नई दिल्ली। महाराष्ट्र में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त कार्यालय से जुड़े एक अधीक्षक और सीजीएसटी कंसल्टेंट को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दोनों आरोपियों को ₹10 लाख की रिश्वत की पहली किश्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। आरोप है कि दोनों ने एक रियल एस्टेट कंपनी से कुल ₹1 करोड़ की रिश्वत मांगी थी।
मामला महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के न्यू पनवेल स्थित सेक्टर-17 का है, जहां एक रियल एस्टेट कंपनी दो इमारतों के पुनर्विकास का काम कर रही थी। इन इमारतों में सीजीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्त, रायगढ़ के मालिकाना हक वाले 24 फ्लैट भी शामिल थे। पुनर्विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए इन विभागीय फ्लैटों को कंपनी को सौंपने से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) की जरूरत थी।
आरोप है कि सीजीएसटी कार्यालय में तैनात अधीक्षक पंकज कुमार ने एनओसी जारी करने के बदले रियल एस्टेट कंपनी से ₹1 करोड़ की रिश्वत मांगी। कंपनी के प्रोजेक्ट हेड ने बुधवार को इस संबंध में सीबीआई से शिकायत की थी। शिकायत में रिश्वत की मांग और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया से जुड़े आरोप लगाए गए थे।
शिकायत के अनुसार, रिश्वत की रकम को अलग-अलग हिस्सों में लेने की मांग की गई थी। सीबीआई के मुताबिक, आरोपी अधीक्षक ने ₹10 लाख नकद देने के अलावा अपने द्वारा खरीदे गए एक फ्लैट के डाउन पेमेंट के लिए ₹20 लाख का भुगतान करने को कहा था। इसके साथ ही नई दिल्ली में तैनात कुछ अधिकारियों के लिए ₹70 लाख देने की कथित मांग भी की गई थी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने आरोपों की जांच की और जाल बिछाया। तय योजना के तहत जैसे ही रिश्वत की पहली किश्त के रूप में ₹10 लाख दिए गए, जांच टीम ने अधीक्षक पंकज कुमार और सीजीएसटी कंसल्टेंट को पकड़ लिया। दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
सीबीआई अब मामले में रिश्वत की कथित मांग और उसके बंटवारे से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर मांगी गई ₹1 करोड़ की रकम में किन-किन लोगों की भूमिका थी और क्या अन्य अधिकारी भी इस पूरे मामले से जुड़े थे।
मामले में आगे की कार्रवाई के तहत आरोपियों से पूछताछ और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। सीबीआई यह भी जांच करेगी कि न्यू पनवेल स्थित विभागीय फ्लैटों के पुनर्विकास और एनओसी जारी करने की प्रक्रिया में नियमों का किस स्तर तक पालन किया गया था।
