बदायूं। जरीफनगर थाने में तैनात एक सिपाही पर केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (CEIR) पोर्टल की आईडी और पासवर्ड साझा कर गुम मोबाइल फोन की जानकारी के जरिए वसूली कराने का आरोप लगा है। आरोप है कि कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे सिपाही जावेद ने पोर्टल का आईडी-पासवर्ड जनसेवा केंद्र संचालक प्रेमपाल को दे दिया था। इसके बाद प्रेमपाल और उसका साथी रंजीत गुम मोबाइल की लोकेशन पता कर लोगों से वसूली करते थे। मामले का खुलासा होने के बाद सिपाही समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सिपाही को निलंबित भी कर दिया गया है।
मामला उस समय सामने आया जब हरीश बाबू का मोबाइल फोन खो गया। उन्होंने प्रेमपाल उर्फ बंटी के जनसेवा केंद्र से मोबाइल गुम होने की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। चार सितंबर को प्रेमपाल के साथी रंजीत ने उन्हें बताया कि मोबाइल फोन मिल गया है और उसकी सुपुर्दगी के लिए ₹4,000 देने होंगे। आरोप है कि हरीश ने रुपये देने से इनकार किया तो रंजीत ने पुलिस कार्रवाई की धमकी दी।
बाद में प्रेमपाल ने भी उनसे रकम की मांग दोहराई। दबाव में आकर हरीश ने रुपये दे दिए। बातचीत के दौरान प्रेमपाल ने कथित तौर पर बताया कि उसे गुम मोबाइल से संबंधित जानकारी थाने में कंप्यूटर ऑपरेटर सिपाही जावेद से मिलती है। इसके बाद मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से की गई, जिस पर जांच शुरू हुई।
जांच में सामने आया कि सिपाही जावेद ने CEIR पोर्टल की आईडी और पासवर्ड प्रेमपाल को उपलब्ध कराया था। पोर्टल पर मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद गुम फोन से जुड़ी लोकेशन और अन्य जानकारी हासिल की जा सकती थी। आरोप है कि इसी सुविधा का इस्तेमाल प्रेमपाल और रंजीत ने वसूली के लिए शुरू कर दिया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
मोबाइल चलाने वाले को चोरी का फोन बताकर धमकाते
आरोप है कि प्रेमपाल CEIR पोर्टल से पता करता था कि गुम मोबाइल आसपास के किस गांव में और कौन व्यक्ति चला रहा है। इसके बाद वह रंजीत को संबंधित व्यक्ति के पास भेजता था। रंजीत कथित तौर पर उसे धमकाता था कि चोरी का मोबाइल फोन चलाने पर उसे जेल भेज दिया जाएगा। पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर उससे रकम वसूली जाती थी।
इसके बाद उसी व्यक्ति से मोबाइल बरामद कर लिया जाता था और फोन सिपाही जावेद तक पहुंचाया जाता था। यानी एक ही मोबाइल को लेकर दो स्तर पर वसूली का आरोप है। पहले गुम मोबाइल चलाने वाले व्यक्ति से उसे चोरी का फोन बताकर रकम ली जाती थी और फिर वास्तविक मोबाइल मालिक से फोन की सुपुर्दगी के बदले पैसे मांगे जाते थे।
50 प्रतिशत रकम सिपाही तक पहुंचने का आरोप
जांच में वसूली की रकम के बंटवारे की बात भी सामने आई है। आरोप है कि वसूली से मिली कुल रकम का 50 प्रतिशत हिस्सा सिपाही जावेद तक पहुंचाया जाता था। बाकी रकम प्रेमपाल और रंजीत आपस में बांट लेते थे। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितने मोबाइल फोन की जानकारी हासिल की गई और कितने लोगों से वसूली की गई।
सिपाही निलंबित, तीन के खिलाफ प्राथमिकी
मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने सिपाही जावेद को निलंबित कर दिया है। उसके साथ जनसेवा केंद्र संचालक प्रेमपाल और उसके साथी रंजीत के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच में CEIR पोर्टल के इस्तेमाल, मोबाइल फोन की बरामदगी और कथित वसूली से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पोर्टल की गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था और इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
