लखनऊ। रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) के दो अधिकारियों और एक निजी कंपनी के दो प्रतिनिधियों को कथित तौर पर ₹4 लाख की घूस के लेनदेन के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरडीएसओ के अधिकारियों ने निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर फैक्ट्री में लगी मशीनरी और प्लांट के निरीक्षण के बाद अनुकूल रिपोर्ट जारी करने के बदले ₹4 लाख की रकम मांगी थी। शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने जाल बिछाया और चारों को कथित तौर पर घूस लेते हुए हावड़ा के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए लोगों में आरडीएसओ के डिप्टी डायरेक्टर और सीनियर सेक्शन इंजीनियर के अलावा कोलकाता की एक निजी कंपनी के दो प्रतिनिधि शामिल हैं। मामले में सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच एजेंसी के मुताबिक, रिश्वत की रकम के लेनदेन को लेकर मिली शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई।
आरोप है कि निजी कंपनी की फैक्ट्री में लगी मशीनरी और प्लांट का निरीक्षण आरडीएसओ के अधिकारियों को करना था। निरीक्षण के बाद कंपनी के पक्ष में अनुकूल रिपोर्ट जारी करने के लिए कथित तौर पर ₹4 लाख की मांग की गई। शिकायत के सत्यापन के बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद अधिकारियों और कंपनी के प्रतिनिधियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और हावड़ा के एक होटल में कथित लेनदेन के दौरान चारों को पकड़ लिया गया।
FCRF Launches India-Focused BFSI Compliance Certification for Emerging Governance Professionals
कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने ₹4.73 लाख की नकदी भी बरामद की है। बरामद रकम को जब्त कर लिया गया है। जांच की जा रही है कि बरामद नकदी में कथित रिश्वत की रकम के अलावा कोई अन्य रकम भी शामिल थी या नहीं और उसका स्रोत क्या है।
मामले की जांच अब कथित रिश्वत के लेनदेन से आगे बढ़ाकर पूरे दस्तावेजी और वित्तीय नेटवर्क तक की जा रही है। जांच एजेंसी की कोलकाता टीमों ने आरोपियों से जुड़े लखनऊ, कोलकाता और बिहार के चंपारण व कैमूर स्थित विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए जाने की बात कही गई है।
जांच एजेंसी अब बरामद दस्तावेजों और डिजिटल सामग्री की पड़ताल कर रही है। इनमें अधिकारियों और निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच संपर्क, निरीक्षण से जुड़े रिकॉर्ड, रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया और कथित भुगतान से संबंधित जानकारी मिलने की संभावना है। डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा की जांच के जरिए यह भी पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि इस मामले में केवल एक निरीक्षण और एक भुगतान तक मामला सीमित था या इससे पहले भी इसी तरह के लेनदेन हुए थे।
आरडीएसओ रेलवे से जुड़ी तकनीकी मानकों और अनुसंधान गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला संगठन है। ऐसे में किसी निरीक्षण रिपोर्ट को अनुकूल बनाने के बदले कथित रिश्वत मांगने का आरोप जांच का गंभीर विषय है। जांच एजेंसी अब यह भी देख रही है कि संबंधित फैक्ट्री की मशीनरी और प्लांट का वास्तविक निरीक्षण कब और किस प्रक्रिया के तहत हुआ था तथा तैयार की गई रिपोर्ट में किन तथ्यों को शामिल किया गया।
प्राथमिकी और बरामद सामग्री के आधार पर आगे की जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर हुई, रकम के लेनदेन में किन लोगों की भूमिका थी और क्या निरीक्षण रिपोर्ट को प्रभावित करने के लिए किसी तरह का दबाव या साठगांठ की गई थी। जांच एजेंसी ने सभी आरोपों और बरामद साक्ष्यों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
