ढाका। बांग्लादेश के प्रमुख पर्यटन क्षेत्र कॉक्स बाजार में ऑनलाइन वित्तीय ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। पुलिस के अनुसार, समुद्र किनारे स्थित होटलों और रिसॉर्ट में पिछले करीब चार महीने से विदेशी नागरिकों का एक समूह कथित तौर पर संगठित ऑनलाइन वित्तीय अपराध चला रहा था। 25 अगस्त को मरीना बीच विला रिजॉर्ट पर हुई छापेमारी में बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण मिलने के बाद नेटवर्क की गतिविधियों का दायरा सामने आया। इसके बाद तीन सितंबर की रात दो अन्य होटलों पर कार्रवाई कर पांच चीनी और एक ताइवानी नागरिक को गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया है कि नेटवर्क से जुड़े करीब 250 से 300 चीनी और ताइवानी नागरिक अलग-अलग समय पर कॉक्स बाजार के होटलों और रिसॉर्ट में ठहरे थे। पुलिस का आरोप है कि फर्जी निवेश योजनाओं और नकली या क्लोन किए गए व्यापारिक मंचों के जरिये लोगों से रकम ठगने के लिए इन ठिकानों का इस्तेमाल किया जा रहा था। छह गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ रामू थाने में मामला दर्ज किया गया है, जबकि चार अन्य लोगों को फरार आरोपी बनाया गया है।
मरीना रिजॉर्ट से मिले हजारों डिजिटल उपकरण
25 अगस्त को मरीना बीच विला रिजॉर्ट पर छापेमारी के दौरान संदिग्धों के पास से 1,938 आईफोन बरामद होना जांच का सबसे महत्वपूर्ण सुराग माना जा रहा है। इसके अलावा 50 मॉनिटर, 44 सीपीयू, 30 कीबोर्ड, दो लैपटॉप, दो प्रिंटर, 40 माउस, एक यूपीएस और 24 कनेक्शन बोर्ड भी जब्त किए गए। मौके से चीनी पुलिस के बैज, पुलिस चिह्न वाली टाई और चीन का झंडा भी मिला।
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पुलिस के अनुसार, संदिग्धों ने रिजॉर्ट में एक कंप्यूटर प्रयोगशाला और छह ध्वनिरोधी कमरे तैयार किए थे। इन कमरों का इस्तेमाल कथित ऑनलाइन गतिविधियों के लिए किया जाता था। छापेमारी के दौरान कई संदिग्ध समुद्र तट की ओर भाग निकले, जिसके बाद जांचकर्ताओं को आशंका हुई कि नेटवर्क के सदस्य पहले से ही अलग-अलग ठिकानों पर जाने की तैयारी में थे।
अप्रैल से कॉक्स बाजार में किराये पर ली संपत्तियां
जांच के मुताबिक, विदेशी नागरिक एक मार्च से बांग्लादेश पहुंचना शुरू हुए थे और अप्रैल से कॉक्स बाजार में अलग-अलग होटल और रिसॉर्ट किराये पर लेने लगे। मरीन ड्राइव क्षेत्र के साथ-साथ हिमछड़ी और उखिया के इनानी इलाके में भी उनके ठिकाने होने की जानकारी सामने आई है। मरीना बीच विला रिजॉर्ट के अलावा ड्रीम हॉलिडे रिजॉर्ट और ऑर्किड ब्लू रिजॉर्ट में बड़ी संख्या में चीनी नागरिकों के ठहरने की बात सामने आई है।
रिसॉर्ट कर्मचारियों के मुताबिक, विदेशी नागरिक स्थानीय लोगों से काफी दूरी बनाकर रखते थे। मरीना बीच विला रिजॉर्ट में करीब 50 विदेशी नागरिकों ने 45 कमरे किराये पर लिए थे। उन्होंने अपने रसोइये रखे थे और भोजन तथा किराने का सामान भी अपने स्तर पर मंगाते थे। स्थानीय कर्मचारियों को उनके कमरों में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
ऑर्किड ब्लू रिजॉर्ट में करीब 60 चीनी नागरिकों ने अप्रैल में छह महीने के लिए 25 कमरे किराये पर लिए थे। हालांकि, 25 अगस्त की कार्रवाई के बाद वे 26 अगस्त को अचानक वहां से चले गए। इससे जांचकर्ताओं को संदेह है कि मुख्य ठिकाने पर छापेमारी के बाद नेटवर्क से जुड़े लोगों ने अपने स्थान बदलने शुरू कर दिए।
