नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से केस से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। इससे मामले में चल रही वित्तीय जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। CBI से मिलने वाले दस्तावेजों के आधार पर ED कथित परीक्षा घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, रकम के प्रवाह और संदिग्ध लोगों के बीच आर्थिक संबंधों की पड़ताल कर सकती है।
ED ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कई राज्यों में दर्ज मामलों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच पहले ही शुरू कर रखी है। अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित पेपर लीक और परीक्षा में हेरफेर के जरिए अपराध से कोई रकम अर्जित की गई थी या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो उस रकम को बाद में किस तरह ट्रांसफर, छिपाया या अलग-अलग लोगों के बीच बांटा गया।
वित्तीय जांच का दायरा केवल कथित प्रश्नपत्र लीक तक सीमित रहने के बजाय उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर सकता है, जिसके जरिए अभ्यर्थियों से कथित तौर पर संपर्क किया गया, उनसे पैसे लिए गए और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमित तरीके से लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
CBI से मांगे गए रिकॉर्ड में जांच के दौरान सामने आई जानकारियां, केस से संबंधित दस्तावेज, आरोपियों और संदिग्ध बिचौलियों के बयान तथा उपलब्ध वित्तीय सूचनाएं शामिल हो सकती हैं। ED इन रिकॉर्ड का बैंकिंग और अन्य वित्तीय विवरणों से मिलान कर ऐसे लेनदेन की पहचान कर सकती है, जिनका कथित परीक्षा घोटाले से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध हो।
जांच में बिचौलियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। एजेंसी यह पता लगा सकती है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों तक कौन पहुंचता था, भुगतान किस तरीके से मांगा जाता था, रकम किन खातों में भेजी जाती थी और आखिरकार वह किन लोगों तक पहुंचती थी। इससे कथित नेटवर्क में शामिल अलग-अलग स्तर के लोगों के बीच वित्तीय संबंध स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
मामले की भौगोलिक पहुंच भी काफी व्यापक हो सकती है। NEET-UG से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले झारखंड, राजस्थान, हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत कई राज्यों में सामने आए हैं। ED इन मामलों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों के बीच कोई समान वित्तीय कड़ी, बिचौलिया या संगठित नेटवर्क मौजूद है या नहीं।
वित्तीय जांच का एक प्रमुख पहलू कथित अपराध से अर्जित रकम की पहचान करना होगा। इसके लिए संदिग्ध बैंक खातों, डिजिटल भुगतान, नकद लेनदेन और एक-दूसरे को किए गए धन हस्तांतरण की जांच की जा सकती है। एजेंसी यह भी देख सकती है कि कहीं रकम को कई खातों के जरिए घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत या अंतिम लाभार्थी को छिपाने की कोशिश तो नहीं की गई।
ED की जांच से मामले को एक अलग वित्तीय आयाम मिल सकता है। जहां CBI कथित आपराधिक साजिश, प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं ED का फोकस अपराध से अर्जित कथित रकम और उसके आगे के लेनदेन की पहचान पर रहेगा।
अधिकारियों की नजर उन व्यक्तियों और संस्थाओं की वित्तीय प्रोफाइल पर भी हो सकती है, जिनके खातों में अभ्यर्थियों या उनके सहयोगियों से बड़ी रकम पहुंचने का संदेह है। आय के अनुरूप न होने वाली जमा रकम, असामान्य बैंक ट्रांजेक्शन और संदिग्ध धन हस्तांतरण जांच के अहम बिंदु बन सकते हैं।
CBI से रिकॉर्ड मांगने का महत्व इसलिए भी है क्योंकि केंद्रीय एजेंसी की जांच में कई स्थानों और संदिग्धों से जुटाई गई जानकारी शामिल हो सकती है। इन जानकारियों का बैंकिंग रिकॉर्ड के साथ मिलान करने पर ऐसे संबंध सामने आ सकते हैं, जो अलग-अलग आपराधिक मामलों की जांच में स्पष्ट नहीं हुए हों।
ED विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों से भी केस रिकॉर्ड तथा वित्तीय जानकारी हासिल कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि अलग-अलग घटनाएं स्वतंत्र थीं या उनके पीछे एक ही नेटवर्क, बिचौलियों अथवा वित्तीय चैनलों की भूमिका थी।
NEET-UG परीक्षा को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं ने परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के इस परीक्षा में शामिल होने के कारण पेपर लीक या संगठित तरीके से अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों का प्रभाव व्यापक हो सकता है।
ED के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल कथित रकम की पहचान और उसका मनी ट्रेल स्थापित करना होगा। एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि क्या परीक्षा में कथित अनियमितता के लिए वास्तव में पैसे लिए गए, रकम किन लोगों तक पहुंची और उसे किस तरीके से आगे स्थानांतरित किया गया।
CBI से रिकॉर्ड मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन के विश्लेषण के आधार पर अतिरिक्त बैंक खातों, संपत्तियों, कंपनियों और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच की जा सकती है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। आरोपियों की वास्तविक भूमिका, कथित वित्तीय नेटवर्क की पूरी संरचना और इसमें शामिल रकम की तस्वीर जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी।
