नई दिल्ली। गुजरात के ₹11.42 करोड़ के कथित डिजिटल अरेस्ट मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास के रूप में हुई है। जांच एजेंसी ने ऑपरेशन चक्र-VI के तहत 10 राज्यों में 22 स्थानों पर एक साथ तलाशी लेने के बाद यह कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों ने हेक्साक्वेस्ट ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते का इस्तेमाल कथित तौर पर पीड़ित से ठगी गई रकम में से ₹2.5 करोड़ प्राप्त करने के लिए किया था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने रकम प्राप्त करने के बाद उसे अपने साथियों के कई बैंक खातों में स्थानांतरित किया। ऐसा कथित तौर पर पैसों के लेनदेन की कड़ी को छिपाने और रकम को अलग-अलग खातों में फैलाने के लिए किया गया। सीबीआई अब इन खातों और उनमें हुए लेनदेन की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क में रकम के अंतिम लाभार्थियों और संचालकों का पता लगाया जा सके।
सीबीआई के मुताबिक, हिमांशु और यूनिस कथित डिजिटल अरेस्ट और दूसरे साइबर अपराधों से हासिल रकम को ठिकाने लगाने के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल करने के साथ एंड्रॉयड पैकेज किट (APK) फाइलें इंस्टॉल करने की गतिविधियों में भी शामिल थे। तलाशी के दौरान जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों से कई आपत्तिजनक चैट, संदेश और दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
गुजरात में सामने आए इस मामले में साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों और दूरसंचार नियामक संस्था के अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने पीड़ित को करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ऑनलाइन निगरानी में रखा। इस दौरान उसे लगातार डराया-धमकाया गया और अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
जांच के मुताबिक, पीड़ित से कुल ₹11.42 करोड़ की रकम कथित तौर पर सिंडिकेट के नियंत्रण वाले खातों में ट्रांसफर कराई गई। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अपराधी आम तौर पर खुद को पुलिस, जांच एजेंसी, दूरसंचार या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल या अन्य ऑनलाइन माध्यमों से लगातार संपर्क बनाए रखकर उसे घर में रहने, किसी से बात न करने और बताए गए खातों में पैसे भेजने के लिए मजबूर किया जाता है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
सीबीआई ने बताया कि 22 स्थानों पर की गई तलाशी के दौरान बैंकिंग दस्तावेज, बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों समेत कई साक्ष्य जब्त किए गए। एजेंसी के अनुसार, वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर इन ठिकानों की पहचान की गई थी। जब्त सामग्री की फोरेंसिक जांच से कथित साइबर सिंडिकेट के व्यापक वित्तीय और तकनीकी ढांचे का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि हेक्साक्वेस्ट ग्लोबल के खाते में आई ₹2.5 करोड़ की रकम के बाद उसे किन-किन खातों में भेजा गया। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका केवल बैंक खातों के इस्तेमाल तक सीमित थी या वे कथित डिजिटल अरेस्ट गिरोह के दूसरे हिस्सों के संचालन में भी शामिल थे।
सीबीआई के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर ठगी से हासिल रकम के लाभार्थियों, बैंक खातों के संचालकों और नेटवर्क के हैंडलरों की पहचान करना है। एजेंसी का कहना है कि तलाशी के दौरान डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों को सुरक्षित किया गया है, ताकि जांच के दौरान पैसों और आरोपियों के बीच संबंध स्थापित किए जा सकें। एजेंसी बाकी संदिग्ध आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास भी कर रही है।
सीबीआई ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपराधियों और ऐसे नेटवर्क को सुविधा देने वालों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में पिछले 30 दिनों में चार मामलों में 22 राज्यों के 142 ठिकानों पर तलाशी ली गई और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गुजरात के इस मामले में दो और गिरफ्तारियों के बाद अब जांच का फोकस कथित नेटवर्क के बाकी सदस्यों, बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों और रकम के अंतिम प्रवाह पर है। सीबीआई इन कड़ियों की जांच कर यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि ₹11.42 करोड़ की कथित ठगी में किस-किस की क्या भूमिका रही और रकम को किन माध्यमों से आगे स्थानांतरित किया गया।
