मुंबई। मुंबई साइबर पुलिस ने 68 वर्षीय दहिसर निवासी से कथित तौर पर ₹1.12 करोड़ की ठगी के मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में IIT दिल्ली से स्नातक एक वेब डेवलपर और एक निजी बैंक का ऑपरेशन मैनेजर भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने टेलीकॉम विभाग, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर बुजुर्ग को डराया और दावा किया कि उनका नाम ₹238 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। इसके बाद गिरफ्तारी का भय दिखाकर कथित तौर पर उनसे रकम ट्रांसफर कराई गई।
पुलिस के अनुसार, ठगी की शुरुआत 30 जुलाई को हुई और 12 अगस्त तक अलग-अलग चरणों में पीड़ित से रकम ली गई। आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि उनके बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच चल रही है। उन्हें बताया गया कि यदि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है और उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक कार्रवाई होगी।
जांच के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के नाम से तैयार किया गया एक फर्जी नोटिस भी पीड़ित को दिखाया। इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें लगातार संपर्क में रखा गया। पुलिस का आरोप है कि इसी तरीके से पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने का विश्वास दिलाया गया और लंबे समय तक मानसिक दबाव बनाकर रखा गया। इस दौरान उनसे अलग-अलग खातों में पैसे भेजने को कहा गया।
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साइबर पुलिस ने जब रकम के लेनदेन की जांच शुरू की तो सबसे पहले उस बैंक खाते का पता लगाया, जिसमें ठगी की रकम का एक हिस्सा पहुंचा था। इस खाते की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल में ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो कथित तौर पर साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए बैंक खाते तथा सिम कार्ड उपलब्ध कराता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क में शामिल एक आरोपी रकम की वसूली के लिए अपने साथियों के साथ दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बिजनौर तक गया था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन यात्राओं के दौरान किससे संपर्क किया गया और कथित तौर पर ठगी की रकम को आगे किस तरह स्थानांतरित किया गया।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 20 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप बरामद किए हैं। इसके अलावा 25 बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज, एटीएम कार्ड, पासबुक और आधार कार्ड भी जब्त किए गए हैं। पुलिस इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और अलग-अलग बैंक खातों के इस्तेमाल का पता लगाया जा सके।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में एक आरोपी के खिलाफ 2021 में बांद्रा थाने में भी मामला दर्ज हुआ था। साइबर पुलिस अब पुराने मामले और मौजूदा जांच के बीच किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल कर रही है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट के ऐसे मामलों में ठग खुद को सरकारी विभागों, पुलिस, जांच एजेंसियों या अदालत से जुड़ा अधिकारी बताकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल, फर्जी दस्तावेज और लगातार निगरानी जैसे तरीकों से पीड़ित पर दबाव बनाया जाता है। मुंबई मामले में भी पुलिस को इसी तरह की कार्यप्रणाली के इस्तेमाल का आरोप मिला है।
फिलहाल पुलिस बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक खातों और सिम कार्ड से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना है कि ₹1.12 करोड़ की कथित ठगी की रकम किन-किन खातों से होकर गुजरी और इस नेटवर्क का इस्तेमाल अन्य साइबर अपराधों में भी किया गया था या नहीं।
