायत के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2021 को अनिल कुमार ने अधिवक्ता संतोष बाबू के खिलाफ अछनेरा थाने में मारपीट और गाली-गलौज के आरोप में एनसीआर दर्ज कराई थी। बाद में इसे प्राथमिकी में बदल दिया गया। विवेचना के दौरान गंभीर चोट से संबंधित धारा 325 को हटाकर गैर इरादतन हत्या के प्रयास से संबंधित धारा 308 बढ़ा दी गई। इसके बाद पुलिस ने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

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अधिवक्ता का आरोप है कि अनिल कुमार ने घटना का समय 28 अक्टूबर 2021 को सुबह करीब 9:45 बजे बताया था। शिकायत के अनुसार, घटना के लगभग सात घंटे बाद उसे जेडी हॉस्पिटल में भर्ती दिखाया गया। अस्पताल के दस्तावेजों में 8 नवंबर 2021 तक उपचार चलने का उल्लेख था। इस तरह उसे करीब 11 दिन अस्पताल में भर्ती और सात दिन आईसीयू में रहने की बात रिकॉर्ड में दर्ज होने का दावा किया गया है।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, इन मेडिकल दस्तावेजों को मूल विवेचना के दौरान पुलिस रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया था। बाद में 30 मई 2023 को अनिल कुमार ने जमानत प्रार्थना पत्र का विरोध करने के लिए अदालत में मेडिकल से जुड़े दस्तावेज पेश किए। अधिवक्ता ने इन्हीं दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बाद में तैयार किए गए मेडिकल रिकॉर्ड का इस्तेमाल उन्हें गंभीर धाराओं वाले मुकदमे में फंसाने के लिए किया गया।

मामले में दूसरी चिकित्सकीय जांच भी महत्वपूर्ण है। अधिवक्ता के अनुसार, अनिल कुमार ने 29 अक्टूबर 2021 को जिला अस्पताल में एक्स-रे कराया था और बाद में सीटी स्कैन भी कराया गया। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर एसएन मेडिकल कॉलेज की टीम से दोबारा मेडिकल परीक्षण कराया गया। शिकायत के अनुसार, इस जांच में न तो किसी तरह के फ्रैक्चर की पुष्टि हुई और न ही खून का थक्का पाया गया। रिपोर्ट सामान्य बताई गई।

अस्पताल के रिकॉर्ड को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत जेडी हॉस्पिटल से उपचार से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। आरोप है कि प्रथम और द्वितीय अपीलीय अधिकारियों के आदेश के बावजूद अस्पताल की ओर से मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद अधिवक्ता ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की।

अस्पताल की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए अलग पक्ष रखा गया है। फिजिशियन डॉ. एसके सिंह के अनुसार, पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले में एक व्यक्ति को अस्पताल लाया गया था। उसके भाई के पास मेडिकल से संबंधित दस्तावेज मौजूद थे और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर घायल का उपचार किया गया। उनका कहना है कि अस्पताल के पास उपचार और दस्तावेजों से संबंधित साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें विवेचना के दौरान पुलिस के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक, मामला कथित रूप से फर्जी मेडिकल तैयार कर किसी व्यक्ति को मुकदमे में फंसाने के आरोपों से जुड़ा है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब अस्पताल के रिकॉर्ड, भर्ती से संबंधित दस्तावेज, उपचार का विवरण, एक्स-रे और सीटी स्कैन रिपोर्ट तथा दोबारा हुए मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट की जांच की जाएगी।

विवेचना में यह भी देखा जाएगा कि मरीज को वास्तव में कितने समय तक अस्पताल में भर्ती रखा गया, क्या वह सात दिन आईसीयू में रहा और मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज चोटों का चिकित्सकीय परीक्षणों से कोई मेल है या नहीं। अलग-अलग रिपोर्ट और दस्तावेजों का मिलान कर उनकी प्रमाणिकता की जांच की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साक्ष्य संकलन के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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