मुंबई: मुंबई पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन कथित एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जो लोगों को मामूली आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते और उन्हें साइबर अपराधों के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘म्यूल अकाउंट किट’ में बदल देते थे। पुलिस के अनुसार, इन खातों में महज डेढ़ से दो महीने के भीतर करीब ₹25.45 करोड़ के लेनदेन का पता चला है।
पुलिस ने तीनों आरोपियों को 20 अगस्त को सैंडहर्स्ट रोड रेलवे स्टेशन के बाहर गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मध्य प्रदेश निवासी निखिल कमलकुमार जसवानी, राहुल श्यामलाल परवानी और जय बिहारिलाल तीर्थानी के रूप में हुई है। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले में पांच अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
जांच के अनुसार, आरोपी ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जिन्हें तत्काल पैसों की जरूरत होती थी। उन्हें बैंक खाता खोलने के बदले मामूली रकम देने का लालच दिया जाता था। खाता खुलने के बाद एजेंट कथित तौर पर पासबुक, डेबिट कार्ड, चेकबुक, SIM कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लेते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता था।
पुलिस को कुल 110 बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इनमें से 17 खातों की जानकारी संबंधित बैंकों से प्राप्त हो चुकी है। इन 17 खातों की जांच में करीब ₹25.45 करोड़ के वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन खातों से जुड़े लेनदेन का संबंध महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल में दर्ज कम से कम 38 साइबर अपराधों से मिला है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 42 बैंक पासबुक, 70 डेबिट कार्ड, 36 SIM कार्ड, 23 मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, एक टैबलेट, 12 बैंक किट और एक कार बरामद की है। जब्त सामान की अनुमानित कीमत करीब ₹50 लाख बताई गई है।
मामले में तीन महिला सब-एजेंटों से भी पूछताछ की गई है। उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35(3) के तहत नोटिस जारी कर जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बैंक खातों में रकम कहां से आई, किन खातों में भेजी गई और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच का दायरा मुंबई के गोवंडी, मानखुर्द और डोंगरी के अलावा नवी मुंबई के बेलापुर और पनवेल तथा धाराशिव तक बढ़ाया गया है। पुलिस को आशंका है कि इन इलाकों में सक्रिय अन्य एजेंटों और खाताधारकों के जरिए नेटवर्क और बड़ा हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला और साइबर अपराधों से जुड़े लाभार्थियों की पहचान के लिए विस्तृत जांच जारी है।
मामला डोंगरी पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस अब बरामद डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े अन्य साइबर अपराधों और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
