अपॉइंटमेंट के नाम पर ठग ने मांगा आधार नंबर, इसके बाद बुजुर्ग और पत्नी के संयुक्त बैंक खातों से कई बार निकाली गई रकम; प्रयागराज पुलिस ने केस दर्ज कर शुरू की जांच

गूगल पर डॉक्टर का नंबर तलाशना पड़ा भारी, 80 वर्षीय बुजुर्ग से ₹1.56 लाख की ठगी

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By Roopa
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प्रयागराज। डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेने के लिए गूगल पर मोबाइल नंबर खोजना प्रयागराज के 80 वर्षीय बुजुर्ग को भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने डॉक्टर का नंबर बताकर उनसे संपर्क किया और अपॉइंटमेंट के लिए ₹500 ऑनलाइन भुगतान करने को कहा। बुजुर्ग ने ऑनलाइन भुगतान की सुविधा नहीं होने की बात कही तो ठग ने दूसरा तरीका बताने के बहाने उनका आधार नंबर हासिल कर लिया। इसके बाद बुजुर्ग और उनकी पत्नी के संयुक्त बैंक खातों से अलग-अलग तारीखों में कुल ₹1,56,000.91 निकाल लिए गए।

पीड़ित ध्रुव शुक्ला ने कोतवाली पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह और उनकी पत्नी माया शुक्ला दो संयुक्त बैंक खातों के धारक हैं। 26 मई 2026 को उन्होंने गूगल पर एक चिकित्सक का मोबाइल नंबर तलाशा और उस नंबर पर फोन किया। बातचीत के कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर दूसरे नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट दिलाने की बात कही और इसके लिए ₹500 ऑनलाइन भुगतान करने को कहा।

ध्रुव शुक्ला ने जब ऑनलाइन भुगतान करने में असमर्थता जताई तो आरोपी ने उनसे आधार कार्ड का नंबर मांग लिया। बुजुर्ग ने अपना आधार नंबर साझा कर दिया। शिकायत के अनुसार, इसके बाद उनके दोनों संयुक्त बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन शुरू हो गए।

कई दिनों तक होती रही खाते से निकासी

पीड़ित के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक के संयुक्त खाते से 27 मई से 31 मई के बीच कई लेनदेन किए गए। 27 मई को खाते से ₹1 की निकासी दर्ज हुई। इसके बाद 31 मई को ₹14,999.99, ₹29,999.99, ₹29,999.98 और ₹23,999.99 की रकम निकाली गई।

इसके बाद दूसरे संयुक्त बैंक खाते को भी निशाना बनाया गया। 1 जून को इस खाते से ₹14,999.99, ₹19,999.99, ₹19,999.99 और ₹1,999.99 की निकासी हुई। पीड़ित ने बैंक स्टेटमेंट पुलिस को सौंपकर बताया कि दोनों खातों से कुल ₹1,56,000.91 की रकम अवैध रूप से निकाली गई।

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आधार नंबर के बहाने शुरू हुआ ठगी का सिलसिला

मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि ठग ने शुरुआत में केवल ₹500 के अपॉइंटमेंट भुगतान की बात की, लेकिन ऑनलाइन भुगतान नहीं कर पाने की जानकारी मिलने के बाद बातचीत को दूसरी दिशा में ले गया। आधार नंबर हासिल करने के बाद खातों से रकम निकाले जाने का सिलसिला शुरू हुआ। हालांकि पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों ने आधार संबंधी जानकारी का इस्तेमाल किस तरीके से किया और बैंक खातों तक उनकी पहुंच कैसे बनी।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, साइबर ठग अक्सर लोगों की तत्काल जरूरत को अपना प्रवेश बिंदु बनाते हैं। डॉक्टर, अस्पताल, कूरियर, बैंक या अन्य जरूरी सेवाओं का नंबर इंटरनेट पर तलाशने वाले लोगों को फर्जी संपर्क नंबर के जरिए निशाना बनाया जा सकता है। किसी सेवा के लिए संपर्क करते समय केवल भुगतान ही नहीं, बल्कि आधार, बैंक खाते, ओटीपी या अन्य व्यक्तिगत जानकारी मांगना भी गंभीर चेतावनी का संकेत है।

साइबर सेल में भी पहुंची शिकायत

खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद ध्रुव शुक्ला ने साइबर सेल में शिकायत की। उन्होंने बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड और अन्य संबंधित दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए। इसके बाद कोतवाली थाने में शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस बैंक खातों से हुए लेनदेन, रकम जिन खातों में गई उनकी जानकारी और ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी पता लगाया जा रहा है कि संदिग्ध नंबर किसके नाम पर दर्ज हैं, निकाली गई रकम कहां ट्रांसफर हुई और इस वारदात के पीछे किसी संगठित साइबर गिरोह की भूमिका है या नहीं।

यह मामला इंटरनेट पर उपलब्ध संपर्क सूचनाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़ा करता है। डॉक्टर या अस्पताल का नंबर खोजते समय उपयोगकर्ताओं को आधिकारिक वेबसाइट, अस्पताल की सत्यापित जानकारी या सीधे संस्थान से नंबर की पुष्टि करनी चाहिए। किसी अनजान कॉलर को आधार, बैंकिंग विवरण, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है।

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