ताडिपत्री बाजार टाउन उप डाकघर के तत्कालीन उप डाकपाल पर बिना जानकारी रकम निकालने और बाद में ग्राहकों को आंशिक भुगतान करने का आरोप; जांच के बाद आरोपी के ठिकाने पर छापेमारी

डाकघर के खातों से ₹3.71 करोड़ की हेराफेरी, 310 ग्राहकों की रकम पर हाथ साफ करने का आरोप; CBI ने दर्ज किए दो केस

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By Roopa
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हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में डाकघर के बचत खातों से करोड़ों रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ताडिपत्री बाजार टाउन उप डाकघर के तत्कालीन उप डाकपाल चेन्ना रामुडु के खिलाफ ₹3.71 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। आरोप है कि अधिकारी ने 310 ग्राहकों के बचत बैंक खातों से उनकी जानकारी या अनुमति के बिना रकम निकाली और डाकघर की धनराशि का एक हिस्सा अपने इस्तेमाल में लेकर गबन किया।

मामले में केस दर्ज होने के कुछ ही दिनों बाद CBI ने आरोपी के आंध्र प्रदेश स्थित आवास पर छापेमारी भी की। जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों और अन्य सामग्री की तलाश की गई। अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है और हेराफेरी की पूरी रकम तथा उससे जुड़े लेनदेन का ब्योरा जुटाया जा रहा है।

CBI के अनुसार, यह मामला अनंतपुर क्षेत्रीय डाक कार्यालय के डाक अधीक्षक के. अमरनाथ की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि चेन्ना रामुडु ने ताडिपत्री बाजार टाउन उप डाकघर में उप डाकपाल के पद पर रहते हुए कई जमाकर्ताओं के बचत बैंक खातों से उनकी जानकारी के बिना रकम निकाल ली।

शिकायत के मुताबिक, ग्राहकों के खाते से रकम निकाले जाने के बाद जब संबंधित खाताधारक स्वयं पैसा निकालने के लिए डाकघर पहुंचते थे, तब आरोपी उन्हें कुछ रकम वापस कर देता था। आरोप है कि पूरी राशि वापस नहीं की जाती थी और बची हुई रकम का दुरुपयोग किया जाता था। इस तरीके से लंबे समय तक खातों में जमा धनराशि में कथित तौर पर हेराफेरी की गई।

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डाक विभाग के स्तर पर भी मामले की जांच की गई थी। CBI को दी गई शिकायत में बताया गया कि डाक सेवाओं के निदेशक, कुरनूल क्षेत्र की ओर से सर्किल स्तर की जांच कराई गई थी। इस जांच में चेन्ना रामुडु के कार्यकाल के दौरान डाकघर की धनराशि में कथित गबन की पुष्टि होने की बात सामने आई।

जांच में 310 ग्राहकों के खातों से संबंधित लेनदेन को संदिग्ध पाया गया और कथित तौर पर कुल ₹3.71 करोड़ की रकम में अनियमितता सामने आई। इसके बाद विभागीय स्तर पर उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों को आधार बनाकर मामले को CBI तक पहुंचाया गया। शिकायत के आधार पर एजेंसी ने कथित आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की है।

CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि खातों से रकम किस प्रक्रिया के तहत निकाली गई, कितने समय तक यह गतिविधि चलती रही और कथित तौर पर निकाली गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया। जांच एजेंसी ग्राहकों के खातों से जुड़े रिकॉर्ड, लेनदेन और डाकघर के वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

मामले में आरोपी चेन्ना रामुडु के खिलाफ दर्ज दोनों मामलों की जांच जारी है। CBI की छापेमारी और दस्तावेजों की पड़ताल के बाद वित्तीय अनियमितता से जुड़े अन्य तथ्यों के सामने आने की संभावना है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि कथित हेराफेरी में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

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