आगरा। बड़े लोन की मंजूरी दिलाने का भरोसा देकर ग्राहकों से प्री-पेमेंट के नाम पर रकम अपने निजी खातों में ट्रांसफर कराने और बाद में उसे हड़पने के आरोप में भारत फाइनेंशियल इनक्लूजन लिमिटेड के चार कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला कंपनी की आगरा-2 रिटेल शाखा से जुड़ा है। विभागीय सत्यापन के दौरान पांच ग्राहकों से कुल ₹3,32,418 की रकम के कथित दुरुपयोग का पता चलने के बाद कंपनी की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।
शिकायत रिटेल शाखा के शाखा प्रबंधक की ओर से दी गई। इसमें बताया गया कि कंपनी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंद महिलाओं तथा अन्य लोगों को ई-केवाईसी के आधार पर स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराती है। कंपनी के फील्ड अधिकारी ग्राहकों से संपर्क करने, ऋण प्रक्रिया पूरी कराने और बाद में किस्तों की वसूली का काम संभालते हैं।
आरोप है कि आगरा-2 शाखा में तैनात चार कर्मचारियों ने ऋण लेने वाले कुछ ग्राहकों को उनकी पात्रता से अधिक या बड़ा लोन दिलाने का भरोसा दिया। ग्राहकों को बताया गया कि ऋण स्वीकृत कराने के लिए पहले कुछ रकम प्री-पेमेंट के रूप में जमा करनी होगी। इसके बाद कथित तौर पर ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान कराया गया।
जांच में आरोप है कि यह रकम कंपनी के अधिकृत खाते में जमा कराने के बजाय कर्मचारियों ने अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई। बाद में रकम का कथित तौर पर दुरुपयोग कर लिया गया। विभागीय सत्यापन के दौरान जब ग्राहकों से किए गए भुगतान और कंपनी के रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो कथित वित्तीय अनियमितता सामने आई।
कर्मचारियों पर अलग-अलग रकम लेने का आरोप
मामले में कर्मचारी विकास, निवासी हुमायूंपुर, फिरोजाबाद, पर दो ग्राहकों से कुल ₹70,054 की रकम लेने का आरोप लगाया गया है। इसी तरह टूंडला, फिरोजाबाद निवासी रवि कुमार पर एक ग्राहक से ₹62,539 की कथित हेराफेरी का आरोप है।
बरारा निवासी जय प्रकाश धनगर पर एक ग्राहक से ₹73,867 लेने का आरोप लगाया गया है। वहीं फिरोजाबाद के अंबे नगर निवासी सुनील कुमार पर एक ग्राहक से ₹25,958 की रकम अपने खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप है। विभागीय सत्यापन में इन मामलों समेत पांच ग्राहकों से कुल ₹3,32,418 की कथित हेराफेरी सामने आई है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस अब रकम के लेनदेन की जांच कर रही है। संबंधित बैंक खातों में हुए ऑनलाइन भुगतान, ग्राहकों के बयान और ऋण प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि ग्राहकों से प्री-पेमेंट के नाम पर रकम लेने की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई और उन्हें बड़े ऋण का भरोसा किस आधार पर दिया गया।
अन्य ग्राहकों से रकम लेने की भी पड़ताल
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि सामने आए पांच मामलों के अलावा अन्य ग्राहकों से भी इसी तरीके से रकम तो नहीं ली गई। इसके लिए शाखा के रिकॉर्ड, ऋण आवेदनों और कर्मचारियों से जुड़े लेनदेन की जांच की जा सकती है। ग्राहकों से संपर्क करने और भुगतान कराने में इस्तेमाल किए गए माध्यमों की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि कथित हेराफेरी केवल नामजद कर्मचारियों तक सीमित थी या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका रही। यदि जांच के दौरान अतिरिक्त ग्राहक या नए बैंक खाते सामने आते हैं तो मामले का दायरा बढ़ सकता है।
कंपनी के विभागीय सत्यापन के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा है। प्राथमिकी में नामजद चारों कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है। पुलिस वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ग्राहकों से ली गई रकम कहां गई और कथित तौर पर लोन दिलाने के नाम पर पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित की गई।
जांच में ग्राहकों के बयान, बैंक लेनदेन, ऋण संबंधी दस्तावेज और कंपनी के आंतरिक रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले में विधिक कार्रवाई जारी है।
