मदुरै। तमिलनाडु के मेलूर में कथित FQL निवेश घोटाले की जांच में पुलिस ने रविवार को तीन और लोगों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या करीब 18 हो गई है। इस कथित क्रिप्टोकरेंसी आधारित निवेश धोखाधड़ी में बड़ी संख्या में निवेशकों के पैसे फंसने की शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, अब तक करीब 34 हजार शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। जिला अपराध शाखा (DCB) को इस मामले के कथित मुख्य आरोपी तक पहुंचने में भी महत्वपूर्ण सफलता मिलने की उम्मीद है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रविवार को गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। जांचकर्ताओं का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के जरिए FQL प्लेटफॉर्म के संचालन, निवेशकों से जुटाई गई रकम और कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।
निवेशकों की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए मेलूर में तीन दिन का विशेष पुलिस कैंप लगाया गया था। इसका उद्देश्य कथित घोटाले में पैसे गंवाने वाले लोगों की शिकायतें सीधे दर्ज करना था। पुलिस के मुताबिक, रविवार को कैंप में करीब 7 हजार शिकायतें पहुंचीं। इससे पहले दर्ज शिकायतों को मिलाकर कुल संख्या लगभग 34 हजार हो गई है। इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आने से पुलिस के सामने मामले की व्यापकता का आकलन करने और प्रत्येक शिकायत से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की चुनौती भी बढ़ गई है।
पुलिस के मुताबिक, FQL ऐप के जरिए कथित निवेश योजना संचालित की जा रही थी। यह प्लेटफॉर्म करीब डेढ़ साल से सक्रिय था। निवेशकों को कथित तौर पर इसमें पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। करीब तीन महीने पहले ऐप अचानक पहुंच से बाहर हो गया। इसके बाद निवेशकों को अपने पैसे के वापस नहीं मिलने की आशंका हुई और उन्होंने पुलिस से संपर्क करना शुरू किया।
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शिकायतों के सामने आने के बाद जिला अपराध शाखा ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांचकर्ताओं ने कथित निवेश प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल शुरू की। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि निवेशकों से जुटाई गई रकम किन खातों में गई और उसे आगे किन माध्यमों से स्थानांतरित किया गया।
कथित घोटाले का प्रभाव केवल मेलूर तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, मदुरै जिले के मेलूर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निवेशकों के प्रभावित होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा डिंडीगुल जिले के नatham और आसपास के इलाकों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। इससे जांच एजेंसियों को संदेह है कि FQL से जुड़ा कथित नेटवर्क एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में सक्रिय हो सकता है।
जांच के दौरान पुलिस पहले ही कई लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। रविवार की तीन गिरफ्तारियों के बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या करीब 18 हो गई है। पुलिस का कहना है कि कथित मुख्य आरोपी भी जांच के दायरे में है और उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि मुख्य आरोपी तक पहुंचने के बाद निवेश योजना की संरचना, धन के प्रवाह और अन्य सहयोगियों की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, निवेश आधारित साइबर धोखाधड़ी में शुरुआत में निवेशकों को नियमित रिटर्न या मुनाफे का भरोसा देकर नेटवर्क में जोड़ा जाता है। जब बड़ी संख्या में लोग पैसा जमा कर देते हैं, तो ऐप या प्लेटफॉर्म बंद कर दिया जाता है और रकम को अलग-अलग खातों के जरिए स्थानांतरित करने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रेल और प्लेटफॉर्म से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच जारी है। प्राप्त शिकायतों की जांच के साथ-साथ कथित घोटाले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद घोटाले में शामिल लोगों और कथित तौर पर निवेशकों से जुटाई गई रकम के वास्तविक पैमाने की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
