तय समय पर फिल्म शुरू न होने और विज्ञापन चलाए जाने को लेकर वकील ने दर्ज कराई थी शिकायत; उपभोक्ता फोरम ने मल्टीप्लेक्स संचालक को ₹75 हजार देने का आदेश दिया

विज्ञापनों के कारण 22 मिनट देर से शुरू हुई फिल्म, हैदराबाद के वकील को उपभोक्ता अदालत से ₹75 हजार

Roopa
By Roopa
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हैदराबाद। फिल्म देखने पहुंचे हैदराबाद के एक वकील को तय समय के बजाय करीब 22 मिनट बाद फिल्म शुरू होने के मामले में उपभोक्ता अदालत से राहत मिली है। वकील ने आरोप लगाया था कि निर्धारित समय पर फिल्म शुरू करने के बजाय मल्टीप्लेक्स में विज्ञापन चलाए गए, जिससे स्क्रीनिंग में देरी हुई। मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने मल्टीप्लेक्स संचालक को शिकायतकर्ता को ₹75 हजार का भुगतान करने का आदेश दिया।

मामला उस समय सामने आया जब वकील ने हैदराबाद के एक मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने के लिए टिकट खरीदा। टिकट पर स्क्रीनिंग का निर्धारित समय दिया गया था। दर्शक तय समय पर फिल्म देखने के लिए पहुंचे, लेकिन निर्धारित समय पर फिल्म शुरू नहीं हुई। इसके बजाय स्क्रीन पर विज्ञापन और प्रचार सामग्री चलती रही। करीब 22 मिनट की देरी के बाद फिल्म की वास्तविक स्क्रीनिंग शुरू हुई।

वकील ने इस देरी को लेकर उपभोक्ता फोरम का रुख किया। शिकायत में कहा गया कि दर्शक टिकट खरीदकर एक निश्चित समय पर फिल्म देखने की सेवा लेते हैं। ऐसे में टिकट पर दिए गए समय के बाद व्यावसायिक विज्ञापन दिखाकर फिल्म शुरू करने में देरी करना उपभोक्ता को असुविधा पहुंचाता है और इसे सेवा में कमी के तौर पर देखा जाना चाहिए।

शिकायतकर्ता ने यह भी सवाल उठाया कि जब दर्शकों ने फिल्म के लिए भुगतान किया है और टिकट पर शो का समय निर्धारित है, तो उन्हें व्यावसायिक विज्ञापनों के कारण फिल्म शुरू होने का अतिरिक्त इंतजार क्यों करना चाहिए। उनके मुताबिक, फिल्म देखने का अनुभव केवल स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि तय समय पर सेवा उपलब्ध कराना भी उसका हिस्सा है।

मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता फोरम ने शिकायत और स्क्रीनिंग से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार किया। मुख्य सवाल यह था कि क्या टिकट पर दिए गए निर्धारित समय के बाद विज्ञापन चलाकर फिल्म शुरू करने में देरी करना टिकटधारक को दी जाने वाली सेवा में कमी माना जा सकता है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला दिया और मल्टीप्लेक्स संचालक को ₹75 हजार का भुगतान करने का निर्देश दिया। यह राशि शिकायत से जुड़ी राहत और शिकायतकर्ता को हुई बताई गई असुविधा के संदर्भ में निर्धारित की गई।

यह मामला सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले चलने वाले विज्ञापनों की व्यवस्था पर भी ध्यान खींचता है। मल्टीप्लेक्स में आम तौर पर टिकट पर शो का समय दिया जाता है, जबकि वास्तविक फिल्म शुरू होने से पहले विज्ञापन और प्रचार सामग्री दिखाई जाती है। इस वजह से टिकट पर दर्ज शो टाइम और फिल्म के वास्तविक शुरू होने के समय के बीच अंतर पैदा हो सकता है।

सिनेमा संचालकों के लिए प्री-शो विज्ञापन राजस्व का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। हालांकि, इस मामले में उपभोक्ता शिकायत का केंद्र यह था कि व्यावसायिक विज्ञापनों के कारण दर्शकों को निर्धारित समय के बाद भी इंतजार करना पड़ा। यही सवाल उपभोक्ता फोरम के सामने विचार का विषय बना।

उपभोक्ता मामलों में मनोरंजन सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का फैसला मामले के तथ्यों, ग्राहक को दी गई जानकारी, टिकट की शर्तों और उपलब्ध कराई गई सेवा के आधार पर किया जाता है। इसलिए इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि फिल्म शुरू होने से पहले विज्ञापन दिखाने वाले हर मल्टीप्लेक्स को स्वतः मुआवजा देना होगा। किसी भी मामले में राहत का फैसला संबंधित शिकायत और उसके तथ्यों के आधार पर होगा।

इस मामले ने यह भी रेखांकित किया है कि दर्शक टिकट पर दिए गए समय के आधार पर अपनी यात्रा और अन्य कार्यक्रम तय करते हैं। फिल्म शुरू होने में लंबी देरी होने पर उनकी आगे की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। हैदराबाद के इस मामले में करीब 22 मिनट की देरी को लेकर दायर शिकायत के बाद उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता के पक्ष में ₹75 हजार देने का आदेश दिया।

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