साहिबगंज में Digital Arrest के नाम पर ₹1.20 करोड़ की कथित साइबर ठगी मामले में पुलिस ने पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ₹1.20 करोड़ की ठगी, पश्चिम बंगाल से तीन साइबर अपराधी गिरफ्तार

Team The420
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साहिबगंज। झारखंड के साहिबगंज जिले में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹1.20 करोड़ की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के तीन आरोपितों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। बरहड़वा थाना क्षेत्र के निवासी गौतम दास को आरोपितों ने व्हाट्सऐप कॉल के जरिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का अधिकारी बनकर डराया और उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने तथा अश्लील वीडियो से जुड़े आरोपों का भय दिखाया। लगातार मानसिक दबाव बनाने के बाद उनसे आरटीजीएस के जरिए ₹1.20 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित करा लिए गए।

पीड़ित की शिकायत पर 31 अगस्त को बरहड़वा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। साइबर सेल, तकनीकी शाखा और बैंक खातों से जुड़े लेनदेन की जांच के आधार पर पुलिस ने पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर क्षेत्र में कार्रवाई की और तीन आरोपितों को दबोच लिया।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान दुर्गापुर की बॉम्बे कॉलोनी निवासी रंजीत बास्की, आईटीआई गोसाई टोला, एनटीपीसी विधाननगर निवासी आसित महतो और हुरको, दुर्गापुर विधाननगर निवासी धीरज हारी के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि तीनों कथित तौर पर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कराने और अवैध लेनदेन के जरिए उसे खपाने का काम करते थे।

5,000 खातों और 5,500 लेनदेन का नेटवर्क

पुलिस की शुरुआती जांच में इस साइबर गिरोह के बड़े नेटवर्क का पता चला है। अधिकारियों के अनुसार, ठगी की रकम को सीधे एक या दो खातों में रखने के बजाय करीब 5,000 बैंक खातों के जरिए अलग-अलग स्तर पर घुमाया गया। जांच में अब तक लगभग 5,500 लेनदेन सामने आए हैं। इन लेनदेन की कड़ियां हैदराबाद, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों तक पहुंच रही हैं।

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जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने बड़े पैमाने पर बैंक खाते किस तरह उपलब्ध कराए गए और उनमें से कितने खाते फर्जी पहचान, किराये पर लिए गए दस्तावेज या दूसरे लोगों के नाम पर संचालित किए जा रहे थे। पुलिस को आशंका है कि गिरोह के अलग-अलग सदस्य रकम को कई स्तरों पर स्थानांतरित कर उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की कोशिश करते थे।

तकनीकी निगरानी और बैंकिंग लेनदेन के विश्लेषण के आधार पर पुलिस अब तक ₹30 लाख बरामद कर चुकी है। शेष रकम का पता लगाने के लिए संबंधित खातों और उनमें हुए लेनदेन की कड़ियों को खंगाला जा रहा है।

मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश

पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अब गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश कर रही है। जांच का एक प्रमुख पहलू यह भी है कि आरोपितों को पीड़ित की व्यक्तिगत जानकारी कहां से मिली और किस स्तर पर डिजिटल अरेस्ट की पूरी साजिश तैयार की गई। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने देश के अलग-अलग हिस्सों में साइबर ठगी के लिए कितने ठिकाने और सहयोगियों का नेटवर्क बना रखा था।

डिजिटल अरेस्ट के मामलों में अपराधी आमतौर पर खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। इसके बाद वीडियो कॉल, बैंक खातों की जांच या कथित सत्यापन के नाम पर रकम स्थानांतरित कराई जाती है। इस मामले में भी आरोपितों ने इसी तरीके का इस्तेमाल कर पीड़ित पर लगातार दबाव बनाया।

पुलिस मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और ठगी की रकम के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और बैंकिंग व तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण से मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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