नई दिल्ली। डेल्टा कॉर्प और उसकी दो सहायक कंपनियों हाइटस्ट्रीट क्रूजेज तथा डेल्टा प्लेजर क्रूज पर कुल ₹116.43 करोड़ की अंतिम जीएसटी मांग तय की गई है। गोवा के अतिरिक्त केंद्रीय जीएसटी आयुक्त ने 25 सितंबर 2026 को ये आदेश जारी किए। इसके साथ ही केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम की धारा 74 के तहत ₹37.11 करोड़ की पेनल्टी भी लगाई गई है। बकाया कर पर देय तारीख से अंतिम भुगतान तक 18% सालाना की दर से ब्याज भी लागू होगा।
जीएसटी प्राधिकरण ने अलग-अलग कर मुद्दों के आधार पर यह मांग तय की है। इनमें एक हिस्सा एक्शनएबल क्लेम से जुड़ा है, जबकि दूसरा हिस्सा कैसीनो पैकेज की मिश्रित आपूर्ति यानी मिक्स्ड सप्लाई से संबंधित है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक एक्शनएबल क्लेम से जुड़ी अंतरिम जीएसटी मांग ₹79.32 करोड़ है। इसकी गणना कैसीनो में खेले गए कुल दांव के बजाय बेचे गए चिप्स के मूल्य के आधार पर की गई है।
दूसरी ओर, कैसीनो के प्रवेश पैकेज से जुड़ी मिश्रित आपूर्ति पर ₹37.11 करोड़ की अंतरिम जीएसटी मांग तय की गई है। इस मामले में प्राधिकरण ने 28% की कर दर लागू की है। इसी राशि के बराबर यानी ₹37.11 करोड़ की पेनल्टी भी लगाई गई है। इस तरह कुल कर मांग और पेनल्टी को अलग-अलग देखा जाए तो कंपनी समूह पर तत्काल वित्तीय दायित्व और बढ़ गया है।
डेल्टा कॉर्प पहले ही जीएसटी से जुड़े एक्शनएबल क्लेम मामले में वित्तीय प्रावधान कर चुकी है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में ₹200.62 करोड़ का असाधारण प्रावधान दर्ज किया था। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एक्शनएबल क्लेम पर संभावित जीएसटी देनदारी को ध्यान में रखते हुए किया गया था। हालांकि, मिश्रित आपूर्ति से जुड़े मामले में कंपनी ने पहले अलग से प्रावधान नहीं किया था।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
नए आदेश के बाद कंपनी प्रबंधन इन मांगों और पेनल्टी का कानूनी स्तर पर मूल्यांकन कर रहा है। कंपनी ने संकेत दिया है कि वह निर्धारित वैधानिक समयसीमा के भीतर अपील दायर करेगी। अपील की प्रक्रिया के दौरान मांग, पेनल्टी और ब्याज से जुड़े दायित्व पर आगे की स्थिति तय होगी। यदि अपील में राहत नहीं मिलती है तो कंपनी को कर और पेनल्टी के साथ जमा होने वाले ब्याज का भी वित्तीय प्रभाव उठाना पड़ सकता है।
जीएसटी विवाद का यह मामला कैसीनो और रियल-मनी गेमिंग क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे कर निर्धारण विवाद से जुड़ा है। 28% जीएसटी दर और एक्शनएबल क्लेम के मूल्यांकन को लेकर उद्योग में अलग-अलग स्तरों पर विवाद रहा है। सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले के बाद कर देनदारी की गणना के तरीके को लेकर कुछ आधार स्पष्ट हुआ, लेकिन विभिन्न मामलों में संबंधित कर प्राधिकरणों की ओर से पुराने कर वर्षों के नोटिस और अंतिम आदेश जारी किए जा रहे हैं।
डेल्टा कॉर्प के मामले में अब जांच और कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। कंपनी को यह तय करना होगा कि अंतिम आदेश के किन हिस्सों को अपील में चुनौती दी जाए और संभावित वित्तीय प्रभाव को किस तरह दर्ज किया जाए। 18% सालाना ब्याज के कारण बकाया राशि पर समय के साथ अतिरिक्त देनदारी बढ़ती रहेगी, जिससे मामले के जल्द निपटारे का वित्तीय महत्व भी बढ़ जाता है।
कंपनी के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब उसके परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन पर भी निवेशकों की नजर है। कंपनी ने सितंबर में अपनी वार्षिक आम बैठक में ₹0.50 प्रति इक्विटी शेयर के अंतिम लाभांश को मंजूरी दी थी। इससे पहले अगस्त में घोषित वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों में ₹200.62 करोड़ का असाधारण प्रावधान दर्ज किया गया था।
अब ₹116.43 करोड़ की अंतिम जीएसटी मांग, ₹37.11 करोड़ की पेनल्टी और उस पर लागू 18% सालाना ब्याज से जुड़े दायित्व पर कंपनी की अपील और आगे मिलने वाली कानूनी राहत अहम होगी। प्राधिकरण के आदेश से पुराने कर मामलों में देनदारी का एक ठोस आंकड़ा सामने आया है, जबकि अंतिम वित्तीय असर अपील की प्रक्रिया और उसके परिणाम पर निर्भर करेगा।
