ग्रेटर नोएडा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोहों के लिए लगातार इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में पुलिस ने ऐसे कम से कम नौ फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है, जहां से अमेरिका, कनाडा समेत अन्य देशों के नागरिकों को फोन कर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही थी। इन मामलों में अब तक 243 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जांच में सामने आया कि इन गिरोहों ने ठगी के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। कहीं विदेशी नागरिकों को तकनीकी सहायता देने वाली निजी कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर संपर्क किया गया तो कहीं सरकारी अधिकारी बनकर डराया गया। कुछ गिरोहों ने सस्ते लोन और आकर्षक गिफ्ट वाउचर का लालच देकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम वसूली। कॉल सेंटरों में बाकायदा कंप्यूटर, लैपटॉप, हाई-स्पीड इंटरनेट, हेडफोन और आधुनिक कॉलिंग सिस्टम लगाए गए थे, ताकि विदेशों में बैठे लोगों से लगातार संपर्क किया जा सके।
इन फर्जी कॉल सेंटरों में काम करने का तरीका देखने में सामान्य कारोबारी प्रतिष्ठानों जैसा रखा जाता था। युवाओं की भर्ती की जाती और उन्हें विदेशी नागरिकों से बातचीत के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। अंग्रेजी बोलने और कंप्यूटर चलाने में दक्ष युवाओं को बेहतर वेतन का लालच देकर कॉलिंग का काम दिया जाता था। इसके बाद उन्हें अलग-अलग तरह की तैयार पटकथा के आधार पर विदेशी नागरिकों से बातचीत करने और उन्हें भुगतान के लिए तैयार करने का काम सौंपा जाता था।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बड़ी संख्या में व्यावसायिक और किराये की इमारतें, तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी पृष्ठभूमि वाले युवाओं की उपलब्धता और दिल्ली-एनसीआर से बेहतर संपर्क इन गिरोहों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करते हैं। किराये की जगहों पर कुछ समय के लिए कार्यालय बनाकर कॉल सेंटर संचालित किए जाते हैं और कार्रवाई का खतरा बढ़ने पर ठिकाना बदलने की कोशिश की जाती है।
जनवरी 2024 में सेक्टर-59 में एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा हुआ था। यहां से विदेशी नागरिकों को निजी कंपनियों का प्रतिनिधि बनकर फोन किए जाने की बात सामने आई थी। कार्रवाई के दौरान 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में कॉल सेंटर के संचालन और विदेशों में किए जा रहे संपर्कों से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य भी जुटाए गए थे।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जुलाई 2025 में जेपी कॉसमोस क्षेत्र में संचालित एक अन्य फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा गया। आरोप है कि यहां अमेरिका समेत अन्य देशों के नागरिकों को सस्ते लोन और गिफ्ट वाउचर का झांसा दिया जाता था। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम वसूली जाती थी। मामले में 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी।
सितंबर 2026 में सेक्टर-142 क्षेत्र में भी फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया गया। यहां अमेरिकी नागरिकों को कथित तौर पर बड़े पैमाने पर ठगी का निशाना बनाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
इसी महीने फेज-1 क्षेत्र में सेक्टर-3 की एक किराये की इमारत में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भी खुलासा हुआ। कार्रवाई के दौरान सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच में इस केंद्र से विदेशी नागरिकों को फोन किए जाने और उन्हें अलग-अलग तरीकों से कथित तौर पर ठगी के जाल में फंसाने की जानकारी सामने आई।
लगातार हो रही कार्रवाइयों के बावजूद नए फर्जी कॉल सेंटरों का सामने आना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। गिरोह पुराने ठिकानों और तरीकों को छोड़कर नए स्थानों तथा नई पहचान के साथ दोबारा सक्रिय होने की कोशिश करते हैं। विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले इन नेटवर्कों में स्थानीय स्तर पर कॉल करने वालों से लेकर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने और रकम को आगे पहुंचाने वालों तक कई स्तर होने की आशंका है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, फर्जी कॉल सेंटर आधारित ठगी केवल कॉल करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके पीछे तकनीकी ढांचा, डाटा उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क, भुगतान की व्यवस्था और रकम को अलग-अलग खातों में पहुंचाने वाली कड़ियां भी हो सकती हैं। ऐसे मामलों में कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण, बैंकिंग लेनदेन और कर्मचारियों की भूमिका की एक साथ जांच करना जरूरी है। विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के साथ उनके पूरे आर्थिक नेटवर्क को तोड़ना भी महत्वपूर्ण है।
तीन वर्षों में नौ फर्जी कॉल सेंटरों का खुलासा और 243 गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा में विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाला साइबर ठगी का नेटवर्क लगातार सक्रिय रहा है। आने वाले समय में ऐसे गिरोहों पर निगरानी के लिए किराये की व्यावसायिक जगहों, संदिग्ध कॉलिंग गतिविधियों और बड़े पैमाने पर संचालित इंटरनेट आधारित केंद्रों की जांच अहम भूमिका निभा सकती है।
