बेंगलुरु में फार्महाउस से करीब ₹5 करोड़ की नकली दवाएं और अन्य सामान बरामद होने के बाद एसआईटी की कार्रवाई; मामले में अब तक सात गिरफ्तार

फर्जी दवाओं के नेटवर्क का कथित सरगना दुबई से लौटते ही एयरपोर्ट पर पकड़ा गया

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By Roopa
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बेंगलुरु। फर्जी दवाओं के कथित नेटवर्क के सरगना 36 वर्षीय प्रशांत रंजन को कर्नाटक विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सोमवार सुबह केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से हिरासत में लिया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, रंजन दुबई से उड़ान के जरिए बेंगलुरु पहुंचा था। एयरपोर्ट के प्रवेश द्वार पर सुबह करीब 5:40 बजे एसआईटी की टीम ने उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए ले गई।

जांच अधिकारियों के अनुसार, रंजन करीब डेढ़ महीने से कथित तौर पर फरार था। उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि उसे अदालत में पेश किया जाएगा और आगे पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की संभावना है। जांच टीम अब नेटवर्क के संचालन, इसमें शामिल लोगों और कथित तौर पर नकली दवाओं की खरीद, निर्माण तथा वितरण से जुड़े लिंक की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।

एसआईटी को संदेह है कि प्रशांत रंजन बेंगलुरु दक्षिण जिले के तवरेकेरे थाना क्षेत्र के डोड्डेरी में सामने आए कथित फर्जी दवा नेटवर्क का मुख्य आरोपी हो सकता है। उसकी गिरफ्तारी से जांचकर्ताओं को नेटवर्क के संचालन और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में मदद मिलने की उम्मीद है। रंजन को इससे पहले अजरबैजान में भी ट्रेस किए जाने की बात सामने आई थी, जहां पासपोर्ट और वीजा से जुड़े मामलों में स्थानीय अधिकारियों ने उसे कथित तौर पर हिरासत में लिया था।

इस मामले में एसआईटी अब तक सात लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें रंजन का करीबी सहयोगी और फार्मेसी संचालक वीरेश कुमार जैन भी शामिल है। जांच एजेंसी आरोपियों के बीच संबंध, कथित लेनदेन और नकली दवाओं की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क की कड़ियों की पड़ताल कर रही है।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

फर्जी दवाओं के इस कथित बड़े नेटवर्क का खुलासा 18 अगस्त 2026 को हुआ था। तवरेकेरे पुलिस और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने डोड्डेरी इलाके में स्थित फार्महाउसों पर कार्रवाई की थी। तलाशी के दौरान कथित तौर पर नकली और घटिया दवाओं के साथ अन्य सामान बरामद किया गया था। बरामद सामग्री का कुल अनुमानित मूल्य करीब ₹5 करोड़ बताया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए 20 अगस्त को विशेष जांच दल का गठन किया गया। इसके बाद एसआईटी ने नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान, फार्महाउसों के इस्तेमाल, दवाओं की आवाजाही और कथित वितरण व्यवस्था की जांच शुरू की। जांच का दायरा अब उन लोगों तक भी बढ़ाया जा रहा है, जिन्होंने कथित तौर पर इस नेटवर्क के लिए वित्तीय या लॉजिस्टिक मदद उपलब्ध कराई हो सकती है।

जांचकर्ताओं के सामने अब मुख्य चुनौती यह पता लगाना है कि नकली दवाओं की कथित आपूर्ति व्यवस्था कितनी व्यापक थी और इसमें कितने लोग शामिल थे। इसके अलावा, बरामद दवाओं को कहां तैयार किया जाता था, उनका कच्चा माल या पैकेजिंग कहां से आती थी और किन स्थानों पर उनकी आपूर्ति की जाती थी, इसकी भी जांच की जा रही है।

एसआईटी रंजन से पूछताछ के जरिए नेटवर्क में उसकी कथित भूमिका और अन्य आरोपियों के साथ उसके संबंधों की जानकारी जुटाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ से मामले में सामने आए अन्य आरोपियों की भूमिका तथा नेटवर्क के संचालन से जुड़े नए सुराग मिल सकते हैं। हालांकि, जांच पूरी होने तक आरोपियों की भूमिका और आरोपों की पुष्टि अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

पुलिस और औषधि प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई में करीब ₹5 करोड़ मूल्य की कथित नकली दवाओं और अन्य सामान की बरामदगी के बाद यह मामला राज्य में नकली दवा कारोबार के खिलाफ बड़ी जांच में बदल गया है। एसआईटी अब नेटवर्क के पूरे ढांचे और इससे जुड़े सभी संभावित लोगों की भूमिका स्थापित करने में जुटी है।

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