सुरक्षा एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क द्वारा encrypted apps, anonymous platforms और VPN के कथित इस्तेमाल की जांच कर रही हैं।

₹5,000 करोड़ के साइबर ठगी नेटवर्क का कानपुर कनेक्शन, 23 बैंककर्मियों पर मिलीभगत का शक

Team The420
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कानपुर। कानपुर क्राइम ब्रांच ने देशभर में कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क दुबई में बैठे साइबर ठगों के लिए भारत में बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में मंगाकर आगे ट्रांसफर करने का काम करता था। फजलगंज क्षेत्र से पकड़े गए आरोपियों के पास से मिले कथित हिसाब-किताब में फिलहाल करीब ₹23 करोड़ की ठगी से जुड़े लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद यह आंकड़ा ₹100 करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि पूरे नेटवर्क से जुड़ी कथित ठगी ₹5,000 करोड़ से अधिक हो सकती है।

पुलिस ने कपिल वर्मा उर्फ शंटी, अभय प्रताप और रोहित सिंह को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आए इनपुट के आधार पर पुलिस अब नेटवर्क के फरार सदस्यों और इसके कथित मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।

दुबई बैठे साइबर ठगों तक पहुंचती थी रकम

पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य काम ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराना था, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने के लिए किया जा सके। आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, बैंकिंग सुविधा उपलब्ध कराने या अन्य बहाने से लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर खाते खुलवाए जाते थे।

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इन खातों का इस्तेमाल बाद में कथित तौर पर देश के अलग-अलग हिस्सों से ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जाता था। रकम आने के बाद उसे कई खातों में ट्रांसफर किया जाता और कथित तौर पर इसका एक हिस्सा हवाला तथा अन्य माध्यमों से दुबई भेजा जाता था। पूछताछ में ठगी की रकम का करीब 40 फीसदी हिस्सा कमीशन के तौर पर नेटवर्क के जरिए बाहर भेजे जाने का दावा सामने आया है।

23 बैंककर्मियों के संपर्क में होने का दावा

जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और डिजिटल चैट की पड़ताल को महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, शंटी और अभय प्रताप की CDR तथा वर्ष 2024 से अब तक की चैट और कथित कॉल रिकॉर्डिंग की जांच में 23 बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के संपर्क सामने आए हैं।

पुलिस को संदेह है कि इनमें से कुछ बैंककर्मियों ने कथित तौर पर कमीशन के बदले संदिग्ध बैंक खाते खुलवाने या उनसे जुड़े काम में मदद की। जांच में बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, डीसीबी बैंक, ओवरसीज बैंक, उज्जीवन और एयरटेल पेमेंट्स बैंक समेत कई संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों के नाम सामने आने का दावा किया गया है।

हालांकि, केवल मोबाइल संपर्क या चैट में नाम सामने आना किसी व्यक्ति की आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं करता। पुलिस अब संबंधित बैंककर्मियों से पूछताछ कर यह पता लगाएगी कि उनकी भूमिका क्या थी और क्या उन्होंने जानबूझकर संदिग्ध खातों या लेन-देन में मदद की।

शंटी को गैंग का सरगना बताया

पुलिस के मुताबिक, कपिल वर्मा उर्फ शंटी इस नेटवर्क का प्रमुख सदस्य है। वह मूल रूप से फतेहपुर का रहने वाला है और कानपुर के नौबस्ता क्षेत्र में कोयला नगर के आसपास रहता था। दूसरा आरोपी अभय प्रताप साध क्षेत्र का निवासी बताया गया है और उसने विज्ञान विषय से स्नातक किया है। पुलिस के अनुसार, उसे साइबर अपराध से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जानकारी थी। रोहित सिंह को भी नेटवर्क का अहम सदस्य बताया गया है।

पुलिस अब अभय शुक्ला उर्फ सुल्तान मिर्जा उर्फ जॉन सीना की तलाश कर रही है, जिसे कथित नेटवर्क का प्रमुख मास्टरमाइंड बताया गया है। इसके अलावा अमित सिंह उर्फ जगदीश, राहुल, केपी और आशीष नाम के चार अन्य संदिग्ध भी फरार बताए गए हैं।

29 शिकायतों से शुरू हुई जांच

क्राइम ब्रांच ने NCRB पोर्टल पर दर्ज 29 शिकायतों के आधार पर संदिग्ध लेन-देन और खातों की कड़ियां खंगालनी शुरू की थीं। जांच आगे बढ़ने पर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और आरोपियों के संपर्कों के बीच संबंध सामने आने का दावा किया गया।

अब पुलिस उन खातों की जांच कर रही है, जिनमें कथित साइबर ठगी की रकम पहुंची। जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि रकम किन राज्यों और शहरों से आई, किन खातों में भेजी गई और अंततः दुबई तक पहुंचाने के लिए कौन-कौन से माध्यम इस्तेमाल किए गए।

बैंक खातों की जांच से खुलेगा पूरा नेटवर्क

पुलिस को मिले कथित रजिस्टर और डिजिटल रिकॉर्ड से फिलहाल करीब ₹23 करोड़ के लेन-देन का हिसाब मिलने की बात सामने आई है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल सामने आया हिस्सा हो सकता है। बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, मोबाइल डेटा और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद नेटवर्क की वास्तविक रकम का पता चल सकेगा।

जांच एजेंसी अब आरोपियों के बैंक खातों और संपर्कों के साथ-साथ दुबई से जुड़े संभावित हैंडलरों की भूमिका भी खंगाल रही है। यदि संदिग्ध लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों से आरोपों की पुष्टि होती है तो मामले में बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और फरार आरोपियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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