डिजिटल बैंकिंग के तेजी से विस्तार के बीच AEPS स्कैम एक गंभीर साइबर खतरे के रूप में सामने आया है, जिसमें बिना डेबिट कार्ड और OTP के भी बैंक खातों से पैसे निकाले जाने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम की तकनीकी कमजोरी नहीं, बल्कि इसके दुरुपयोग का नया तरीका है, जिसमें आधार आधारित पहचान प्रणाली का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
AEPS यानी Aadhaar Enabled Payment System को NPCI ने ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में आसान बैंकिंग सुविधा देने के उद्देश्य से विकसित किया था। इस सिस्टम में आधार नंबर और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए ट्रांजैक्शन किए जाते हैं, जिससे बैंकिंग प्रक्रिया सरल हो सके। लेकिन अब यही सुविधा साइबर अपराधियों के लिए नया हथियार बनती जा रही है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठग पहले डेटा लीक, सोशल मीडिया या फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों का आधार नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारी हासिल करते हैं। इसके बाद AI आधारित टूल्स और डिजिटल तकनीक की मदद से फर्जी प्रोफाइल और बायोमेट्रिक क्लोनिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे सिस्टम को धोखा देकर ट्रांजैक्शन को अंजाम दिया जा सके। कई मामलों में फर्जी एजेंट बनकर कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से भी बिना जानकारी के लेनदेन किए जाते हैं।
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भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने भी इस तरह के मामलों को लेकर चेतावनी जारी की है। संस्था के अनुसार साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर फर्जी पहचान और डिजिटल प्रोफाइल तैयार कर रहे हैं, जिससे धोखाधड़ी की पहचान करना और भी कठिन होता जा रहा है। यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और बैंकिंग सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन गया है।
Future Crime Research Foundation ने इस खतरे को “AI-Enabled Identity Cloning” का उभरता हुआ रूप बताया है और इसे भविष्य के सबसे तेजी से बढ़ते बैंकिंग फ्रॉड्स में शामिल किया है। इसी बीच प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा है कि “आज साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा मानव भरोसे का फायदा उठा रहे हैं। AEPS जैसे सिस्टम में सबसे बड़ा खतरा बायोमेट्रिक डेटा के दुरुपयोग का है, क्योंकि एक बार डेटा लीक होने पर नुकसान को रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।” उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी स्थिति में अपना आधार नंबर या बायोमेट्रिक जानकारी अनजान लोगों के साथ साझा न करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि AEPS स्कैम से बचने के लिए आधार बायोमेट्रिक्स को UIDAI के जरिए लॉक करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा बैंकिंग अलर्ट ऑन रखना, हर ट्रांजैक्शन का SMS नोटिफिकेशन तुरंत चेक करना और किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंट को आधार जानकारी न देना महत्वपूर्ण उपाय हैं। आधार की फोटोकॉपी का अनियंत्रित उपयोग भी जोखिम को बढ़ा सकता है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले समय में AI और डीपफेक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से AEPS फ्रॉड और अधिक जटिल हो सकते हैं। साइबर टीमें लगातार संदिग्ध नेटवर्क की निगरानी कर रही हैं और डिजिटल फोरेंसिक तकनीक के जरिए ऐसे मामलों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की तुरंत रिपोर्ट करें ताकि समय रहते नुकसान को रोका जा सके।
अंत में विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। जैसे-जैसे तकनीक आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे धोखाधड़ी के तरीके भी विकसित हो रहे हैं, इसलिए सतर्कता और डिजिटल सावधानी ही सुरक्षित बैंकिंग की पहली शर्त बन चुकी है।
