अहमदाबाद। गुजरात के साणंद में साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है, जहां एक चावल मिल के अकाउंटेंट को उसके मालिक के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर कथित तौर पर ₹80 लाख का भुगतान करा दिया गया। ठग ने पहले अकाउंटेंट के मोबाइल फोन को कथित रूप से हैक किया और फिर कारोबारी के व्हाट्सऐप खाते जैसी पहचान बनाकर रकम दूसरे बैंक खाते में भेजने के निर्देश दिए। ठगी का खुलासा तब हुआ, जब आरोपी ने अकाउंटेंट से 30 लाख रुपये और जुटाने को कहा।
पुलिस के अनुसार, साणंद निवासी 40 वर्षीय प्रदीप दिलीपभाई रमवाणी चावल मिल चलाते हैं और उनका मुख्य कार्यालय अहमदाबाद में है। उन्होंने अपनी फैक्टरी के कामकाज के लिए जयेश नामक व्यक्ति को अकाउंटेंट के रूप में नियुक्त किया था। रोजमर्रा के वित्तीय लेनदेन और भुगतान संबंधी काम में अकाउंटेंट की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
शिकायत के अनुसार, 31 अगस्त को एक अज्ञात व्यक्ति की ओर से जयेश के मोबाइल फोन पर एक फाइल भेजी गई। उसने फाइल खोल दी, जिसके बाद उसका मोबाइल फोन कथित तौर पर साइबर अपराधी के नियंत्रण में चला गया। आरोपी ने फोन में मौजूद संपर्क सूची के साथ छेड़छाड़ करते हुए प्रदीप का वास्तविक मोबाइल नंबर हटा दिया और उसकी जगह अपना नंबर उसी नाम से सेव कर दिया।
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इतना ही नहीं, आरोपी ने कारोबारी की व्हाट्सऐप प्रोफाइल तस्वीर भी अपने नंबर पर लगा ली। इससे अकाउंटेंट को यह विश्वास हो गया कि वह अपने नियोक्ता से ही बातचीत कर रहा है। इसके बाद आरोपी ने कारोबारी की पहचान का इस्तेमाल करते हुए जयेश को व्हाट्सऐप संदेश भेजे और दूसरे बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए।
अकाउंटेंट को संदेशों पर संदेह नहीं हुआ और उसने उन्हें अपने मालिक के निर्देश मानकर अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल ₹80 लाख दूसरे बैंक खाते में भेज दिए। इन भुगतानों के बारे में वास्तविक कारोबारी को कोई जानकारी नहीं थी। ठग ने कथित तौर पर कारोबारी की पहचान और उसके साथ काम करने वाले कर्मचारी के बीच मौजूद भरोसे का फायदा उठाया।
ठगी का सिलसिला तब सामने आया, जब आरोपी ने जयेश से और 30 लाख रुपये की व्यवस्था करने को कहा। पहले ही बड़ी रकम ट्रांसफर कर चुके अकाउंटेंट ने इस अतिरिक्त भुगतान के बारे में सीधे प्रदीप से बात करने का फैसला किया। वह उनसे मिलने पहुंचा और 30 लाख रुपये के भुगतान को लेकर चर्चा की।
बातचीत के दौरान कारोबारी ने स्पष्ट किया कि उसने इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया था और न ही उसने अकाउंटेंट से किसी दूसरे बैंक खाते में रकम भेजने को कहा था। यह सुनकर अकाउंटेंट को एहसास हुआ कि अब तक जिन संदेशों को वह अपने मालिक के निर्देश समझकर मान रहा था, वे वास्तव में किसी साइबर अपराधी की ओर से भेजे गए थे।
इसके बाद पूरे मामले की जानकारी सामने आई और कारोबारी ने साइबर अपराध पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मोबाइल फोन में भेजी गई संदिग्ध फाइल, कथित तौर पर बदले गए संपर्क विवरण, व्हाट्सऐप संदेशों और रकम ट्रांसफर किए गए बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्ध फाइल के जरिए मोबाइल फोन तक कैसे पहुंच बनाई गई और आरोपी ने कारोबारी के नाम, मोबाइल नंबर तथा प्रोफाइल तस्वीर का इस्तेमाल किस तरह किया। पुलिस बैंक खातों में हुए ₹80 लाख के लेनदेन की भी पड़ताल कर रही है, ताकि रकम के अंतिम लाभार्थियों और कथित साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
यह मामला कारोबारियों और कर्मचारियों के बीच डिजिटल संचार में मौजूद जोखिम को भी सामने लाता है। किसी परिचित व्यक्ति के नाम और तस्वीर वाले व्हाट्सऐप खाते से भुगतान का निर्देश मिलने पर भी बड़े वित्तीय लेनदेन से पहले फोन कॉल या आमने-सामने बातचीत के जरिए उसकी पुष्टि करना जरूरी है। खासकर बैंक खाता बदलने या अचानक बड़ी रकम ट्रांसफर करने के निर्देश को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना भुगतान करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