दो होटलों से छह विदेशी गिरफ्तार
तीन सितंबर की रात कोलाटोली इलाके के होटल फाल्कन और होटल सी पैलेस में छापेमारी के दौरान छह विदेशी नागरिक पकड़े गए। गिरफ्तार आरोपियों में ताइवानी नागरिक वेई चिंग वेन तथा चीनी नागरिक जू यांगफान, यान चांगशेंग, जू हाइजांग, वू जियानशियोंग और झांग झेमिंग शामिल हैं। उनके पास से छह मोबाइल फोन, पांच पासपोर्ट और तीन पहचान पत्र बरामद किए गए। अदालत ने अगले दिन सभी छह आरोपियों को जेल भेज दिया।
मामले में झान युआन फान उर्फ बाबर अली, पाई लेडिंग, वू झिपिंग और जियान झांग को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि इन आरोपियों की भूमिका नेटवर्क के लिए संपत्तियां किराये पर लेने और गतिविधियों के संचालन से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, मामले की विस्तृत भूमिका डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद स्पष्ट होगी।
दूसरे होटलों में भी पहुंचे संदिग्ध
छापेमारी के बाद नेटवर्क के सदस्यों के दूसरे होटलों में जाने के संकेत मिले हैं। कॉक्स बाजार के कुछ होटल संचालकों ने पिछले दिनों चीनी नागरिकों के समूहों के ठहरने की जानकारी दी है। एक होटल में करीब 20 चीनी नागरिकों के ठहरने की बात सामने आई, जिनमें सात लोग 27 अगस्त को पहुंचे और एक सितंबर को वहां से चले गए। दूसरे होटल में करीब 20 विदेशी नागरिक 25 अगस्त को पहुंचे, लेकिन कमरों की कमी के कारण केवल एक रात रुक सके। स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार, इनमें से कुछ लोग बातचीत के लिए गूगल अनुवाद का इस्तेमाल करते थे।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि अलग-अलग रिसॉर्ट और होटलों में ठहरे विदेशी नागरिक आपस में किस तरह जुड़े थे और ऑनलाइन ठगी के लिए किस तकनीकी ढांचे का इस्तेमाल कर रहे थे। 28 अगस्त को आतंकवाद निरोधक और अंतरराष्ट्रीय अपराध इकाई की नौ सदस्यीय टीम ने मरीना रिजॉर्ट का निरीक्षण किया और जब्त उपकरणों की फोरेंसिक जांच की सिफारिश की। टीम ने आशंका जताई कि यह समूह संगठित ऑनलाइन वित्तीय अपराधों में शामिल हो सकता है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े पैमाने पर मोबाइल उपकरण, अलग-अलग स्थानों पर किराये के सुरक्षित ठिकाने और फर्जी निवेश मंचों का एक साथ इस्तेमाल किसी संगठित वित्तीय ठगी नेटवर्क की ओर संकेत कर सकता है। ऐसे मामलों में केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती। जब्त मोबाइल और कंप्यूटर से मिले डिजिटल साक्ष्य, बैंकिंग लेनदेन, संचार रिकॉर्ड और सीमा-पार संपर्कों को जोड़कर जांच करने पर नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके संचालकों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
पुलिस अब फरार आरोपियों की तलाश के साथ यह भी पता लगाने में जुटी है कि छापेमारी के बाद कितने संदिग्ध कॉक्स बाजार के दूसरे हिस्सों में गए और कितने देश के अन्य इलाकों में पहुंच चुके हैं। 1,938 आईफोन समेत जब्त उपकरणों की फोरेंसिक जांच से कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली, पीड़ितों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।
