ग्वालियर: मध्य प्रदेश का ग्वालियर-चंबल अंचल साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने वाले नेटवर्क के रूप में जांच एजेंसियों के रडार पर है। राज्य साइबर पुलिस के Money Restoration Module और हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज शिकायतों से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, महज 122 दिनों में इस क्षेत्र में 12 हजार से अधिक Mule Accounts चिन्हित किए गए हैं। इन खातों के जरिए साइबर ठगी से जुड़ी ₹3 करोड़ से अधिक रकम के लेनदेन का पता चला है। अब जांच एजेंसियां इन खातों के संचालकों, रकम के प्रवाह और उनसे जुड़े संभावित संगठित नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी अक्सर पीड़ित से सीधे अपने बैंक खाते में रकम नहीं मंगाते। इसके बजाय अलग-अलग लोगों के नाम पर खुले या किराये पर लिए गए खातों की एक श्रृंखला का इस्तेमाल किया जाता है। ठगी की रकम पहले एक खाते में पहुंचती है और फिर तेजी से दूसरे, तीसरे और कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है। इस तरह रकम का मूल स्रोत और अंतिम लाभार्थी छिपाने की कोशिश की जाती है।
122 दिनों में 12 हजार से ज्यादा खातों की पहचान
राज्य साइबर पुलिस के आंकड़ों ने ग्वालियर-चंबल में Mule Accounts के इस्तेमाल की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। 122 दिनों के दौरान 12 हजार से अधिक बैंक खातों को साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन के संदिग्ध नेटवर्क में चिन्हित किया गया। इन खातों के माध्यम से ₹3 करोड़ से अधिक रकम के ट्रांजेक्शन का पता चला है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों का वास्तविक संचालन कौन कर रहा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कितने खाताधारकों ने जानबूझकर अपने खाते दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए दिए और कितने लोगों को खाते के दुरुपयोग की जानकारी नहीं थी।
कई मामलों में खाताधारकों को बैंक खाते, ATM Card, SIM या Net Banking Access उपलब्ध कराने के बदले कमीशन या तय रकम दिए जाने की बात सामने आती है। ऐसे मामलों में खाताधारक की भूमिका और उसकी जानकारी की स्थिति जांच का अहम हिस्सा बनती है।
कई राज्यों की ठगी की रकम घुमाने का शक
जांच एजेंसियों के लिए चिंता की बात यह भी है कि ग्वालियर से पहले कई ऐसे गिरोह पकड़े जा चुके हैं, जिन पर अलग-अलग राज्यों से ठगी गई रकम को स्थानीय और दूसरे राज्यों के बैंक खातों के जरिए आगे भेजने का आरोप लगा है।
ऐसे नेटवर्क में एक ही रकम को कई स्तरों पर Transfer किया जाता है। इससे जांचकर्ताओं के लिए Transaction Trail को जोड़ना और रकम के अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
Digital Arrest, Fake Investment, Trading Fraud, Loan Fraud और अन्य Online Scams में इस तरह के खातों के इस्तेमाल की आशंका रहती है। ठगी के बाद रकम को तेजी से अलग-अलग खातों में भेजने से अपराधी जांच एजेंसियों की पकड़ से बचने और रकम को छिपाने की कोशिश करते हैं।
क्या होता है Mule Account?
Mule Account ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या आपराधिक नेटवर्क की ओर से अवैध रकम के लेनदेन के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक अपना Account Number, ATM Card, SIM या Net Banking Credentials किसी दूसरे व्यक्ति को उपलब्ध करा देता है।
इसके बदले उसे कमीशन या एक निश्चित रकम मिलने का लालच दिया जाता है। कुछ मामलों में खाताधारक को यह जानकारी नहीं होती कि उसका खाता Cyber Fraud की रकम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं कुछ लोग जानबूझकर आर्थिक लाभ के लिए अपना Account उपलब्ध कराते हैं।
इसी वजह से जांच एजेंसियां हर खाते के मामले में यह अलग-अलग पता लगाने की कोशिश करती हैं कि खाताधारक की भूमिका क्या थी और उसे कथित अवैध लेनदेन की जानकारी थी या नहीं।
कई लेयर में घूमती है ठगी की रकम
Cyber Fraud में Money Trail को छिपाने के लिए रकम को कई बैंक खातों में Transfer किया जा सकता है। पहला खाता केवल शुरुआती रकम प्राप्त करता है, जिसके बाद पैसा दूसरे और तीसरे खातों में भेज दिया जाता है। आगे यही रकम अन्य खातों में पहुंच सकती है।
जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में Bank Statements, Transaction IDs, Mobile Numbers, Account Holder Details और रकम के आगे के प्रवाह का विश्लेषण करती हैं। कई खातों के बीच समान मोबाइल नंबर, दस्तावेज, IP Details या अन्य Digital Links मिलने पर जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है।
Prof. Triveni Singh ने बताया बड़ा जोखिम
Cyber Crime Expert और पूर्व IPS अधिकारी Professor Triveni Singh के अनुसार, Mule Accounts साइबर अपराध की Financial Chain का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि अपराधी अपने नाम के बजाय दूसरों के खातों का इस्तेमाल कर रकम को कई स्तरों पर घुमाते हैं, जिससे ठगी की रकम और वास्तविक लाभार्थी के बीच दूरी बढ़ जाती है।
उन्होंने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को मामूली कमीशन के बदले Bank Account, ATM Card, SIM, Net Banking या अन्य Banking Access उपलब्ध नहीं कराना चाहिए। ऐसा करना व्यक्ति को गंभीर कानूनी और वित्तीय जोखिम में डाल सकता है।
उनके अनुसार, Cyber Crime की जांच में केवल उस व्यक्ति तक पहुंचना पर्याप्त नहीं है, जिसने पीड़ित को ठगा। Money Trail और Mule Account Network की पूरी कड़ी को तोड़ना जरूरी है, क्योंकि यही नेटवर्क ठगी की रकम को अपराधियों तक पहुंचाने में मदद करता है।
Money Trail से नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में चिन्हित खातों की जांच अब केवल खाताधारकों की पहचान तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों में पहुंची रकम कहां से आई और उसके बाद किस-किस खाते में Transfer हुई।
जांच में यह भी देखा जा सकता है कि क्या अलग-अलग खातों के बीच कोई साझा Mobile Number, Device, IP Address, दस्तावेज या अन्य Digital Connection मौजूद है। ऐसे Links मिलने पर कई खातों को एक ही नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
12 हजार से अधिक Mule Accounts की पहचान साइबर ठगी की रकम को खपाने वाले नेटवर्क की गंभीरता को सामने लाती है। अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे Financial Network की अंतिम कड़ी तक पहुंचना, वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करना और ठगी की रकम के प्रवाह को रोकना है।
