सहारनपुर में ₹20 के नकली सिक्कों के कथित नेटवर्क की जांच में आरोपियों द्वारा Signal App के जरिए संपर्क रखने की जानकारी सामने आई है।

सामान्य कॉल से बचते थे नकली सिक्कों के सौदागर, सिग्नल एप से चलाते थे नेटवर्क

Team The420
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सहारनपुर। ₹20 के नकली सिक्के तैयार कर बाजार में खपाने वाले गिरोह के सदस्य सामान्य मोबाइल कॉल के बजाय सिग्नल एप के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि बातचीत की निगरानी और रिकॉर्डिंग से बचने के लिए गिरोह ने इंटरनेट आधारित कॉल और संदेशों का सहारा लिया। अब बरामद मोबाइल फोन की जांच के जरिए नकली सिक्कों की तैयारी, आपूर्ति और लेनदेन से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

शहर कोतवाली, एसओजी और सर्विलांस टीम ने नकली सिक्के तैयार कर उन्हें बाजार में चलाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपी पंजाब, सहारनपुर और बिहार से जुड़े बताए गए हैं। उनके कब्जे से मोबाइल फोन के अलावा सात रजिस्टर बरामद किए गए थे। इन रजिस्टरों में नकली सिक्कों की आपूर्ति और लेनदेन से संबंधित हिसाब-किताब दर्ज होने की बात सामने आई थी।

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बरामद मोबाइल फोन और रजिस्टरों की जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के संचार के तरीके का पता चला। जांच में सामने आया कि आरोपी सामान्य मोबाइल नंबरों से बातचीत करने के बजाय सिग्नल एप का इस्तेमाल करते थे। बड़ी संख्या में बातचीत इसी माध्यम से होने के संकेत मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि सिक्कों की तैयारी, उनकी आपूर्ति, रकम के लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी भी इसी माध्यम से साझा की जाती थी।

इंटरनेट आधारित कॉल सामान्य मोबाइल कॉल की तरह दूरसंचार कंपनी के पारंपरिक कॉल रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होती। इसी वजह से गिरोह के सदस्यों ने सामान्य कॉल के बजाय सिग्नल एप को संपर्क का माध्यम बनाया होगा, इसकी भी जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस डिजिटल उपकरणों में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों और संपर्कों के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

जांच में करीब ₹70 करोड़ के नकली सिक्कों की खेप को बाजार तक पहुंचाने वाले एजेंटों की भूमिका भी सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली सिक्के किन लोगों तक पहुंचाए गए, किन इलाकों में उन्हें खपाया गया और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

मोबाइल फोन से खुलेंगे नेटवर्क के राज

गिरोह के पास से मिले मोबाइल फोन अब जांच का अहम आधार बन गए हैं। इनमें मौजूद सिग्नल एप से संबंधित उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, संपर्कों और अन्य सामग्री की पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरफ्तार आरोपियों का किन लोगों से नियमित संपर्क था और किन नंबरों या खातों के जरिए नकली सिक्कों की आपूर्ति और भुगतान की व्यवस्था चल रही थी।

फरार लोगों की तलाश भी जारी है। पुलिस टीम संभावित ठिकानों पर दबिश देकर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद नकली सिक्कों की आपूर्ति श्रृंखला और बाजार में उन्हें खपाने वाले लोगों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है।

क्या है सिग्नल एप

सिग्नल एक संदेश और इंटरनेट कॉलिंग एप है, जिसमें संदेश और कॉल एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहते हैं। इसका मतलब है कि सामान्य स्थिति में बातचीत की सामग्री को केवल संबंधित प्रेषक और प्राप्तकर्ता ही देख या सुन सकते हैं। इसी तरह के सुरक्षित संचार माध्यम का इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया जाना अपने आप में एप की प्रकृति नहीं, बल्कि उसके दुरुपयोग का मामला है। पुलिस अब यह जांच रही है कि गिरोह ने इसका इस्तेमाल किस तरह और किन गतिविधियों के लिए किया था।

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