SEBI ने Kore Digital के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक प्रतिभूति पेशकश से नया फंड जुटाने पर रोक लगाई है और ₹541.3 करोड़ के कथित राजस्व की जांच शुरू की है।

SEBI का Kore Digital पर बड़ा एक्शन, पूंजी बाजार से फंड जुटाने पर रोक; खातों में हेरफेर के आरोप

Team The420
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मुंबई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने दूरसंचार बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनी Kore Digital Ltd और उसके तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। नियामक ने कंपनी को सार्वजनिक प्रतिभूति पेशकश के जरिए नया धन जुटाने से रोक दिया है। साथ ही तीनों वरिष्ठ अधिकारियों को आगे के आदेश तक कंपनी की प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री या प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से उनमें किसी भी तरह का कारोबार करने से प्रतिबंधित किया गया है।

SEBI का यह आदेश 17 सितंबर को जारी किया गया। नियामक ने कहा कि उसकी प्रारंभिक जांच में कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड और खुलासों में कथित हेरफेर के प्रथमदृष्टया संकेत मिले हैं। आदेश के अनुसार, कंपनी और संबंधित पक्षों को आदेश प्राप्त होने के 21 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने और व्यक्तिगत सुनवाई का अनुरोध करने का अधिकार है। SEBI ने स्पष्ट किया है कि ये निष्कर्ष प्रथमदृष्टया हैं और मामले की विस्तृत जांच आगे जारी रहेगी।

नियामक ने कंपनी के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की तारीख से लेकर 31 मार्च 2026 तक के खातों की फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश भी दिया है। SEBI ने कंपनी को अपने वित्तीय विवरण, संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन और सूचीबद्धता नियमों के तहत जरूरी अन्य जानकारियों का सही और निष्पक्ष खुलासा सुनिश्चित करने को कहा है। मामले की जानकारी राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण को भी भेजी गई है, ताकि कंपनी के ऑडिट से जुड़े पहलुओं की आवश्यकता के अनुसार जांच की जा सके।

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SEBI की प्रारंभिक जांच के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान कंपनी के वित्तीय विवरणों में कथित तौर पर ऐसी प्रविष्टियां की गईं, जिनसे राजस्व और वित्तीय प्रदर्शन की तस्वीर वास्तविक स्थिति से अलग दिखाई दे सकती थी। नियामक ने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025 और 2026 में कंपनी की तीन सहायक कंपनियों तथा उनसे जुड़ी आगे की सहायक कंपनियों की वास्तविकता पर सवाल उठे हैं।

SEBI के मुताबिक, इन इकाइयों से जुड़े लेनदेन के कारण करीब ₹541.3 करोड़ का राजस्व कथित तौर पर गलत तरीके से दर्ज किया गया। यह राशि दोनों वित्त वर्षों में कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 73 प्रतिशत बताई गई है। नियामक ने यह भी कहा कि स्थल निरीक्षण के दौरान कुछ सहायक और आगे की सहायक कंपनियां अपने बताए गए पते पर मौजूद नहीं मिलीं।

जांच में एक अन्य इकाई से जुड़े लेनदेन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। SEBI ने कहा कि कुछ लेनदेन गैर-वास्तविक संस्थाओं से जुड़े होने के प्रथमदृष्टया संकेत मिले। इसके अलावा कंपनी के स्वतंत्र राजस्व में करीब ₹31.49 करोड़ की वृद्धि से जुड़े कुछ लेनदेन और एक अन्य परियोजना से जुड़े ₹26.42 करोड़ के लेनदेन को भी नियामक ने जांच के दायरे में रखा है।

नियामक ने मार्च 2024 में कंपनी द्वारा जारी किए गए प्राथमिकता शेयर आवंटन से मिली रकम के इस्तेमाल की भी जांच की। SEBI के अनुसार, इस रकम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा दो संस्थाओं की ओर कथित तौर पर स्थानांतरित किया गया, जिनके बारे में प्रारंभिक जांच में गैर-वास्तविक होने के संकेत मिले। नियामक ने इन लेनदेन और संबंधित कंपनियों की वास्तविक कारोबारी गतिविधियों की जांच का निर्देश दिया है।

इसके अलावा SEBI ने कहा कि कंपनी की ओर से किए गए कुछ कथित गलत कॉरपोरेट खुलासों का शेयर कीमत में तेज बढ़ोतरी से संबंध होने की भी जांच की जा रही है। नियामक ने राष्ट्रीय शेयर बाजार को भी निर्देश दिया है कि SEBI की अनुमति के बिना Kore Digital को SME मंच से मुख्य बोर्ड में स्थानांतरित करने की अनुमति न दी जाए।

SEBI ने कहा है कि फोरेंसिक ऑडिट और विस्तृत जांच के बाद ही मामले के अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे। कंपनी और संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। इसलिए मौजूदा आदेश में दर्ज आरोपों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना गया है।

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