बदायूं। अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड समेत पांच चिटफंड कंपनियां संचालित कर बरेली, बदायूं, पीलीभीत समेत कई जिलों के निवेशकों से करीब ₹800 करोड़ की कथित ठगी के मामले में जेल में बंद सगे भाइयों शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य को अदालत से फिलहाल राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने दोनों की जमानत अर्जियां अभियोजन पक्ष के विरोध और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए खारिज कर दीं। जमानत नहीं मिलने के बाद दोनों आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे।
पुलिस के अनुसार, दोनों भाइयों ने अलग-अलग नामों से संचालित चिटफंड कंपनियों के जरिये लोगों को निवेश के लिए आकर्षित किया। आरोप है कि निवेशकों से विभिन्न योजनाओं के तहत रकम जमा कराई गई। बड़ी संख्या में लोगों ने कंपनियों में अपनी बचत और निवेश की राशि लगाई, लेकिन बाद में तय समय पर रकम वापस नहीं मिलने की शिकायतें सामने आने लगीं। इसके बाद मामले में पुलिस स्तर पर जांच शुरू की गई और कंपनियों के संचालन तथा उनसे जुड़े वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की गई।
जांच में कंपनियों के दस्तावेज, निवेशकों से जमा कराई गई रकम और धनराशि के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। पुलिस ने कंपनियों के संचालन से जुड़े लोगों, निवेशकों और उपलब्ध अभिलेखों से संबंधित जानकारी जुटाई। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य के खिलाफ कार्रवाई की गई। दोनों भाइयों को मामले में गिरफ्तार किए जाने के बाद अदालत में पेश किया गया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों को राहत देने की मांग की। उनकी ओर से अदालत में जमानत के पक्ष में दलीलें रखी गईं। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, आरोपों की गंभीरता और निवेशकों से कथित तौर पर जुटाई गई बड़ी रकम का हवाला देते हुए दोनों को जमानत नहीं देने का अनुरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद सीजेएम अदालत ने दोनों आरोपियों की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। अदालत के इस आदेश के बाद शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। मामले की आगे की सुनवाई और जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।
कई जिलों में निवेशकों से रकम जुटाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, मामला बदायूं के अलावा आसपास के कई जिलों से जुड़े निवेशकों तक फैला हुआ है। अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड समेत पांच कंपनियों के जरिये बरेली, बदायूं और पीलीभीत सहित कई क्षेत्रों में लोगों से निवेश के नाम पर रकम जमा कराने का आरोप है। शिकायतों के बाद पुलिस ने कंपनियों की गतिविधियों और निवेशकों की रकम से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
₹800 करोड़ की कथित ठगी का आंकड़ा जांच में सामने आए आरोपों से संबंधित है। पुलिस की जांच में निवेशकों से जुटाई गई रकम, कंपनियों के खातों और अन्य वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और निवेशकों को हुए वास्तविक नुकसान की विस्तृत तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
लगातार जमानत के प्रयास
शशिकांत मौर्य और सूर्यकांत मौर्य की ओर से जेल से बाहर आने के लिए लगातार कानूनी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले भी दोनों के खिलाफ निवेशकों से कथित धोखाधड़ी और चिटफंड कंपनियों के संचालन से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि, सीजेएम अदालत से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद दोनों को फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहना होगा। मामले में पुलिस की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
