अहमदाबाद। अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके में निवेश पर ऊंचे रिटर्न का लालच देकर कारोबारी और उसके पिता से कथित तौर पर ₹41 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि वित्तीय सेवा फर्म से जुड़े चार साझेदारों ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर रकम ली और निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी डिजिटल पोर्टफोलियो, मोबाइल ऐप और जाली लेनदेन विवरण तैयार किए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने चारों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
मामले में मिहिर जितेंद्रभाई पारिख, उनकी पत्नी धारा मिहिरभाई पारिख, उनकी मां गीता जितेंद्रभाई पारिख और हेमराजसिंह विक्रमसिंह राणा को आरोपी बनाया गया है। ये सभी एम.पी. फिनकॉर्प सर्विसेज से जुड़े साझेदार बताए गए हैं। फर्म का कार्यालय इस्कॉन चार रास्ते के पास स्थित शिलालिक शिल्प में बताया गया है।
शिकायतकर्ता रूपसिंह तोमर, जो वस्त्राल निवासी हैं, के अनुसार उन्होंने वर्ष 2024 में निवेश संबंधी सलाह के लिए मिहिर पारिख से संपर्क किया था। दोनों की करीब एक दशक से पहचान थी और पहले बीमा तथा म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन के कारण उन्हें पारिख पर भरोसा था। आरोप है कि पारिख ने निवेश पर हर महीने 2 प्रतिशत यानी करीब 24 प्रतिशत सालाना रिटर्न देने का भरोसा दिलाया और कहा कि भुगतान हर तीन महीने में किया जाएगा।
FCRF Launches India-Focused BFSI Compliance Certification for Emerging Governance Professionals
तोमर ने जब निवेश के लिए पर्याप्त नकदी उपलब्ध नहीं होने की बात कही तो कथित तौर पर उन्हें मौजूदा म्यूचुअल फंड निवेश पर कर्ज लेने का सुझाव दिया गया। आरोप है कि पारिख ने पिरामल फाइनेंस के माध्यम से परिवार के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के बदले 10.15 प्रतिशत सालाना ब्याज पर कर्ज की व्यवस्था कराई। दावा किया गया कि कर्ज की रकम को एम.पी. फिनकॉर्प सर्विसेज के जरिए निवेश करने पर मिलने वाला रिटर्न ब्याज लागत से अधिक होगा।
18 अप्रैल 2024 को कुल ₹41 लाख एम.पी. फिनकॉर्प सर्विसेज के बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए भेजे गए। इसमें ₹38 लाख तोमर के पिता बलजीतसिंह के बैंक खाते से और ₹3 लाख तोमर के आईसीआईसीआई बैंक खाते से भेजे गए थे।
निवेशकों को उनके पैसे शेयर बाजार में लगाए जाने का भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर ‘MY WEALTH’ नाम का मोबाइल ऐप इस्तेमाल कराया गया। इस ऐप में कंपनियों के नाम, खरीदे गए शेयरों की संख्या, खरीद मूल्य और मौजूदा मूल्य के आधार पर लाभ जैसी जानकारी दिखाई जाती थी। इससे निवेशकों को लगा कि उनकी रकम वास्तव में शेयर बाजार में लगाई जा रही है।
लेकिन जब पहली तिमाही का भुगतान मिलने का समय आया तो कथित तौर पर टालमटोल शुरू हो गई। दूसरी ओर, तोमर परिवार पिरामल फाइनेंस के कर्ज की मासिक किस्तें चुकाता रहा। जब तोमर ने मूल रकम वापस मांगकर कर्ज चुकाने की बात कही तो उन्हें शेयरों की खरीद-बिक्री से जुड़ा एक पीडीएफ विवरण दिया गया। इसमें शेयर लेनदेन की तारीख, एक्सचेंज संबंधी जानकारी और बिक्री मूल्य दर्ज होने का दावा किया गया था।
इसके बाद भी रकम नहीं मिली। कार्यालय के चक्कर लगाने और साझेदार हेमराजसिंह राणा से संपर्क करने के बावजूद केवल आश्वासन मिलने का आरोप है। बाद में तोमर ने वास्तविक शेयर बाजार अभिलेखों की जांच की तो उनके और उनके पिता के नाम पर किसी भी शेयर की खरीद या बिक्री नहीं मिली। इसके बाद कथित फर्जी निवेश पोर्टफोलियो और दस्तावेजों का मामला सामने आया।
पुलिस अब फर्म के बैंक खातों, ‘MY WEALTH’ ऐप से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड और चारों आरोपियों की कथित भूमिकाओं की जांच कर रही है। जांच में तीन अन्य लोगों—धर्मेश उमेशभाई शाह, रंजनबेन विनोदचंद्र ठाकर और बाबूलाल सोमाभाई पटेल—की ओर से भी इसी तरह ठगी की शिकायत सामने आने की बात कही गई है।
पुलिस के अनुसार, फर्म के खिलाफ वर्ष 2026 में पहले भी ऐसे ही आरोपों से जुड़े मामले दर्ज हो चुके हैं। अब ताजा शिकायत के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम कहां भेजी गई और कथित फर्जी पोर्टफोलियो तथा दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही।
