ग्वालियर में AI ट्रेडिंग और फॉरेक्स कारोबार में ₹75 लाख मुनाफा दिखाकर नर्सिंग अधिकारी से ₹9.41 लाख की ठगी का मामला सामने आया है।

AI ट्रेडिंग में ₹75 लाख का मुनाफा दिखाकर नर्सिंग अधिकारी से ₹9.41 लाख की ठगी

Team The420
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ग्वालियर। शहर में साइबर ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ट्रेडिंग और विदेशी मुद्रा कारोबार में भारी मुनाफे का लालच देकर एक नर्सिंग कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारी से ₹9 लाख 41 हजार 960 की ठगी कर ली। आरोपियों ने पीड़ित को स्वचालित ट्रेडिंग, कम जोखिम और 300 प्रतिशत बोनस का भरोसा दिलाकर फर्जी डीमैट खाता खुलवाया। इसके बाद खाते में करीब 90 हजार डॉलर यानी लगभग ₹75 लाख का कथित मुनाफा दिखाया गया। जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने अलग-अलग शुल्क, मुनाफे में हिस्सेदारी और जुर्माने के नाम पर लगातार रकम जमा कराई।

सिरोल निवासी 46 वर्षीय आशीष मिटकर सिकरौदा चौराहा स्थित आरएस सिंह कॉलेज ऑफ नर्सिंग में प्रशासनिक अधिकारी हैं। पुलिस को दी शिकायत में उन्होंने बताया कि उन्होंने विदेशी मुद्रा कारोबार के लिए ‘वैल्यू ट्रेड’ नाम की कंपनी में डीमैट खाता खुलवाया था। इसके बाद अक्षय नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए स्वचालित ट्रेडिंग का दावा किया। उसे बताया गया कि कारोबार में केवल दो प्रतिशत का स्टॉप लॉस रहेगा और इससे जोखिम सीमित रखते हुए बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

पहले निवेश कराया, फिर खाते में दिखाया भारी मुनाफा

आरोपी के कहने पर आशीष ने कंपनी की ओर से बताए गए बैंक खातों में करीब ₹3 लाख जमा किए। अक्षय ने खुद की ओर से ₹2.50 लाख निवेश करने और कंपनी की ओर से 300 प्रतिशत बोनस दिलाने का दावा किया। इसके बाद 25 जुलाई को उनके ट्रेडिंग खाते में करीब 90 हजार डॉलर का मुनाफा दिखाई देने लगा। खाते में इतनी बड़ी रकम देखकर पीड़ित को लगा कि निवेश वास्तव में लाभ दे रहा है और कंपनी की गतिविधियां वास्तविक हैं।

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यही कथित मुनाफा ठगी की अगली कड़ी का आधार बना। जब आशीष ने खाते में दिखाई जा रही रकम को निकालने का प्रयास किया तो आरोपियों ने नई शर्तें सामने रख दीं।

रकम निकालने पर शुरू हुई शुल्क और जुर्माने की मांग

26 अगस्त को आशीष ने अपने ट्रेडिंग खाते से रकम निकालने के लिए अनुरोध किया। इसके बाद अक्षय ने खुद के छुट्टी पर होने की बात कहकर आकाश नाम के व्यक्ति से संपर्क कराया। आकाश ने कथित तौर पर 10 प्रतिशत मुनाफे में हिस्सेदारी के नाम पर करीब ₹9 लाख अग्रिम जमा करने को कहा। रकम नहीं देने पर प्रतिदिन 1.5 प्रतिशत जुर्माना लगाने की धमकी दी गई।

दबाव और डर के कारण आशीष ने उसी दिन बताए गए बैंक खाते में ₹2 लाख ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद अभिजीत चौहान नाम के कथित अकाउंटेंट ने उनसे संपर्क किया। उसने फर्जी जांच और नकद भुगतान की प्रक्रिया का डर दिखाकर आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज मांगे। इसके बाद 28 अगस्त को पीड़ित से ₹4 लाख 41 हजार 260 और जमा करा लिए गए।

कुल ₹9.41 लाख गंवाने के बाद हुआ ठगी का एहसास

अलग-अलग चरणों में रकम जमा कराने के बावजूद कथित मुनाफे की राशि वापस नहीं मिली। आरोपियों की ओर से लगातार नई मांग सामने आने के बाद आशीष को संदेह हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद सिरोल थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

पुलिस अब उन बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है, जिनमें पीड़ित से रकम ट्रांसफर कराई गई। अधिकारियों के अनुसार संबंधित खातों को होल्ड कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही आरोपियों की पहचान और उनके नेटवर्क का पता लगाने के लिए बैंकिंग लेनदेन तथा डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ऑनलाइन निवेश ठगी में सबसे प्रभावी हथियार अक्सर फर्जी मुनाफा होता है। अपराधी पहले पीड़ित को छोटे निवेश पर बढ़ते लाभ का आभास कराते हैं और फिर निकासी के समय कर, शुल्क, जुर्माना या सत्यापन के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगते हैं। उनके मुताबिक, खाते में दिखाई देने वाला बड़ा मुनाफा वास्तविक धन होने की गारंटी नहीं है। किसी भी निवेश मंच पर पैसा लगाने से पहले कंपनी, पंजीकरण, भुगतान व्यवस्था और निकासी संबंधी नियमों की स्वतंत्र रूप से जांच जरूरी है।

साइबर अपराध से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में रकम जमा न करें और कथित ट्रेडिंग खाते में दिखाई दे रहे लाभ के आधार पर अतिरिक्त भुगतान न करें। यदि धोखाधड़ी हो जाए तो बैंक को तुरंत सूचना देने के साथ 1930 पर शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण है, ताकि रकम के प्रवाह को समय रहते रोकने की कोशिश की जा सके।

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