ऑनलाइन भर्ती में बढ़ता खतरा; ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे रच रहे भरोसेमंद जाल, विशेषज्ञों ने दी सख्त चेतावनी

UP में हाईटेक साइबर ठगी का भयानक जाल: 7 हजार फर्जी नंबर, 30 करोड़ से अधिक की ठगी

Roopa
By Roopa
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आगरा: उत्तर प्रदेश में साइबर अपराधियों का हाईटेक जाल सामने आया है, जिसमें पिछले सवा साल में 7 हजार से अधिक फर्जी मोबाइल नंबर और यूपीआई आईडी का इस्तेमाल कर लोगों से 30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई। फर्जी दस्तावेजों की मदद से जारी किए गए ये नंबर और बैंक खाते कई महीनों तक सक्रिय रहे और इसके बाद बंद कर दिए गए।

जांच में पता चला कि अपराधियों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सिम कार्ड और बैंक खाते खोले और उन्हें बड़े पैमाने पर ठगी के लिए इस्तेमाल किया। अधिकांश दस्तावेज सामान्य मजदूरों, ठेले और छोटे व्यवसायों के नाम पर थे, जिनका अपराधियों ने लाभ के लिए दुरुपयोग किया। कई पीड़ितों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके दस्तावेजों से कोई सिम या यूपीआई आईडी सक्रिय है।

जनवरी और फरवरी 2026 में ही 1,750 से अधिक फर्जी नंबरों की पहचान कर उन्हें बंद कराया गया। इन नंबरों के माध्यम से ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, यूपीआई पेमेंट और अन्य डिजिटल लेन‑देन किए गए।

मोबाइल और बैंक खाते ब्लॉक करने का तरीका

केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) पोर्टल की मदद से मोबाइल का आईएमईआई नंबर ब्लॉक किया जा सकता है। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की रिपोर्ट के आधार पर व्हॉट्सएप नंबर से जुड़े डिवाइस को भी बंद कराया जा सकता है। प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद टेलीकॉम ऑपरेटरों को सिम कार्ड ब्लॉक करने के निर्देश दिए जाते हैं।

आगरा में 45 अपराधियों की गिरफ्तारी

पिछले 26 महीनों में आगरा में साइबर ठगी में 200 लोगों पर कार्रवाई हुई। इनमें 45 आरोपी ऐसे थे, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों के सहारे सिम जारी कर गिरोह को कमीशन पर बेचा। ये आरोपी मुख्य ठगी नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखने में सहायक थे।

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सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

  • केवल कंपनी के अधिकृत सिम विक्रेता से सिम कार्ड खरीदें।
  • कैनोपी या छोटे मोबाइल स्टॉल से सिम लेने से बचें।
  • दस्तावेज सत्यापन के दौरान विक्रेता द्वारा दो बार फोटो खींचे जाने पर इसकी शिकायत करें।
  • किसी भी साइबर ठगी या संदिग्ध लेन‑देन की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें। इससे संबंधित मोबाइल नंबर और बैंक खाते तुरंत ब्लॉक किए जा सकते हैं।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी, Prof. Triveni Singh ने कहा, “साइबर ठग तेजी से नए‑नए तरीके अपनाते हैं। वे सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर किसी भी सामान्य व्यक्ति को निशाना बना सकते हैं। यूजर्स को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध संदेश या लिंक पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें।”

Prof. Singh ने आगे चेतावनी दी, “सिम कार्ड और यूपीआई आईडी की सुरक्षा में लापरवाही सीधे आर्थिक नुकसान में बदल सकती है। सरकारी पोर्टल और CEIR जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर तुरंत ब्लॉक करना ही एकमात्र सुरक्षित उपाय है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि हाईटेक साइबर ठगी का यह जाल लगातार विकसित हो रहा है। इसलिए डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करना और संदिग्ध लेन‑देन की जानकारी तुरंत साझा करना जरूरी है।

इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि फर्जी नंबर और यूपीआई के माध्यम से होने वाली ठगी सिर्फ व्यक्तिगत नुकसान नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक खतरे का कारण बन सकती है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार ऐसे मामलों की जांच और रोकथाम के लिए सतर्क हैं, लेकिन आम नागरिकों की जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

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