छोटे ऑनलाइन टास्क से भरोसा जीतने के बाद बड़े मुनाफे का लालच; रकम निकालने के नाम पर प्रोसेसिंग फीस, टैक्स या सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगकर करते हैं ठगी

टास्क अर्निंग के नाम पर स्कूली बच्चों को निशाना बना रहे साइबर ठग, पहले देते हैं छोटी रकम

Roopa
By Roopa
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पटना: साइबर ठग अब ऑनलाइन टास्क के जरिए कमाई का लालच देकर स्कूली बच्चों को भी निशाना बना रहे हैं। इस तरीके में ठग शुरुआत में छोटे-छोटे काम देकर उसके बदले मामूली रकम का भुगतान करते हैं। इससे बच्चों को प्लेटफॉर्म के वास्तविक होने का भरोसा होने लगता है। इसके बाद उन्हें बड़े टास्क और ज्यादा कमाई का लालच दिया जाता है। जब बच्चे के खाते में कथित कमाई की रकम बढ़ जाती है तो उसे निकालने के लिए प्रोसेसिंग फीस, टैक्स, सिक्योरिटी डिपॉजिट या अन्य शुल्क जमा करने को कहा जाता है।

पीड़ित द्वारा रकम जमा करने के बाद फर्जी ऐप बंद हो जाता है या उसे टेलीग्राम ग्रुप से बाहर कर दिया जाता है। ठगों के मोबाइल नंबर और संपर्क के दूसरे माध्यम भी बंद हो जाते हैं। ऐसे मामलों में कई स्कूली बच्चों के अभिभावकों ने साइबर अपराध की शिकायत की है।

छोटी रकम देकर बनाया जाता है भरोसा

साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट के अनुसार, बच्चों को टास्क अर्निंग ऐप और ऑनलाइन ग्रुप के माध्यम से जोड़ा जाता है। उन्हें वीडियो देखने या लाइक करने, ऐप इंस्टॉल करने और प्रोडक्ट रिव्यू करने जैसे छोटे काम दिए जाते हैं। इन कामों के बदले शुरुआत में छोटी रकम दी जाती है।

शुरुआती भुगतान के बाद ठग बड़े टास्क के लिए अधिक रकम मिलने का दावा करते हैं। धीरे-धीरे बच्चे को ज्यादा पैसा लगाने और अधिक रिटर्न हासिल करने के लिए प्रेरित किया जाता है। कुछ मामलों में बच्चों को अपने अभिभावकों के मोबाइल फोन में भी ऐसे ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है और इसके बदले ज्यादा भुगतान का लालच दिया जाता है।

अज्ञात ऐप को अभिभावकों के फोन में इंस्टॉल करना अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है। यदि ऐप को जरूरत से ज्यादा अनुमति मिल जाती है तो डिवाइस में मौजूद वित्तीय ऐप, बैंकिंग जानकारी या अन्य संवेदनशील डेटा के दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है।

पैसे निकालने के समय शुरू होता है असली खेल

ठगी का बड़ा हिस्सा उस समय शुरू होता है जब पीड़ित ऐप पर जमा कथित कमाई को निकालने की कोशिश करता है। ठग दावा करते हैं कि रकम निकालने से पहले टैक्स, प्रोसेसिंग चार्ज, वेरिफिकेशन फीस या सिक्योरिटी राशि जमा करनी होगी।

पीड़ित जब मांगी गई रकम भेज देता है तो कई बार उससे दोबारा भुगतान करने को कहा जाता है। इसके बाद ऐप या टेलीग्राम ग्रुप अचानक बंद हो जाता है और ठगों से संपर्क नहीं हो पाता। इस तरह शुरुआती छोटी रकम का भरोसा आखिरकार बड़ी वित्तीय ठगी में बदल जाता है।

साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को अज्ञात ऐप, वेबसाइट या ऑनलाइन ग्रुप के जरिए मिलने वाले कमाई के प्रस्तावों में स्वतंत्र रूप से शामिल न होने दें।

स्कूलों में चलाया जा रहा जागरूकता अभियान

‘सुरक्षित मंगलवार’ अभियान के तहत साइबर क्राइम एंड सिक्योरिटी यूनिट स्कूलों और कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को ऑनलाइन टास्क और निवेश आधारित ठगी के बारे में जागरूक कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी अनजान ऐप, लिंक या टेलीग्राम ग्रुप के जरिए पैसे जमा नहीं करने चाहिए।

कम समय में बड़ी रकम कमाने का दावा करने वाले ऑनलाइन प्रस्तावों को संदेह की नजर से देखने की सलाह दी गई है। बच्चों से कहा जा रहा है कि ऑनलाइन कमाई का कोई प्रस्ताव मिलने या पैसे ट्रांसफर करने के लिए दबाव बनाए जाने पर तुरंत अपने माता-पिता या शिक्षक को इसकी जानकारी दें।

साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, साइबर ठग शुरुआत में छोटी रकम देकर भरोसा कायम करते हैं और इसके बाद पीड़ित से बड़ी रकम हासिल करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अभिभावकों की निगरानी जरूरी है और किसी भी ऑनलाइन कमाई के प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जानी चाहिए।

बच्चों और अभिभावकों के लिए जरूरी सावधानी

अज्ञात ऐप, टेलीग्राम ग्रुप या कमाई का दावा करने वाले लिंक पर भरोसा नहीं करना चाहिए। शुरुआती टास्क के बदले मिली छोटी रकम को प्लेटफॉर्म के वास्तविक होने का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।

कथित कमाई निकालने के लिए टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी राशि या अन्य शुल्क के नाम पर पैसे जमा नहीं करने चाहिए। OTP, पासवर्ड, बैंक विवरण और UPI PIN भी किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।

अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल में मौजूद अनजान ऐप की नियमित जांच करनी चाहिए और उनके पास मौजूद अनुमतियों पर भी नजर रखनी चाहिए। साइबर ठगी होने पर तुरंत *1930* पर सूचना दें और *cybercrime.gov.in* पर शिकायत दर्ज करें। समय पर शिकायत करने से संदिग्ध लेन-देन को ट्रैक करने और रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।

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