नई दिल्ली। लॉयड्स एंटरप्राइजेज और कंपनी के दो शीर्ष अधिकारियों ने कथित धोखाधड़ी गतिविधियों तथा प्रतिभूति बाजार से जुड़े खुलासा नियमों में कथित चूक के मामले को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ निपटा लिया है। मामले के सेटलमेंट के तहत कुल ₹4.16 करोड़ का भुगतान किया गया। इसमें लॉयड्स एंटरप्राइजेज ने ₹1.28 करोड़, जबकि कंपनी के प्रमोटर एवं कार्यकारी निदेशक राजेश राजनारायण गुप्ता और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) वीरेश शंकर सोहनी ने ₹1.44-₹1.44 करोड़ का भुगतान किया।
सेबी के आदेश के मुताबिक, यह मामला कंपनी की ओर से रिपोर्ट किए गए अग्रिमों में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जांच से सामने आया था। बाजार नियामक को नवंबर 2023 में बीएसई की ओर से एक अलर्ट मिला था। इसमें कंपनी के वित्तीय विवरणों में दर्ज अग्रिमों से संबंधित अनियमितताओं की जानकारी दी गई थी। इस अलर्ट के बाद सेबी ने मामले की जांच शुरू की और कंपनी तथा उससे जुड़े अधिकारियों की गतिविधियों और संबंधित खुलासों की पड़ताल की।
जांच के दायरे में कंपनी की ओर से बाजार को उपलब्ध कराई गई जानकारी और प्रतिभूति बाजार के नियमों के तहत जरूरी खुलासे शामिल थे। नियामक ने यह जांचने की प्रक्रिया शुरू की कि कंपनी द्वारा रिपोर्ट किए गए अग्रिम और उनसे संबंधित जानकारी लागू नियमों के अनुरूप थी या नहीं। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की भूमिका और उनके स्तर पर किए गए खुलासों को भी जांच के दायरे में रखा गया।
बीएसई के अलर्ट से शुरू हुई जांच
लॉयड्स एंटरप्राइजेज के मामले में सेबी की जांच की शुरुआत नवंबर 2023 में बीएसई से मिले अलर्ट के बाद हुई। एक्सचेंज की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में कंपनी द्वारा घोषित अग्रिमों को लेकर कथित अनियमितताओं की ओर नियामक का ध्यान गया था। इसके बाद सेबी ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और कंपनी की ओर से किए गए संबंधित खुलासों की जांच की।
सूचीबद्ध कंपनियों के लिए वित्तीय परिणामों और महत्वपूर्ण कारोबारी गतिविधियों से संबंधित जानकारी का सही और समय पर खुलासा करना नियामकीय अनुपालन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में कथित विसंगति या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सेबी जांच शुरू कर सकता है और संबंधित पक्षों के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई कर सकता है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
कंपनी और दोनों अधिकारियों ने अलग-अलग किया भुगतान
सेबी के आदेश में दर्ज सेटलमेंट के अनुसार, लॉयड्स एंटरप्राइजेज ने ₹1.28 करोड़ का भुगतान किया। कंपनी के प्रमोटर एवं कार्यकारी निदेशक राजेश राजनारायण गुप्ता ने ₹1.44 करोड़ और सीएफओ वीरेश शंकर सोहनी ने भी ₹1.44 करोड़ का भुगतान किया। इस तरह दोनों अधिकारियों की ओर से कुल ₹2.88 करोड़ और कंपनी की ओर से ₹1.28 करोड़ जमा किए गए। तीनों भुगतानों को मिलाकर सेटलमेंट राशि ₹4.16 करोड़ रही।
सेटलमेंट प्रक्रिया के तहत संबंधित पक्ष नियामक के साथ निर्धारित शर्तों पर मामले का निपटारा कर सकते हैं। इसके लिए तय राशि का भुगतान और अन्य शर्तों का पालन करना होता है। इस मामले में कंपनी और दोनों अधिकारियों की ओर से सेटलमेंट राशि का भुगतान किए जाने के बाद संबंधित कार्यवाही का निपटारा किया गया।
खुलासों और अग्रिमों पर था नियामक का फोकस
मामले का प्रमुख आधार कंपनी की ओर से रिपोर्ट किए गए अग्रिमों से जुड़ी कथित अनियमितताएं थीं। सेबी ने बीएसई के अलर्ट के बाद इस बात की पड़ताल की कि कंपनी के वित्तीय विवरणों में दर्ज अग्रिमों से संबंधित जानकारी किस तरह रिपोर्ट की गई थी और क्या आवश्यक नियामकीय खुलासे नियमों के अनुरूप किए गए थे।
सेबी की जांच प्रतिभूति बाजार में पारदर्शिता और सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा निवेशकों को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी की विश्वसनीयता से जुड़े नियमों के तहत आगे बढ़ी। मामले में कंपनी के साथ उसके शीर्ष अधिकारियों की भूमिका भी नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा रही।
सेटलमेंट के बाद कार्यवाही का निपटारा
कुल ₹4.16 करोड़ के भुगतान के साथ लॉयड्स एंटरप्राइजेज, राजेश राजनारायण गुप्ता और वीरेश शंकर सोहनी से जुड़ी संबंधित सेटलमेंट कार्यवाही का निपटारा हो गया। सेबी के आदेश में दर्ज राशि के अनुसार, कंपनी और दोनों अधिकारियों ने अलग-अलग निर्धारित भुगतान किया।
यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि सूचीबद्ध कंपनियों के लिए वित्तीय विवरण, अग्रिमों और अन्य महत्वपूर्ण कारोबारी गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं का नियमानुसार खुलासा करना जरूरी है। एक्सचेंज या नियामक को किसी रिपोर्टिंग में कथित अनियमितता का संकेत मिलने पर जांच शुरू हो सकती है। लॉयड्स एंटरप्राइजेज के मामले में भी बीएसई के अलर्ट के बाद सेबी की जांच शुरू हुई और बाद में कंपनी तथा दोनों अधिकारियों ने सेटलमेंट के जरिए मामला निपटा लिया।
