संभल में मृत और मरणासन्न लोगों के नाम पर कथित फर्जी बीमा पॉलिसियां कराकर करोड़ों रुपये के क्लेम हड़पने वाले नेटवर्क की जांच तेज हो गई है।

मृत लोगों के नाम पर ₹100 करोड़ का बीमा फर्जीवाड़ा, 12 राज्यों तक फैले नेटवर्क पर पुलिस का शिकंजा

Team The420
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संभल: उत्तर प्रदेश के संभल में मृत और मरणासन्न लोगों के नाम पर कथित फर्जी बीमा पॉलिसियां कराकर करोड़ों रुपये के क्लेम हड़पने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में नेटवर्क के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड समेत 12 राज्यों तक फैले होने की बात सामने आई है। अब तक 74 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और संभल समेत पांच जिलों में 27 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस का अनुमान है कि कथित बीमा फर्जीवाड़े के जरिए गिरोह ने ₹100 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की।

गैंगस्टर एक्ट में नामजद शेष 22 आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का सत्यापन कराने के लिए पुलिस टीमें अलग-अलग राज्यों और जिलों में भेजी जा रही हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। कथित तौर पर अपराध से अर्जित संपत्तियां चिह्नित होने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें कुर्क करने की कार्रवाई की जाएगी।

12 राज्यों तक फैला नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, गिरोह का नेटवर्क केवल संभल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था। जांच में उत्तराखंड, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों में आरोपियों के संपर्क और संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि गिरोह ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जो गंभीर बीमारी के कारण मरणासन्न स्थिति में थे।

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इन लोगों की पहचान और दस्तावेजों का कथित तौर पर इस्तेमाल कर बीमा पॉलिसियां तैयार कराई जाती थीं। इसके बाद मृत्यु से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर बीमा क्लेम हासिल करने की कोशिश की जाती थी। गिरोह में दस्तावेज जुटाने, पॉलिसी कराने, कथित फर्जी रिकॉर्ड तैयार कराने और क्लेम की रकम तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग लोगों की भूमिका होने की आशंका है।

22 आरोपियों की संपत्ति की जांच

पुलिस अब गैंगस्टर एक्ट में नामजद 22 आरोपियों की संपत्तियों का सत्यापन कर रही है। इनमें बिहार के औरंगाबाद निवासी शैलेन्द्र कुमार और उत्तराखंड के नैनीताल में रहने वाले अभिषेक वर्मा उर्फ अमित उर्फ मन्दीप समेत कई आरोपी शामिल हैं।

इसके अलावा अमरोहा, बुलंदशहर और मुरादाबाद से जुड़े आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच की जा रही है। पुलिस टीमें आरोपियों के स्थायी और वर्तमान पते पर पहुंचकर जमीन, मकान, वाहन, बैंक खातों और अन्य चल-अचल संपत्तियों का विवरण जुटा रही हैं।

जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अपराध से अर्जित रकम से आरोपियों ने कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदीं और उनमें से किन संपत्तियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई के दायरे में लाया जा सकता है।

पहले ही ₹11.89 करोड़ की संपत्ति कुर्क

पुलिस के मुताबिक, 25 आरोपियों के खिलाफ 21 अगस्त 2025 को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। इनमें कथित सरगना ओंकारेश्वर मिश्रा उर्फ करण, सचिन शर्मा और गौरव शर्मा की ₹11.89 करोड़ की संपत्ति पहले ही कुर्क की जा चुकी है।

अब शेष आरोपियों की संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। संभल में सूरजपाल, शाहरुख खान, हीरेन्द्र कुमार, कृष्ण अवतार शर्मा और प्रेम सिंह यादव समेत कई आरोपियों की संपत्तियों का सत्यापन पूरा हो चुका है। दूसरे राज्यों में स्थित संपत्तियों की जानकारी मिलने के बाद संबंधित रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को भेजी जाएगी।

बीमा क्लेम तक पहुंचने के लिए बनाया नेटवर्क

जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर बीमा कंपनियों की प्रक्रिया और दस्तावेजी व्यवस्था का दुरुपयोग करता था। मृत या गंभीर रूप से बीमार लोगों की पहचान से जुड़े दस्तावेज हासिल करने के बाद उनके नाम पर पॉलिसी और क्लेम से संबंधित रिकॉर्ड तैयार किए जाने का आरोप है।

इसके बाद कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बीमा कंपनियों से रकम हासिल करने की कोशिश की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क में किस आरोपी की क्या भूमिका थी और दस्तावेज तैयार कराने से लेकर क्लेम की रकम हासिल करने तक कितने लोग जुड़े थे।

Prof. Triveni Singh ने बताया गंभीर खतरा

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Professor Triveni Singh के अनुसार, ऐसे मामलों में पहचान और दस्तावेजों का दुरुपयोग केवल बीमा धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे संगठित वित्तीय अपराध का पूरा नेटवर्क तैयार हो सकता है। उन्होंने कहा कि अपराधी किसी मृत या गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति की पहचान से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी वित्तीय गतिविधियां संचालित करते हैं, जिससे वास्तविक व्यक्ति या उसके परिवार को लंबे समय तक इसकी जानकारी नहीं हो पाती।

Prof. Triveni Singh ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच में केवल फर्जी क्लेम तक पहुंचना पर्याप्त नहीं है। पुलिस को दस्तावेजों के स्रोत, फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने वाले लोगों, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और रकम के अंतिम लाभार्थियों की पूरी कड़ी जोड़नी चाहिए। उनके मुताबिक, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण पूरे नेटवर्क की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जांच बढ़ने पर सामने आ सकता है बड़ा नेटवर्क

पुलिस का मानना है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। अलग-अलग राज्यों में आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आने के बाद कथित फर्जीवाड़े का वास्तविक आकार और स्पष्ट हो सकता है। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह ने कितने मृत या मरणासन्न लोगों की पहचान का इस्तेमाल किया और बीमा कंपनियों से कितनी रकम कथित तौर पर हासिल की।

पुलिस द्वारा तैयार की जा रही संपत्ति सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन को आगे की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। न्यायालय की अनुमति और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कथित तौर पर अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों की कुर्की की जाएगी। फिलहाल पुलिस गिरोह के वित्तीय नेटवर्क, दस्तावेजों के स्रोत और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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